ताजिए बनाकर अकीदत के साथ मनाया मोहर्रम का त्यौहार

अशोकनगर मुंगावली अलीम डायर।

मोहर्रम की 1 तारीख लगते ही मुस्लिम समाज का नव वर्ष शुरू हो जाता है जो मोहर्रम का महीना कहलाता है यह महीना गमी का महीना कहलाता है इस महीने में मुस्लिम समाज के धर्म गुरुओं इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत हुई थी इसलिए इस महीने में उनकी शहादत को याद किया जाता है 1 तारीख से है मुस्लिम समुदाय में मिलाद शरीफ कुरान खानी कराई जाती है और रोजे भी रखे जाते हैं जो मोहर्रम की 10 तारीख तक बदस्तूर जारी रहते हैं। इस दौरान अकीदतमंद लोग ताजिए बनाते हैं जिसको बनाने का काम काफी समय पूर्व से लगाया जाता है  जिसमें काफी कारीगरी नक्काशी कढ़ाई  की मेहनत की जाती है जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते है। मोहर्रम की 7,9 ओर 10 तारीख को नगर में सवारिया उठाई गई अखाड़ा भी उठाया गया सवारी में सभी समाज के लोगो ने शहरे बांदे अपनी मुरादे मांगी तो वहीं अखाड़े में करतब बाज लोग तरह-तरह के करतब बाजी दिखाई जिसे लोगो ने उत्साह पूर्वक देखा। मोहर्रम की 10 तारीख को शहर में ताजियों का सुबह और शाम गस्त लगाया गया इसके बाद शाम को बस स्टैंड जय स्तंभ चौराहे पर ताजियों को रखकर एक विशाल मजलिस का आयोजन किया गया इस दौरान काफी बड़ी मात्रा में तबर्रुक के तौर पर जगह-जगह लंगर भी बनवाया गया जिसे सभी समाज के लोगो ने  ग्रहण किया इसके बाद ताजियों को कर्बला शरीफ ले जाकर ठंडा कर दिया गया।

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