कमलनाथ का पलटवार, शिवराज नहीं, किसानों का सर्टिफिकेट चाहिए

भोपाल। एमपी में कर्जमाफी को लेकर जमकर सियासत हो रही है। कांग्रेस -बीजेपी पूरी तरह से आमने सामने आ गए है।बार बार बीजेपी द्वारा सवाल उठाने पर आज सुबह कांग्रेस नेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के घर सबूत लेकर पहुंचे थे।जिसे शिवराज ने झूठा बताया और सरकार पर जमकर हमला बोला। अब इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पलटवार किया है। आज कांग्रेस के दल ने 21 लाख किसानो का क़र्ज़ माफ़ की सूची शिवराज को सौंपी है। जिस पर शिवराज जी सवाल उठा रहे है। मुझे शिवराज का सर्टिफिकेट नही बल्कि किसानों का सर्टिफिकेट चाहिए।

नाथ कहा अपने चुनावी दौर से आया हूँ। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज किसानो के क़र्ज़माफ़ी को लेकर झूठ बोलते हैं। मैं बहुत कम बोलता हूँ मगर सच बोलता हूँ।  शिवराज की एक एक लाइन झूठ थी।  किसान के बेटे बनते थे किसान के पेट पे मारी लात  छाती पर मारी गोली। सोयाबीन के लिए कहा गया काला कर सफेद झूठ बोला गया था। शिवराज को समझना चाहिए कि हम चुनाव आयोग का सम्मान करते है। शिवराज जिनसे बात करा रहे वो फसल कर्ज़ नही है। शिवराज ने जिसका उदाहरण दिया। फसल लोन का कर्ज माफ था ना कि ट्रेक्टर ट्रॉली का।एक किसान के 4 एकाउंट की जांच करनी है क्या ये 75 और 30 दिन में संभव है।

नाथ ने कहा  क़र्ज़माफ़ की सूची पोर्टल में भी अपलोड कर दिए हैं जिसको शिवराज देख सकते हैं।वही उन्होंने शिवराज पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि लगता है शिवराज जी ने पोर्टल खोलना नहीं जानते तभी उनने देखक नही, 2 घंटे में हमने फैसला किया। किसी के पास कोई जादू नही है।नाथ ने कहा कि  शिवराज ज्यादा बजट का ज्ञान न दे, उनसे ज्यादा बजट देखे है। 6 महीने पहले तय किया था कि सोच समझ कर कैसे कर्ज़ माफ होगा । मुख्यमंत्री रहे हैं शिवराज जी को इतनी समझ होनी चाहिए कि इसकी कार्रवाई होती है। शिवराज सिंह को बुनियादी बात समझनी चाहिए।

नाथ ने कहा कि यह राजनीतिक प्रेस वार्ता नही, शासकीय प्रेस वार्ता कर रहे हैं।मुझे  सुबह जानकारी मिली कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री ने सफेद झूठ करार दिया है जिसके बात हमें अतः इसे शासकीय तौर पर स्पष्ट करना आवश्यक हो गया था।  सुरेश पचौरी जी के नेतृत्व में 21 लाख किसानों की सूची शिवराज जी को सौंपी गई है।  17 दिसम्बर को शपथ के बाद सीधे मंत्रालय जाकर इस कर्ज़े के माफी पंर हस्ताक्षर किया।  हमने किसानों से  सफेद गुलाबी और हरा आवेदन मंगाए ।15 जनवरी से हमने फॉर्म भरने शुरू कराए। इसमें 2 प्रकार  शेड्यूल और कॉपरेटिव के बैंक थे ।सरल फॉर्म बनाए गए।  लगभग 47 लाख किसानों द्वारा फॉर्म भरे गए। बैंक से चर्चा हुई थी कि उद्योगपतियों का कर्ज माफ करते हो तो किसानो का कितना माफ करेंगे। बैंक ने स्वीकारा की वो 50% माफ करेंगे। 

कमलनाथ ने पत्रकारों से कहा इस पर लिखिए और सोचिए। इस तरह से बैंक की मदद से 50% कर्ज वैसे ही कम हो गए। कमलनाथ ने माना हमने 21 लाख किया और आगे 47 लाख भी करेंगे।  जिनका ढाई लाख का कर्ज है उन्हें ऋण मुक्ति का सर्टिफिकेट नही मिलेगा। जिनका ढाई लाख का कर्ज है उसे भी 2 लाख के ऊपर से 50% की सुविधा मिलेगी।  बैंक से  वन टाइम सेटलमेंट किया है। वही मोदी को आडे हाथों लेते हुए नाथ ने कहा कि यूपी में मोदी जी ने कहा था कर्ज़ माफी की बात महाराष्ट्र में कही थी कर्ज़ माफी की बात अब स्पष्ट है कहाँ क्या हुआ।


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