शिवराज का पलटवार- मुझे कृषि विभाग की किसानों की लिस्ट भिजवाई, कर्ज माफ तो बैंक करेंगे

भोपाल।

कर्जमाफी पर लगातार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सवाल उठाए जाने पर आज कांग्रेसी का एक प्रतिनिधिमंडल कर्जमाफी के प्रमाण लेकर शिवराज के बंगले पर पहुंचे और सबूत सौंपे। जिसके जवाब में शिवराज ने  एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि प्रतिनिधि मंडल सुरेश पचौरी के नेतृत्व में आया।केवल सूची बढ़ा देने से कर्जा माफ नहीं हो सकता है। प्रदेश के किसानों पर कुल 48 हजार करोड़ का कर्जा था। उसके एवज में प्रदेश सरकार ने बजट में केवल पांच हजार करोड़ का प्रावधान रखा और उसमें से भी सिर्फ 1300 करोड़ रुपए इसके लिए दिए हैं, तो कैसे सारे किसानों का कर्जा माफ हो गया ? उन्होंने कहा कि," मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुझे केवल कृषि विभाग की किसानों की लिस्ट भिजवाई है। आप बैंकों की सूची दीजिए, कर्ज माफ तो बैंक करेंगे।

इस दौरान शिवराज ने राहुल गांधी पर भी जमकर निशाना साधा । शिवराज ने राहुल गांधी के किसान कर्जमाफी के वीडियो को दिखाते हुए कहा कि  राहुल गांधी ने कहा था कि 10 दिन में कर्जा माफ हो जाएगा । राहुल गांधी ने मप्र के किसानों के साथ धोखा किया। हम ये ही पूछ रहे राहुल बाबा से - क्या हुआ तेरा वादा। उन्होंने दस दिन में कर्जा माफ करने का वादा किया था, लेकिन अब बहाने बना रहे हैं। राहुल गांधी ने सीधा-सीधा कहा था कि किसानों का कर्जा माफ करेंगे। अब क्या हुआ तेरा वादा, क्या इरादा....।शिवराज सिंह ने प्रदेश सरकार के सबूत पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि, मेरा सरकार से आग्रह है कि मुझे संतुष्ट करने के बजाए किसानों का कर्जमाफ करें। 23 मई को रिजल्ट आएंगे तो पता चलेगा कि कैसे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई।

वही शिवराज ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर आरोप लगाते हुए कहा कि आज किसानों को अपना कर्जा चुकाने के नोटिस मिल रहे हैं। आचार संहिता लागू होते ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों को मोबाइल पर मैसेज किए कि आचार संहिता के कारण आपकी ऋण माफी मंजूर नहीं हो पाई है। जैसे ही आचार संहिता हटेगी तो आपका कर्जा माफ हो जाएगा। इस मामले पर उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी ऑनगोइंग स्कीम जिसमें लाभार्थी की पहले ही पहचान हो चुकी हो तो उसमें उसे लाभ दिया जा सकता है।इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का हवाला दिया कि कैसे आचार संहिता लगने के बाद भी किसानों को इस योजना का फायदा मिला। जबकि मध्य प्रदेश सरकार आचार संहिता का हवाला देकर बहाना बना रही है।



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