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'बिल्ली ने जन्मे तीन बच्चे'..तो क्या इस साल अच्छी होगी बारिश

बैतूल/आठनेर ।। हेमंत पवार/ प्रकाश खातरकर ।।

ख़राब मौसम, समुद्री तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की अग्रिम सूचनाओं के लिए भारत ने अनेक सेटेलाइट अंतरिक्ष मे भेजी और बड़ी बड़ी मशीनों को लगाया जो लगातार समय के पूर्व आगाह करते और इसकी जानकारी भारत सरकार अपने दूर संचार माध्यमो से देश की जनता तक सतर्कता के साथ पहुचाते रहती है| जिसके कारण समय समय पर हजारों लोग अपनी जान माल बचाने में कामयाब रहे है। उसके बावजूद आज इक्कसवीं सदी में देश के किसान का भरोसा मौसम विज्ञान पर उतना नही है जितना होना चाहिए। क्यूंकि किसानों के लिए कई बार मौसम की जानकारी गलत साबित हो जाती है|  आज भी किसान मौसम विज्ञान की संभावनाओं को चुनावी एग्जिट पोल की तरह खारिज कर देता है। अब इसकी वजह से किसान लाभ में है या हानि में यह तो नही बताया जा सकता, लेकिन यह भी तय है कि अभी भी किसान सदियों से चली आ रही परम्पराओ के आगे नतमस्तक है और किसान अपने अलग ही तरीके से जानने की कोशिश में रहते हैं कि मानसून कैसा रहेगा और बारिश कब होगी, कई बार ग्रामीणों का यह अनुमान सही भी साबित हो जाता है, जिसके चलते ग्रामीणों के यह टोटके आज भी भरोसेमंद है|  

इन दिनों एक चर्चा आठनेर तहसील के विभिन्न गावो में जोर शोर से चल रही है कि बिल्ली से कितने बच्चे जन्मे है... खेती किसानी से जुड़े लोग एक दूसरे के गावो के हाल जानने के साथ ही बिल्ली से जन्मे बच्चों की संख्या जरूर पूछ रहे है, साथ ही माह की किस तारीख को जन्मे उसका भी पता लगा रहे है | यह इसलिए ताकि पता चल सके जून माह में किस तारीख के आस पास से अच्छी वर्षा होना आरम्भ होंगी। हमारी तहकीकात में अधीकाँश ग्रामो में तीन बच्चों के जन्म की बात सामने आई है इस आधार पर इस वर्ष तीन माह अच्छी बरसात की संभावना जानकार किसानो ने जताई है।

तहसील के ग्राम मानी के सूरज जावरकर, बैरमथाना के मतन कवडे, दाभोना के कलीराम बारस्कर सहित आठनेर और गोंदीघोगरा के अधिकतर किसानो ने अपने अपने गावो में बिल्ली के तीन बच्चों के जन्म लेने की जानकारी दी और नीयत तारीख का भी मिलान किया उसको आधार बनाकर किसान इस वर्ष तीन माह बरसात होने की संभावना बता रहे है। साथ ही 10 से 15 जून के बीच बरसात शुरू होने का भी दावा कर रहे है। इसके साथ ही किसानो का मानना है की यदी नीयत समय से उनके अनुमान के मुताबिक वर्षा होती है तो कौनसी फसल का उत्पादन अच्छा होगा उसकी भी जानकारी एक गांव से दूसरे गांव के किसानो से साझा करने में लगे है। देखना है मौसम विज्ञान के आगे किसानों की ये परम्परागत भविष्यवाणी कितनी सटिक बैठती है।

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