महिला अफसरों की वायरल होती तस्वीरों पर वरिष्ठ पत्रकार नवीन पुरोहित की बेबाक टिप्पणी

भोपाल। लोकसभा चुनाव में इस बार कई तरह की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इनमें सबसे अधिक चर्चा का विषय बनीं पीली साड़ी वाली महिला अफसर और नीली साड़ी वाली महिला अफसर। इन दोनों ह महिला अफसरों की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी थी। लेकिन इन तस्वीरों के वायरल होने के पीछा कई तर्क और कारण भी सामने आए। किसी ने आलोचना की तो किसी ने महिला सशक्तिकरण की बात की थी। 

रविवार को देश भर में लोकसभा चुनाव संपन्न हो गए हैं। आज एक तस्वीर फिर सामने आई है। इसमें एक महिला अफसर अपने बच्चे के साथ नज़र आ रही है। लेकिन इस तस्वीर के बहुत अधिक वायरल नहीं होने और महिलाओं को उनके कपड़ों के हिसाब से ग्लैमर में बदलने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और डिजिआना मीडिया ग्रुप के ग्रुप चैनल हेड नवीन पुरोहित ने अलग ही अंदाज में तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने लोगों के दौहरे रवैये को लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर अपनी बात रखी है।

'कुछ नारियों ने अपनी जिम्मेदारियों को आनंदउत्सव की तरह क्या लिया, हड़कंप मच गया, तस्वीरें वायरल होने लगी, बौराया मीडिया उनकी तलाश करने लगा, किस्सागोई होने लगी, द्विअर्थी संवाद चलने लगे। ज्यादातर आंखे कर्तव्यपरायणता की जीवंत प्रतिकृतियों को देखकर सिर्फ फैशन और ग्लैमर तक सीमित रह गई। आकर्षक देहयष्टि, कपड़ों के रंग, साज श्रृंगार से ज्यादा उनकी और उनके कैमरों की कृतिम आंखें उन जीवंत मूर्तियों के काम में राम या आंनद की खोज, या हंसते मुस्कुराते काम करने के मूल मनोभाव तक पहुंच ही नहीं पाई, फिर इस माँ के वात्सल्य और कर्तव्य के अद्भुत सन्तुलन तक तो उनका पहुंचना नामुमकिन ही था। चूंकि कर्तव्यपरायणता, हंसते मुसकुराते हुए काम के आनंदउत्सव वे आंखें देख ही नहीं सकती थी, वह दृगदृष्टि उनके पास थी ही नहीं तो क्या उम्मीद करें। बहरहाल सिर्फ सदी इक्कीसवीं है बाकी आज भी औरत हमारे समाज में या तो देवी है या भोग्या है लेकिन एक इंसान और एक एकल व्यक्तित्व के रूप में उसकी मौलिक उपस्थिति हमें आज भी अस्वीकार है।'

चाहे हो अग्नि परीक्षा या हो चौसर की बिसात,

हर तरफ दांव लगी है नारियों की जिंदगी।।

तो आप भी दांव लगाइए, कीजिये हंसी ठिठोली, लेकिन इस बात को अपने दिमाग में अच्छे से बैठा लीजिये कि ऐसे ही दृष्टिदोष की शिकार कई आंखें आपके घरों की ओर, प्रियजनों और परिजनों की तरफ भी घात लगाए बैठी हैं। जय हो मंगल हो


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