सड़क पर भरा घुटनों तक पानी..बीच गली में कुर्सी डालकर बैठे गए महापौर

भोपाल।

पूरे देश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। कई इलाकों में जल भराव की स्थिति हो गई है।नदी, नाले उफान पर है। मुंबई, नासिक, गुजरात, बिहार के बाद अब भोपाल में भी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति पनपने लगी है।लोग परेशान हो रहे है, घरों में पानी घुस रहा है।आज सुबह तक राजधानी की कई प्रमुख सड़कें, चौराहे और निचली बस्तियां पानी से लबालब हो गईं। राजधानी के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा और भेल क्षेत्र की कई कॉलोनियों, व्यस्ततम क्षेत्र एमपी नगर, हमीदिया रोड और पुराने भोपाल की कई प्रमुख सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया।  ऐसे में जनता नगर निगम को घेरे इसके पहले ही निगम ने पीडब्ल्यू विभाग को घेर लिया है।  भोपाल के मेयर आलोक शर्मा पानी से लबालब भरी गली के बीचों-बीच कुर्सी डालकर बैठ गए। ऐसे में नगर निगम के वे तमाम दावे फेल हो रहे है जो उन्होंने बीते दिनों लोगों से कहे थे।

 दरअसल, भोपाल के सेफिया कॉलेज के पास से गुजर रहे नाले पर पीडब्ल्यूडी का पुल है। इस पुल के कारण नाले का पानी बाधित हो रहा है और पानी सड़कों पर बह रहा है। लोगों के घरों में पानी घुस गया है। आज गुरुवार सुबह मेयर आलोक शर्मा शहर की निचली बस्तियों में जलभराव की जानकारी लेने निकले थे, तभी उन्हें लोगों के असंतोष और गुस्से का सामना करना पड़ा, जिसके चलते मेयर आलोक शर्मा खुद ही रास्ते पर कुर्सी लगाकर बैठ गए। महापौर सेफिया कॉलेज इलाके में बीच रास्ते में कुर्सी लगाकर बैठ गए और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।महापौर के कहना है कि जब तक पीडब्ल्यूडी के अधिकारी इस स्थिति से निपटने के लिए सेफिया कॉलेज नहीं आएंगे तब तक वे धरने से नहीं उठेंगे। मैंने कलेक्टर को यहां का नजारा देखने के लिए बुलाया है ताकि अगली बार यह रिपीट न हो।

वही इस मामले मे पीडब्ल्यूडी के अधिकारी इस नाले को लेकर कोई कदम नहीं उठा रहे जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और वे अपना गुस्सा नगर निगम पर निकाल रहे है। पीडब्ल्यूडी विभाग के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार से नाराज महापौर आलोक शर्मा सेफिया कॉलेज के पास कॉलोनी में भरे पानी में ही कुर्सी लगाकर धरने पर बैठ गए हैं।

हैरानी की बात तो ये है कि महापौर के इस कदम से लोगों का गुस्सा शांत नही हुआ बल्कि वो बीच पानी मे ही महापौर के पास पहुंचे और इस मुसीबत से निजात दिलाने की बात कही।बीते साल भी पुराने भोपाल और सेफिया कॉलेज की सड़कों का यही हाल था, लेकिन इसके बावजूद निगं नही जागा। जहां लोग अपना गुस्सा नगर निगम अधिकारियों पर उतार रहे हैं, तो वहीं नगर निगम इन गलतियों का ठीकरा PWD के माथे मढ़ रहा है, लेकिन लोगों की समस्याओं का किसी के पास कोई हल नहीं है।