नए टेंडर को लेकर फिर संदेह के घेरे में ई-टेंडरिंग में फंसे MPSIDC के अधिकारी

भोपाल।

मप्र राज्य इलेक्ट्रानिक्स विकास निगम एक बार फिर 2019  के  टेंडर को लेकर विवादों में घिर गया है। खबर है कि एमपीएसआईडीसी के अधिकारियों ने चहेती कंपनियों को फायदा ना मिलने पर सभी टेंडर कैंसिल कर दिए । खुलासा तब हुआ जब कंपनियों ने इसकी शिकायत विभागीय मंत्री से की।फिलहाल इस मामले में जांच चल रही है, जल्द ही बड़ा खुलासा होने की संभावना है।

दरअसल, एमपीएसआईडीसी ने फरवरी में 2019  में दो नग सर्वर लोड बैलेंसर का टेंडर निकाला था।इसमें छह कंपनियों ने हिस्सा लिया था।लेकिन टेंडर की तकनीकी बिड खोलने के बाद भाग लेने वाली कंपनियों को बिड में अपलोड किए गए दस्तावेज देखने को ही नही मिले।यानि कौन योग्य और कौन अयोग्य है इसकी जानकारी नही दिखाई दे रही थी, करीब एक महिने तक ऐसे ही चलता रहा और टेंडर की डेट आगे बढा दी गई और फिर अचानक एक दिन एमपीएसआईडीसी ने सर्वर लोड बैलेंसर की जरुरत ना होने का कारण टेंडर ही निरस्त करवा दिए।जब यह बात अन्य कंपनियों तक पहुंची तो उन्होंने आपत्ति जताई। कंपनियों का कहना था कि जब स्टेट डाला सेंटर के पूर्व में टेंडरों में पहले से सर्वर लोड बैलेंसर शामिल था तो टेंडर क्यों नही निकाला।वही कुछ कंपनियों को आरोप है कि चहेती कंपनियों को टेंडर ना मिल पाने के चलते ये टेंडर रद्द किए गए है।

बताया जा रहा है कि इस टेंडर में दो कंपनियां एक्सट्रानेट और डायनाकॉन शामिल हुई थी।दोनों ने एक जैसे दस्तावेज तकनीकी बिड में अपलोड किए थे।जिसके चलते दोनों कंपनियां फाइनेंशियल बिड में क्वालिफाई ही नही पाई, जब यह बात अधिकारियों को पता चली तो उन्होंने टेंडर ही निरस्त कर दिए।हैरानी की बात तो ये है कि जब इन दोनों कंपनियों ने एक जैसे दस्तावेज लगाए तो इन्हें ब्लैकलिस्टेट किया जाना था, लेकिन ऐसा नही किया गया, जब टेंडर ही कैंसिल कर दिया। इससे बाकी चार कंपनियों को नुकसान हुआ और उन्होंने आपत्ति दर्ज की।

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