कांग्रेस का आरोप- सत्ता के लिए पूर्व मुख्यमंत्रियों ने किया OBC वर्ग का इस्तेमाल

भोपाल

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेस में ओबीसी कार्ड खेला है। ओबीसी वर्ग  को साधने कांग्रेस ने 27  प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया है।अबतक ओबीसी को 14  प्रतिशत आऱक्षण मिलता आया है।कांग्रेस जहां इस मुद्दे को जनता के बीच भुनाने में लगी हुई है वही बीजेपी द्वारा इसको लेकर बार बार सवाल उठाए जा रहे है।बीजेपी के हमलो का जवाब देने आज कांग्रेस के बड़े नेताओं द्वारा पीसीसी कार्यालय में ओबीसी आरक्षण को लेकर प्रेसवार्ता की गई और भाजपा पर जमकर हमला बोला।कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं पर ओबीसी वर्ग का लाभ लेने का आरोप लगाया साथ ही ओबीसी बीजेपी नेताओं को संकीर्ण मानसिकता का बताया।

कमलनाथ सरकार में खेल मंत्री जीतू पटवारी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि समृद्ध मप्र के लिए सबको साथ लेकर चलना होगा। किसी एक वर्ग को छोड़कर हम आगे नहीं बढ़ सकते है। बीजेपी ने अपनी दुर्भावना का प्रदर्शन किया है। उमाभारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह ने सीएम बनने के लिए डायरेक्ट या इन डायरेक्ट रूप से ओबीसी वर्ग का उपयोग किया, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए कुछ नहीं किया जिसकी मैं निंदा करता हूं। हम सब एक तारीख़ तय करके ओबीसी वर्ग का उसका हक दिलाने के लिए कमलनाथ का सम्मान करेंगे।

वही मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने बीजेपी के ओबीसी वर्ग के नेताओं पर आरोप लगाया । ओझा ने कहा कि बीजेपी के ओबीसी वर्ग के नेता संकीर्ण मानसिकता के है। एक भी बीजेपी नेता ने कांग्रेस के इस कदम का समर्थन कर अपनी सोच प्रदर्शित की है। कमलनाथ जो कहते है वो करते हैइससे पहले तीन भाजपा तीन मुख्यमंत्री उमा भारती , बाबूलाल ग़ौर और शिवराज सिंह चौहान रहे है, लेकिन किसी ने भी इस फ़ैसले का स्वागत नहीं किया।


ओबीसी आरक्षण के इस कदम से ओबीसी वर्ग को लोगों को बेहतर आर्थिक मजबूती मिलेगी। राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी लाभ मिलेगा।

प्रदीप जायसवाल, खनिज मंत्री, मप्र

कांग्रेस हमेशा पिछड़ों के विकास की बात करती है। बीजेपी की पुरानी आदत है,अच्छे काम की बुराई करना।

राजमणि त्रिपाठी , सांसद, राज्यसभा

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कुछ दिनों पहले आरक्षण को बड़ा ऐलान किया था। सागर में सभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा था कि अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी और निर्धन सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा।इस पर  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है और अब इसे लागू किया जाएगा। अगर यह घोषणा लागू होती है तो प्रदेश में 73% आरक्षण हो जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट की 50% तक की आरक्षण की सीमा से ज्यादा है। तमिलनाडु में 69% व महाराष्ट्र में 52% आरक्षण की व्यवस्था है।


"To get the latest news update download tha app"