विश्वासघात दिवस : कांग्रेस नेता ने गिनाई मोदी सरकार की 5 नाकामियां

भिंड।

आज 26  मई को मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी पार्टियां विश्वासघात दिवस मना रही है।वही सभी विपक्षी दल सरकार पर विफलताओं का आरोप लगाते हुए  देश भर में प्रदर्शन कर रहे है। साथ ही हर जिले में भी कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है। इस मौके पर देशभर से कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है।इसी कड़ी में भिंड के कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमेश दुबे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मोदी के चार सालों में जो विफलताएं और नामकामियां हुई उनकों पांच बिंदुओं में बताया है। पहली नाकामी में उन्होंने किसानों की पीड़ा, दूसरी में बेरोजगारी, तीसरी में राष्ट्रीय सुरक्षा,चौथी में अर्थव्यवस्था औऱ अंत में पांचवी में दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक के साथ साथ महिलाओं पर अत्याचार के बारे में लिखा है।

किसानों की पीड़ा

देश-प्रदेश में किसानों की पीड़ा को लेकर दुबे ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूनतम समर्थन मू्ल्य के ऊपर पचास प्रतिशत अतिरिक्त कीमत का वादा किया था, लेकिन बीते चार सालों में आश्वासन के सिवाय किसानों को कुछ नही दिया।यूपीए की सरकार द्वारा ७२ हजार करोड़ की कर्ज माफी की गई थी , लेकिन भाजपा के इतने सालों में भी ऋण माफ ना करने से ग्रामीणों में ग्रस्तता बहुत बढ़ चुकी है।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना निजी बीमा कंपनी लाभ योजना बन चुकी है।यूपीए की सरकार के दौरान कृषि विकास की दर ४.२ थी जो अब घटकर १.७ हो गई है।मोदी सरकार के राज में कृषि निर्यात कम हो गया है और आयात बढ़ गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।मोदी सरकार में किसानों को सिर्फ और सिर्फ निराश किया है।

मुंह फाड़ती बेरोजगारी और लापता नौकरियां

दुबे ने देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर लिखा है कि मोदी सरकार ने हर साल देश में दो करोड़ नौकरिया देने का वादा किया था। इस प्रकार चार सालों में आठ करोड़ नौकरियां हो गई।लेकिन इन चार सालों में आठ लाख नौकरियां तक नही दी गई बल्कि नोटबंदी के बाद १५ लाख नौकरियां खत्म हुई है। वही त्रुटिपूर्ण जीएसटी के कारण आर्थिक गतिविधियाों में और गिरावट आई है।देश में नौजवनों के लिए नौकरियों का घोर संकट है और मोदी सरकार के पास इसका कोई समाधान नही है।मुंह के बल गिरती अर्थव्यवस्था नौकरियों के मामले में असमर्थ साबित हुई है।

खतरे में राष्ट्रीय सुरक्षा

दुबे ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि मोदी सरकार ५६ इंच का सीना, सशक्त विदेश नीति और पड़ोसी देश चीन पाकिस्थान से निपटने का ढिंढोरा पीटते हुए सत्ता में आई थी, लेकिन अब तक कुछ नही हुआ। मोदी सरकार लगातार बिना परिणाम के गलतियों पर गलतियां कर रही है।अब तक विभिन्न आंतकी हमलों में ३७१ जवान शहीद हो चुके है और मई २०१४ से आज तक तीन हजार बार सीमा उलंघन की घटनाएं हो चुकी है, लेकिन अब तक भारत की तरफ से कोई एक्शन नही लिया गया है।वही दुबे ने डोकलाम विवाद को लेकर भी मोदी को जिम्मेदार ठहराया है और कई आरोप लगाए है।

औंधी गिरती अर्थव्यवस्था

दुबे ने अर्थव्यवस्था को लेकर लिखा है कि पिछले चार सालों में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो गए है।जीडीपी के आंकड़ों में बेहतरी के बावजूद चार सालों में जीडीपी में कमी आई है।निर्यात कम होता जा रहा है और आयात ज्यादा। कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्पादन मे भी कमी आई है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। आठ लाख करोड़ की लागत की परियोजनाएं आज भी रुकी हुई है । बीते चार सालों में 11  बार एक्साईज ड्यूटी बढ़ाकर मोदी सरकार ने अपनी अादमी की जेब तक निचोढ़ ली है।पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान  छू रहे है। जनता द्वारा सौ बार मांग करने के बावजूद ना तो एक्साइज ड्यूटी कम की गई है और ना ही वैट टैक्स।बैकिंग व्यवस्था पर घोर संकट मंडरा रहा है। मोदी शास्त्र ने भारतीय अर्थव्यवस्था को धराशाही कर दिया है।

दलित/आदिवासियों/अल्पसख्यकों/महिलाओं पर अत्याचार

 जिलाध्यक्ष रमेश दुबे ने अपने अंतिम पांचवें  बिंदु में दलित, आदिवासियों, अल्पसख्यकों और महिलाओं पर अत्याचार के बारे में लिखा है।उन्होंने कहा है कि इन चारों वर्ग पर अत्याचार अभी तक के चरम पर है।जम्मू-कश्मीर के कठुआ और यूपी के उन्नाव की घटनाएं बताती है कि देश में महिलाओं का सम्मान का दिखावा करने वाली भाजपा कैसे आरोपियों को बचाने में जुटी हुई है। ऊना में दलितों की पिटाई, राजस्थान में डी-मेघवाल की हत्या, रोहित  वेमूला की आत्महत्या औऱ मध्यप्रदेश में शासकीय नौकरियों के आवेदकों के सीने पर एससी-एसटी शब्द अंकित करना। इस बात का प्रमाण है कि भाजपा कैसे दलितों को प्रताड़ित कर रही है। वही जिस पर एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने का प्रय़ास किया गया उससे तो ऐसा ही लगता है कि गरीबों की रक्षा कर गरीबी खत्म करने वाली मोदी सरकार इन चार सालों में असफल हुई है। ये सब बातें मोदी सरकार की विफलताएं सिद्ध करती है।