‘सफाई’ में भ्रष्टाचार: अधिकारी ने जुटाई करोड़ों की संपत्ति, अब मिला ‘कचरा छांटने’ का काम

इंदौर।

स्वच्छता के लिए देश भर में युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, वहीं जिन अधिकारियों पर इसका जिम्मा है वो सरकार की नाक के नीचे अभियान के बहाने संपत्ति जोड़ने का काम कर रहे है। ताजा मामला इंदौर से सामने आया है, जहां राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने नगर निगम जल यंत्रालय के सहायक यंत्री व स्वच्छ भारत मिशन में कम्युनिटी और पब्लिक टॉयलेट के प्रभारी कार्यपालन यंत्री अभय सिंह राठौर व उसके भाई सहित चार जगह गुरुवार सुबह छापे मारे। छापे में अधिकारी के पास करीब 20 करोड़ की बेनामी संपत्ति मिली है|कार्रवाई के बीच ही निगमायुक्त ने राठौर को हटाते हुए ट्रेंचिंग ग्राउंड में बायोरेमिडिएशन (कचरा छंटाई व निपटान) का काम सौंप दिया है।

सहायक यंत्री अभय पिता प्रकाश सिंह राठौर ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों की संपत्ति खरीद रखी थी। इसके लिए उनके साथ उनके कई रिश्तेदारों को भी आरोपी बनाया गया है।  प्रांरभिक जांच में टीम को करीब 20 करोड़ की संपत्ति मिली है। इसमें  मकान, होस्टल, दो किलो सोना, सोने के बिस्किट और 20 लाख रुपए नकद शामिल है। बता दे कि अभय राठौर 1995 में सब इंजीनियर पद पर आया था। अब तक की सेवा में उसका वेतन करीब 60 लाख रु. होता है।राठौर 1996 से नगर निगम में पदस्थ है। कई घोटालो में उनका नाम भी आ चूका है, लेकिन हर बार उनका विभाग बदल दिया जाता है। सहायक यंत्री के पद पर होने के बावजूद वह वर्तमान में स्वच्छता अभियान में यंत्री के प्रभार में है। राठौर की अधिकतर सम्पति अपने रिश्तेदारों के नाम ही है, खुद के नामा पर अधिक सम्पति नहीं रखी है मामले में ईओडब्ल्यू की टीम जाँच में जुटी है।

दरअसल, टीम को अभय राठौर के खिलाफ बेनामी संपत्ति की शिकायत मिली थी। जिस पर कार्रवाई करते हुए टीम ने गुरुवार को राठौर के गुलाबबाग कॉलोनी स्थित घर, स्कीम-78 में दो स्थानों और बजरंग नगर में छापा मार कार्रवाई की। टीम ने अभी तक बीस करोड़ की संपत्ति जब्त की है। खबर है कि राठौर ने उसके छोटे भाई संतोष सिंह जो कि आईडीए में टाइम कीपर है, उसके नाम पर कई संपत्तियां खरीदी है।इसके अलावा बहन माया सिंह, भानजे अमित सिंह, साले प्रदीपसिंह राठौर और उसकी पत्नी पूनम को भी अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने में सहयोग करने पर आरोपित बनाया गया है। उसके बैंकों में कई खाते मिले हैं। बैंकों को पत्र लिखकर खाते फ्रिज करने के लिए कहा गया है।

बता दे कि अगस्त माह में ही लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर नगर निगम में बेलदार असलम खान के यहां दबिश दी थी। जहां करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ था। अब एक और अधिकारी के यहां करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या निगम भ्रष्टाचारियों का अड्डा बन चुका है| 

अब तक की कार्रवाई मे ये मिला

- गुलाबबाग में आलीशान बंगला।

- गुलाबबाग में प्लॉट क्रमांक 18 पर तीन मंजिला होस्टल और दुकानें।

- गुलाबबाग में प्लॉट क्रमांक 298 भाई के नाम पर।

- स्कीम 78 में दो मकान, एक प्लॉट।

- स्कीम134 व 94 में एक-एक प्लॉट

- बजरंग नगर में एक मकान।

- 36 बीमा पॉलिसियों में निवेश।

- 3 कारें और 4 दोपहिया।

- 20 लाख नकद।

- 2 किलो सोना।

- विभिन्न् बैंकों में जमा लाखों रुपए।

23 साल की नौकरी 60 लाख वेतन

कई घोटालों में भी नाम, लेकिन हर बार सिर्फ बदला विभाग 

1. राठौर 1988 में निगम में मस्टरकर्मी बना। तब इसके मामा आरके सिंह कुशवाह अधीक्षण यंत्री थे। वर्ष 2000 में राठौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के डिप्लोमा सर्टिफिकेट पर सवाल उठे। 

2. 2000-01 में जल यंत्रालय में सब इंजीनियर था। कर्मचारियों से मिलकर खुद ही कई कामों की फाइलें बना ली और उस पर निगमायुक्त के फर्जी दस्तखत भी हो गए। परिषद ने एफआईआर का आदेश भी दिया, पर जांच अधूरी रहने से कार्रवाई नहीं हुई।

3. निगम में ट्यूबवेल के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ, जो हुए ही नहीं। इसमें भी नाम।

4. 2004 तक विद्युत विभाग में रहा। फाइल संबंधी गड़बड़ी में  विभाग बदला तो टैंकर प्रभारी बना। 

5. 2007-08 में यशवंत सागर के फूल कलारिया पंपिंग स्टेशन से 100 टन पाइप गायब होने के मामले में सस्पेंड हुआ। 

6. 2010-11 में यातायात सामग्री की खरीदी, उसके उपयोग, क्वालिटी और बाद में भुगतान को लेकर सामने आए सवा दो करोड़ रुपए के ट्रैफिक घोटाले में नाम। जांच अभी भी जारी।

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