फ्लोर टेस्ट : बैकफुट पर भाजपा, फिर सामने आई समन्वय की कमी

भोपाल। मप्र भाजपा में एक बार फिर नेताओं के बीच आपसी समन्वय की कमी सामने आई है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने दो दिन पहले बयान जारी कर कमलनाथ सरकार से बहुमत साबित करने की मांग की थी, लेकिन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने इस मांग को खारित करते हुए जनहित के मुद्दों पर चर्चा की मांग का समर्थन किया। वहीं इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले खामोश रहे, फिर बुधवार को कहा कि हमने फ़्लोर टेस्ट के लिए नहीं कहा| शिवराज सिंह ने कहा नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने जन समस्याओं की बात कही है, उन पर चर्चा की बात की है| उन्होंने फ़्लोर टेस्ट के लिए नहीं कहा| जबकि भार्गव ने मीडिया से चर्चा में सरकार को लूली लंगड़ी सरकार बताते हुए बहुमत साबित करने की मांग की थी, मामला तूल पकड़ने के बाद भार्गव ने राज्यपाल को लिखे पत्र में फ्लोर टेस्ट की बात नहीं लिखी|  नेता प्रतिपक्ष द्वारा फ्लोर टेस्ट की मांग करना भाजपा की अगली रणनीति का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने जल्दबादी में यह कदम उठाया। जिसको लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक भाजपा में चर्चा है।

गोपाल भार्गव के बयान का मप्र भाजपा के किसी भी नेता ने समर्थन नहीं किया है। केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, नरोत्तम मिश्रा ने प्रत्यक्ष रूप से भार्गव के बयान का समर्थन नहीं किया है, लेकिन कमलनाथ सरकार कितने दिन चलेगी, यह बात जरूरत की है। लोकसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ सरकार पर हमला करने वाले शिवराज सिंह चौहान की चुप्पी चर्चा का विषय है।  दरअसल भारतीय जनता पार्टी मप्र में फिर से सत्ता में आने की हर संभव कोशिश करेगी। यदि भाजपा अपनी रणनीति में सफल रहती है, तब भाजपा विधायक दल का नेता कौन होगा। यह अभी तय नहीं है। इसको लेकर अगले कुछ हफ्तों के भीतर दिल्ली में बैठक होना है। मप्र में सत्ता की कोशिशों से पहले तय होगा कि अगला मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए। क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फिलहाल इसके प्रबल दावेदार है। जबकि नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, नरेन्द्र सिंह तोमर एवं खुद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव भी इस दौड़ में शामिल हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान मप्र भाजपा के नेताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी देखने को मिली है। 

सत्र में हो सकती है उठापठक

लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल के आंकड़ों पर भरोसा करें तो केंद्र में एनडीए की सरकार बनने की लगभग पूरी संभावना है। केंद्र में सरकार बनने के बाद अगले महीने मप्र, राजस्थान, कर्नाटक को लेकर बड़ी बैठक होगी। इसी बैठक में तय होगा कि यदि भाजपा इन तीनों राज्यों में सरकार बनाने की कोशिशें करती हैं तब मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा के उच्च सूत्रों के अनुसार अगले महीने मप्र विधानसभा का मानसून सत्र होना है। इसी दौरान मप्र की राजनीति में उठापठक देखने को मिल सकती है। 

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