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शिवराज जी, सुनिये..किसान हितैषी कलेक्टर के बोल

भिण्ड| मनीष ऋषीश्वर|

जहां एक ओर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान किसानों के हित और कल्याण के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं वहीं उनके ही प्रदेश में कलेक्टर किसानों को लेकर बेहद गैर जिम्मेदाराना बयान दे रहे है...बीते रोज कृषि उपज मंडी में  जब एक ही व्यापारी के द्वारा सरसों की खरीदी की बोली लगाई जा रही थी  तो किसान आक्रोशित हो गए  जिसकी वजह से  हालात संभालने के लिए  नवागत कलेक्टर आशीष कुमार को मंडी पहुंचना पड़ा, कलेक्टर ने किसानों के बीच ही खड़े होकर कहा कि  "हम व्यापारी को घर से बुलवाकर बोली नहीं लगवाएंगे। जो भी व्यापारी यहां हैं वही बोली लगाएंगे, चाहे दो हों या दस हों। आप यहां के नहीं है तो दूसरी जगह जाइये। जो बोली लगाएगा वो सही लगाएगा, उसमें कंपटीशन होगा। आप ये नहीं कह सकते कि आप बोली क्यों नहीं लगा रहे।" यही नहीं इसके लिए कलेक्टर साहब ने जो उदाहरण दिया वो भी गले नहीं उतर रहा। आखिर एक कलेक्टर कैसे सरकारी गल्ला मंडी की तुलना एक निजी परचून की दुकान से कर सकता है? सुनिए कलेक्टर साहब का उदाहरण- "आप किसी परचुने की दुकान पर जाइये तो आप उससे ये नहीं कह सकते काय आप कोलगेट काय नहीं बेच रहे"

आपको बता दें कि भिण्ड गल्ला मंडी में डेढ़ सैकड़ा से अधिक व्यापारी रजिस्टर्ड हैं। लेकिन दबंगई और मिलीभगत के चलते केवल एक व्यापारी ही मनमाने तरीके से बोली लगा रहा है। ऐसे में जब किसानों ने कलेक्टर से शिकायत की तो कलेक्टर का यह बयान सामने आया। क्या एक जिलाधिकारी द्वारा इस प्रकार से किसानों से बात किया जाना उचित है? वो भी तब जब प्रदेश और देश मे किसान आंदोलन की चिंगारी सुलग रही है। ऐसे में अगर किसान आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लें तो कलेक्टर को ही जिम्मेदार माना जायेगा।


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