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सहस्त्रबुद्धे के बाद नंदकुमार ने भी बनाई प्रदेश कार्यालय से दूरी

भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में इन दिनों सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। यदि संगठन में यही हाल रहा तो जल्द ही पार्टी नेताओं के बीच चल रही आपसी गुटबाजी बंद कमरे से बाहर निकलकर सड़क पर दिखाई देगी। स्थानीय नेताओं की आपसी गुटबाजी की वजह से ही प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने मप्र से दूरी बना ली है। वे पिछले 6 महीने से प्रदेश कार्यालय नहीं पहुंचे। इसी तरह प्रदेश संगठन में चल रहीं बदलाव की अटकलों के बीच नंदकुमार चौहान ने भी प्रदेश कार्यालय से किनारा कर लिया है। वे एक महीने से पार्टी कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। 

 यूं तो मप्र में भाजपा के सत्ता, संगठन के पदाधिकारियों के बीच मतभेद की खबरें बाहर आती रहीं है। लेकिन प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान और प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे का कार्यालय नहीं पहुंचना, संगठन में चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी में प्रदेशाध्यक्ष बदलाव के साथ-साथ प्रदेश प्रभारी के भी बदले जाने की अटकलें लगाई जा रही है। जिसकी वजह यह है कि विनय सहस्त्रबुद्धे ने मप्र संगठन की प्रमुखों बैठकों से भी दूरी बनाई है। वे पार्टी की पिछली कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने भी नहीं पहुंचे। इसके बाद वे तीन महीने पहले अल्प प्रवास पर भोपाल आए है। मुख्यमंत्री निवास पर चर्चा करके वापस लौट गए, इस दिन भी वे पार्टी कार्यालय नहीं पहुंचे। हालांकि कोलारस एवं मुंगावली विधानसभा चुनाव के दौरान वे चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। जहां सरकार के मंत्री, केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश के नेताओं ने ताबड़तोड़ सभाएं की, वहीं प्रदेश प्रभारी सिर्फ खानापूर्ति कर चले  गए। 


बदलाव की अटकलें

आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मप्र भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार चौहान के साथ-साथ प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे को भी बदलने की अटकलें है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि सहस्त्रबुद्धे के पास राष्ट:ीय उपाध्यक्ष के साथ-साथ दिल्ली में भी दूसरी जिम्मेदारी है। जिसकी वजह से वे मप्र को समय नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में सहस्त्रबुद्धे की ओर से कोई प्रतिकिया नहीं दी। 


पार्टी नेताओं से संवाद नहीं

सहस्त्रबुद्धे ने प्रदेश कार्यालय से ही नहीं, बल्कि नेताओं से भी दूरी बना ली है। यही कारण है कि प्रदेश पदाधिकारियों से लेकर पार्टी के अन्य नेताओं से भी सहस्त्रबुद्धे का संवाद नहीं है। उनकी सिर्फ प्रदेश के चुनिंदा पदाधिकारियों से ही चर्चा होती है। जबकि पार्टी के आम कार्यकर्ताओं को उन्होंने कभी समय नहीं दिया। 


प्रदेश के सभी बड़े पदाधिकारियों से प्रदेश प्रभारी लगातार संपर्क में रहते हैं और संवाद करते हैं। जरूरत पडऩे पर राज्य में दौरा भी करते है। प्रदेशाध्यक्ष संगठन की सभी गतिविधियों में भीगीदारी कर रहे हैं। किसान सम्मान यात्रा में वे कई विधानसभा क्षेत्रों में गए हैं। 

रजनीश अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता, मप्र भाजपा 

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