यूथ बनाएगा सरकार, नई पीढ़ी को क्या लुभा पाएंगे 60 पार के उम्मीदवार

भोपाल। मध्यप्रदेश में इस बार पांच करोड़ से ज्यादा मतदाता सरकान बनाने का फैसला करेंगे। इनमें से ज्यादा तर युवा वोटर हैं। जो प्रत्याशियों को जिताने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। युवाओं के लिए रोजगार, बेहतर शिक्षा और विकास के मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। जबकि प्रदेश की सियासत इस बार घूम फिरकर मंदिर और भगवान राम पर आ गई है। असल मुद्दा है 60 की उम्र पार कर चुके मंत्रियों का वह इस बार युवाओं को कैसे लुभाएंगे। अगर युवा वोटरों ने उम्रदराज नेताओं कों नजरअंदाज किया तो कई दिग्गज नेता-मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है। इनमें बीजेपी को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

जानकारी के मुताबिक इस बार प्रदेश भर में 15 लाख युवा वोटर हैं। इनमें से कुछ तो पहली बार सरकार चुनेंगे। जबकि 40 की उम्र से कम वालों की संख्या 56 फीसदी है। दो पीढ़ी में ये बड़ा अंतर है जो पार्टी और नेताओं को सता रहा है। पारंपरिक वोटर से हटकर इस बार युवा वोटर मेजर रोल प्ले करेंगे। ऐसे में उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जबकि शिवराज कैबिनेट में आधे से ज्यादा मंत्री 60 पार हैं। और सभी के विधानसभा क्षेत्र में इस बार हर तीसरे मतदाता की औसत उम्र 29 साल है। इसमें सीएम शिवराज सिंह चौहान का क्षेत्र बुधनी भी शामिल है। यहां 33 फीसदी वोटर 20 या फिर 25 से कम उम्र का है। जबकि शिवराज खुद 60 के करीब हैं। 

अब सवाल उठता है 60 पार वाले नेता कैसे युवाओं को लुभाएंगे। जब ये सवाल शिवराज की मंत्री कुसुम सिंह महदेले से पूछा गया तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। मेहदेले 75 के करीब हैं। उनका विधानसभा क्षेत्र पन्ना है। यहां हर तीसरा वोटर 29 साल का है या फिर उससे कम उम्र का है। इस सवाल का जवाब महदेले ने आचार सहिंता का हवाला देते हुए टाल दिया। 

ये मंत्री हैं 60 पार

कुसुम सिंह महदेले 75 , रुस्तम सिंह 73 मुरैना, जयंत मलैया 71 दमोह, गौरीशंकर शेजवार 68 सांची, माया सिंह 68 ग्वालियर पश्चिम, पारस चंद जैन 68 उज्जैन उत्तर, गोपाल भार्गव 66 रेहली, उमाशंकर गुप्ता 66 भोपाल दक्षिण-पश्चिम, गौरीशंकर बिसेन 66 बालाघाट, शरद जैन 66 जबलपुर उत्तर, बाल कृष्णा पाटीदार 65 खरगोन, हर्ष सिंह 64 रामपुर बघेलान, जयभान सिंह पवैया 63 ग्वालियर, नारायण सिंह कुशवाह 63  ग्वालियर दक्षिण।