फर्जी डॉक्टर ने सेना में पदस्थ बेटे के इलाज का मांगा 16 करोड़ का भुगतान...

भिण्ड - मनीष ऋषीश्वर

जिले में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा इलाज के नाम पर सोलह करोड़ का बिल सेना को भेजे जाने का मामला सामने आया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब सेना से एक लेटर जिलाधिकारी को लिखा गया जिसमें बिल के साथ ही क्लीनिक की जांच की बात कही गयी थी। कलेक्टर के पास लेटर पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्यवाही करते हुए क्लीनिक को सील कर दिया है। अगर आप अपना इलाज करवाने जाते हैं तो आप कुछ हजार और गंभीर बीमारी में कुछ लाख रुपये का खर्चा होने की उम्मीद ही करेंगे। और यदि आपको इलाज के बाद करोड़ों का बिल थमा दिया जाए तो आप क्या करेंगे? सिर की चोट के इलाज के लिए भी कुछ लाख का बिल ही आप सोचेंगे, लेकिन उसकी जगह अगर सोलह करोड़ का बिल आपके सामने आ जाये तो आप क्या करेंगे। ऐसा ही एक मामला सामने आया है भिण्ड जिले में। यहां पर एक आयुर्वेदिक डॉक्टर ने इलाज के नाम पर 16 करोड का बिल सेना को भेज दिया। खास बात यह है कि एक जवान के सिर की चोट के इलाज के लिए यह बिल भेजा गया। वह जवान और कोई नहीं बिल भेजने वाले डॉक्टर का अपना खुद का बेटा है। आखिर यह पूरा मामला क्या है यह हम आपको बताते हैं।

 रौन कस्बे का आयुष क्लीनिक उस समय सुर्खियों में आ गया जब जिला अस्पताल की टीम इसे सील करने पहुंची। मामले की पड़ताल की तो पता चला कि यह क्लीनिक भारी भरकम बिल सेना को भेजे जाने के चलते ही सील किया जा रहा है। दरअसल रौन थाना इलाके में आयुष क्लीनिक नाम से एक क्लीनिक संचालित है। जिसके मालिक डॉक्टर आई एस राजावत हैं। डॉ राजावत का बेटा सौरभ राजावत भारतीय सेना की 19वीं मेकेनिकल इन्फेंट्री में पदस्थ है। सन 2013 में ड्यूटी के दौरान सौरभ के सर में चोट लग गई थी, जिसके बाद सेना ने सौरव का इलाज करवाया। लेकिन वह पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ और उसे सिर में दर्द और चक्कर आने की समस्या रहने लगी। जिसके बाद वह छुट्टी लेकर घर आ गया। घर पर सौरभ के पिता डॉक्टर आई एस राजावत ने ही अपने बेटे का इलाज अपने क्लीनिक में शुरू किया। जब भी सौरभ छुट्टी पर घर आता तो उसका इलाज किया जाता था। सबसे बड़ी बात यह है कि डॉक्टर राजावत एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं लेकिन उन्होंने अपने लड़के का इलाज एलोपैथिक पद्धति से किया। इसके बाद डॉक्टर राजावत ने छह छह करोड रुपए के दो बिल और चार करोड रुपए का एक बिल बनाकर कुल 16 करोड़ रुपए के बिल मेडिकल क्लेम के लिए सेना को भेज दिए।

सोलह करोड के बिल देखकर सेना के अधिकारी सकते में आ गए और उन्होंने जिला कलेक्टर के नाम एक पत्र लिखकर उन्हें इस बात की जानकारी दी। पत्र मिलने पर कलेक्टर ने इसे सीएमएचओ कार्यालय को कार्रवाई के लिए भेज दिया। जिसके बाद कार्यवाही करते हुए जिला अस्पताल की टीम ने क्लीनिक को सील कर दिया। जब डॉक्टर आई एस राजावत से मामले के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि उन्होंने केवल साठ साठ हजार रुपये के दो बिल और चालीस हजार का एक बिल कुल मिलाकर एक लाख साठ हजार रुपये के बिल सेना को भेजे। लेकिन इन बिलों में कैसे जीरो बढ़ाकर इनको करोड़ों में पहुंचा दिया गया यह बात उनकी समझ से परे है और इसकी उन्हें कोई जानकारी भी नहीं है। इस कार्रवाई के बाद डॉक्टर राजावत ने सेना पर आरोप लगाते हुए  कहा है कि उनके बेटे सौरभ के सर में सूबेदार ने ही सरिया मार कर उसे गंभीर चोट पहुंचाई थी और मामले को दबाने के लिए एक प्राइवेट अस्पताल में सौरभ का इलाज करवाया गया।  लेकिन जब सौरभ ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने खुद अपने बेटे का इलाज शुरू कर दिया। डॉक्टर राजावत ने आरोप लगाया है कि असली मामले को दबाने के लिए सेना के अधिकारी यह पूरा षड्यंत्र उनके खिलाफ रच रहे हैं। 

सिर की चोट के इलाज के लिए 16 करोड़ के बिल भेजे जाने की बात किसी को भी हजम नहीं हो रही है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि डॉक्टर सही बोल रहा है या फिर सेना। मामला गंभीर है और इसकी जांच भी जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार की हरकत ना करे।



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