कमलनाथ के इन मंत्रियोंं की कुर्सी पर खतरा, प्रत्याशी हारे तो जाएगा पद!

भोपाल। लोकसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही अब कमलनाथ के मंत्रियों की कुर्सी पर तलवार लटक रही है। मख्यमंत्री कमलनाथ ने चुनाव पूर्व मंत्रियों को चेतावनी दी थी कि अगर उनके क्षेत्र के उम्मीदवार को जीत नहीं मिलती है तो उन्हें अपना मंत्री पद गंवाना पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव से पहले हुई बैठक में सीएम ने इस बार को साफ कर दिया था कि अगर मंत्रियों के क्षेत्र में कांग्रेस को हार मिलती है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। 23 मई को नतीजे आना है। उनसे हले एग्जिट पोल ने कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया है। एग्जिट पोल के अनुसार पार्टी को प्रदेश में दो से पांच सीट ही मिलने की संभावना जताई गई है। जिसके बाद मंत्रियों की रात की नींद उड़ गई है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक दर्ज ऐसी सीटों हैं जहां पर अगर नतीजे कांग्रेस की उम्मीद के मुताबिक नहीं आए तो मंत्रियों को उनकी कर्सी से इस्तीफा देना पड़ सकता है। उनकी पार्टी के विधानसभा सीटों और लोकसभा क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्रों में हारने की संभावना है। मंत्री पीसी शर्मा दक्षिण-पश्चिम भोपाल सीट से विधायक हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि दक्षिण-पश्चिम भोपाल निर्वाचन क्षेत्र से सिंह की संभावनाएं उत्साहजनक नहीं हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान शर्मा को लगभग 7000 मतों की बढ़त मिली थी। इस बार सिंह को इस क्षेत्र से नेतृत्व मिलने की संभावना दूर की कौड़ी लगती है।

गृह मंत्री बाला बच्चन मुख्यमंत्री के काफी करीबी माने जाते हैं। उन्होंने बड़वानी के राजपुर से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है। राजपुर खरगोन लोकसभा क्षेत्र में आता है। यहां बच्चन की साख दांव पर लगी है। बच्चन खुद विधानसभा चुनाव में महज 900 मत के अंतर से जीते हैं। यहां से गोविंद मुजालदा को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है। ऐसा कहा जा रहा है कि मुजालदा को बच्चन के क्षेत्र से लीड मिलना काफी मुश्किल नज़र आ रहा है। वहीं, मंत्री संचिव यादव कसरावद क्षेत्र से आते हैं। यह विधानसभा भी खरगोन लोकसभा संसदीय क्षेत्र के हिस्सा है। यादव ने अपना पूरा समय खंडवा चुनाव प्रचार में बिताया है। वहां से उनके भाई अरूण यादव चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यहां भी कांग्रेस को अच्छी परीणाम की उम्मीद कम है। यहां कांग्रेस उम्मीदवार के जीतने की संभावना कम हैं। वहीं, मंत्री प्रदीप जयसवाल ने विधानसभा चुनाव में निर्दलीय वारासिवनी से चुनाव जीता है। यह विधानसभा सीट बालाघाट संसदीय क्षेत्र में आती है। यहां से मधु भगत चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर भी कांग्रेस के लिए काफी मुश्किल दिखाई दे रही है। 

मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। कांग्रेस ने इस सीट से अशोक सिंह को उतारा है। यह कहा जाता है कि तोमर की विधानसभा सीट से सिंह को बढ़त मिलने की संभावना है। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सोनकच्छ विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं जो देवास संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। प्रहलाद टिपानिया देवास से चुनाव लड़ रहे हैं। वर्मा ने अपना ज्यादातर समय पंकज संघवी के चुनाव प्रचार में दिया, जो इंदौर से चुनाव लड़ रहे हैं। वर्मा के निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस चुनाव हार सकती है। मंत्री गोविंद सिंह भिंड विधानसभा सीट के लहार का प्रतिनिधित्व करते हैं। सिंह को उनकी विधानसभा सीट और भिंड पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया था। कहा जाता है कि भिंड में कांग्रेस उम्मीदवार देवाशीष जरारिया सहज नहीं हैं।

मंत्री प्रभुराम चौधरी सांची विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं जो विदिशा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है। शैलेन्द्र पटेल चौधरी के क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी को विदिशा में मजबूत कहा जाता है और उसे चौधरी के क्षेत्र से बढ़त मिल सकती है। मंत्री हर्ष यादव देहरी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं जो दमोह लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। प्रताप लोधी दमोह से चुनाव लड़ रहे हैं। बताया गया है कि देवड़ी में लोधी की संभावनाएं उज्ज्वल नहीं हैं। यादव को वोट मिलने में कठिनाई हो रही है क्योंकि दोनों दलों ने लोधी समुदाय से संबंधित उम्मीदवार उतारे हैं। मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर प्रथ्वीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जो निवाड़ी जिले के अंतर्गत आता है। कांग्रेस ने इस सीट से किरण अहिरवार को टिकट दिया, जो टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। बताया गया है कि अहिरवार के पृथ्वीपुर से नेतृत्व करने की संभावना है।


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