पोषण आहार मामले में सरकार को कड़ी फटकार, अफसरों पर चलेगा कोर्ट की अवमानना का केस

इंदौर/भोपाल। पोषण आहार मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने महिला और बाल विकास विभाग को कड़ी फटकार लगाई है| हाईकोर्ट ने माना कि विभाग की मिलीभगत से पोषण आहार चल रहा था| हाईकोर्ट को गलत जानकारी देने पर विभाग के प्रमुख सचिव सहित एमपी एग्रो के अधिकारियों पर अवमानना का मामला दर्ज होगा| वहीं कोर्ट ने पोषण आहार जारी रखने की विभाग की दलीलों को ठुकराया है|  हाई कोर्ट ने विगत 13 सितंबर 17 को आदेश दिया था पोषण आहार की पुरानी व्यवस्था निरस्त कर सरकार नई व्यवस्था की प्रक्रिया शुरू करे। इस आदेश का पालन नहीं करने पर हाई कोर्ट ने महिला बाल विकास के प्रमुख सचिव, एमपी एग्रो व अन्य को अवमानना का व्यक्तिगत नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। 2 अप्रैल 18 तक इन अधिकारियों को बताना होगा कि जब हाई कोर्ट ने नई व्यवस्था करने के आदेश दिए थे तो अफसरों ने पालन क्यों नहीं किया। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा अधिकारी और पोषण आहार सप्लायर मिले हुए हैं और आंखों में धूल झोंकने का काम किया गया है| 

मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने पोषण आहार मामले में 9 मार्च को हुई सुनवाई को लेकर सोमवार को आदेश जारी किया है। पोषण आहार सप्लाई की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने की सरकारी अपील को ठुकराते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि पोषण आहार सप्लाई करने सरकार के पास सैंकड़ों विकल्प हैं, पड़ोसी राज्यों से भी बुलाएं। इसके लिए खुले टेंडर जारी करें। लेकिन एमपी एग्रो इण्डस्ट्रियल डवलपमेंट कार्पोरेशन एवं निजी सप्लायरों से आपूर्ति तत्काल बंद करें। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस करेंगे। 

इंदौर हाईकोर्ट में 9 मार्च को सुनवाई के दौरान मप्र सरकार की ओर से महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया ने कोर्ट में कहा कि एमपी एग्रो से सप्लाई बंद कर दी गई है। साथ ही सरकार जल्द ही टेंडर जारी कर नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। सरकार की ओर से कोर्ट में गुहार लगाई गई कि टेंडर होने तक पोषण आहार की व्यवस्था जारी रखी जाए। कोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज कर दिया। साथ ही महाबुद्धे स्वच्छिक संगठन कल्याण एवं सामाजिक विकास समिति की ओर से कोर्ट में बताया कि सरकार ने कोर्ट को पोषण आहार मामले में अंधेरे में रखा है। सरकार मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना चाहती है, इसके लिए अफसरों ने तमाम दलीलें दी है। निजी सप्लायरों के हाथों अफसर चलते हैं। पोषण आहार की व्यवस्था को तत्काल बंद किया जाए। कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद सोमवार को फैसला दिया है। जिसमें पोषण आहार मामले में गुमराह करने पर सरकार को फटकार लगाई है। 

कंसोटिया ने कोर्ट में असत्य स्टेटमेंट दिया

कोर्ट में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने पोषण आहार सप्लाई को लेकर गलत जानकारी दी। कंसोटिया ने पिछले सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया कि पोषण आहार की सप्लाई बंद कर दी गई है। जल्द ही टेंडर जारी किए जा रहे हैं। जबकि बाद की सुनवाई में विभाग के अधिकारी एनपी डहरिया ने बताया कि पोषण आहार सप्लाई की व्यवस्था  पहले जैसी ही है, एमपी एग्रो की भागीदारी वाली निजी कंपनियों की पोषण आहार की सप्लाई कर रही हैं। 


समिति ने उठाया था सुप्रीम कोर्ट में मामला

मप्र में पोषण आहार वितरण की व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट में गुहार लगाने वाली महाबुद्धे स्वच्छिक संगठन कल्याण एवं सामाजिक विकास समिति ने पहले सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। समिति ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि देश के 22 राज्यों में पोषण आहार को निजी कंपनियों से सप्लाई करने में खेल चल रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पोषण आहार वितरण की नई गाइडलाइन जारी की, जिसके तहत पोषण आहार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बंटना चाहिए। इसी गाइडलाइन के आधार पर इंदौर हाईकोर्ट ने पिछले साल 13 सितंबर 2017 को आदेश देकर एमपी एग्रो से सप्लाई बंद करने को कहा था। सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने तक कोर्ट से एक महीने की मोहलत मांगी। कोर्ट ने सशर्त मोहलत दी थी। इसके बाद सरकार की ओर से कोर्ट में लगातार असत्य जानकारी दी जाती रही। 

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