‘वायु’ ने रोकी मानसून की रफ्तार, एमपी में इस बार भी देरी से पहुंचने के आसार

भोपाल।

मध्यप्रदेश मे भले ही प्री-मानसून की गतिविधियां शुरु हो गई है लेकिन लोगों को मानसून के लिए अब भी एक हफ्ते का और इंतजार करना पड़ेगा।  प्रदेश में मानसून आने की संभावना 25 जून के बाद बताई जा रही है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अब तक मानसून को मध्य भारत के अधिकांश भागों- मध्य प्रदेश, राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा गुजरात तक पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन यह अभी महाराष्ट्र तक भी नहीं पहुंचा है।ऐसे में मानसून के मप्र में देरी से पहुंचने की संभावना है।

मौसम विभाग की माने तो  चक्रवात "वायु" के कारण मानसून कमजोर हो रहा है और अन्य राज्यों में पहुंचने में देरी हो रही है।वही विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वी राजस्थान, झारखंड तथा बिहार में भी बिजली गिरने तथा 40 से 50 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं। ऐसे में कही कही तेज हवा के साथ बारिश भी हो सकती है।हालांकि बीते दो तीन दिनों में कई जिलों में अच्छी बारिश हुई है,जिसके चलते फिजा में ठंड़क घुली हुई है। रविवार को प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की वर्षा और बूंदाबांदी हुई है। साथ ही शाम इंदौर के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। विभाग की माने तो चक्रवाती तूफान 'वायु' के प्रभाव से लगातार वातावरण में नमी आ रही है। इस वजह से अभी कुछ दिन तक रुक-रुक कर बरसात होने की अधिक संभावनाए है। 

एमपी में चार सालों से देरी से दस्तक दे रहा मानसून

दरअसल, 2015 मानसून की दस्तक 14 जून को हुई थी वहीं 2018 में 24 जून को हुई है। बीते साल की तरह इस साल भी इतनी ही देरी होने की संभावना है। मौसम केंद्र के अनुसार इस बार प्री मानसून गतिविधि अच्छी हो सकती है। मौसम विभाग मानसून के आने के कयास 25 जून तक लगा रहा है। मौसम केंद्र के अनुसार 23 से 25 जून के बीच अच्छी बारिश हो सकती है। साथ ही इस बार अरब सागर के बजाय बंगाल की खाड़ी से मानसून आ सकता है।

वायु के कारण मानूसन की रफ्तार हुई धीमी

अरब सागर में उठे चक्रवात ‘वायु’ के कारण मानसून की रफ्तार रुक गई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक ‘वायु’ की तीव्रता कम होने से अरब सागर की ओर बढ़ने के लिए मानसूनी हवाओं का मार्ग साफ हो गया है और अगले 2-3 दिन में इसके उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है। इतना ही नहीं, देश में मानसून की सुस्त रफ्तार से वर्षा में कुल कमी 43 फीसदी हो गई है।


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