विपक्ष के हंगामे के बाद आज विधानसभा में हाजिर हुए DGP

भोपाल

गुरुवार को विधानसभा में अनुपस्थित रहने पर मचे बवाल के बाद आज शुक्रवार को डीजीपी वीके सिंह सदन में हाजिर हुए और अध्यक्ष से मुलाकात की।गुरुवार को विधानसभा में डीजीपी के उपस्थित ना होने पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने इसे सदन की अवमानना करार दिया। जिस पर संसदीय कार्यमंत्री मंत्री गोविंद सिंह ने भी नाराजगी जाहिर की और सभी अधिकारियों को हिदायत देते हुए कहा था कि यह गंभीर स्थिति है, विभाग प्रमुख को मौजूद रहना चाहिए। कोई भी मीटिंग विधानसभा से महत्वपूर्ण नहीं हो सकती। उनसे पूछा जाए आखिर क्यों उपस्थित नहीं हुए। 

दरअसल में,  गुरूवार को गृह विभाग की बजट अनुदान मांगो पर चर्चा के दौरान डीजीपी के अनुपस्तिथि का मामला सदन में उठा था। पूर्व मंत्री  नरोत्तम मिश्रा ने इसे अवमानना बताया। जीएडी मंत्री गोविंद ने ने कहा कि गृह और जेल विभाग पर चर्चा हो रही है। इतने गंभीर चर्चा को दौरान डृीजीपी  अफसर मौजूद नहीं है।कोई भी मीटिंग विधानसभा से महत्वपूर्ण नहीं हो सकती। उनसे पूछा जाए आखिर क्यों उपस्थित नहीं हुए।

इस पर मंत्री गोविंद सिंह ने नरोत्तम मिश्रा की आपत्ति को सही ठहराया  और अधिकारियों को हिदायत दी कि विभाग से संबंधित चर्चा के दौरान सभी अफसर मौजूद रहे।साथ ही उन्होंने बताया कि करीब दो दशक पहले जब मैं ऊर्जा मंत्री था, तब अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान गैरहाजिर रहने पर विभाग के मेंबर ओएंडएम बोंडे के खिलाफ धारा 11-ए के खिलाफ कार्रवाई कर दी थी। वही डीजीपी की गैरमौजूदगी देख गृहमंत्री का जवाब अगले दिन के लिए आगे खिसका दिया था और कार्रवाई आज सुबह 11  बजे तक स्थगित हो गई थी।इसके बाद आज डीजीपी हाजिर हुए और कार्यवाही हो सकी।

दिल्ली में बैठक में शामिल होने गए थे डीजीपी

जानकारी के अनुसार, विस में गुरुवार को अनुदान मांगों पर जब चर्चा चल रही थी, उस वक्त डीजीपी वीके सिंह किसी बैठक के सिलसिले में दिल्ली गए हुए थे। विस अधिकारी दीर्घा में उस वक्त प्रमुख सचिव गृह सहित 11 अन्य अधिकारी मौजूद थे। विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सदन की अधिकारी दीर्घा में प्रमुख सचिव गृह एसएन मिश्रा, सचिवद्वय शाहिद अख्तर व नरेश पाल मौजूद थे। इनके अलावा डायरेक्टर प्रॉसीक्यूशन राजेंद्र कुमार, एडीजी इंटेलीजेंस कैलाश मकवाना, अन्वेष मंगलम, पवन जैन, उपेंद्र जैन एवं आईजी श्रीनिवास वर्मा एवं कुलश्रेष्ठ भी उपस्थित थे। शुरुआत में जेल विभाग के डीजी संजय चौधरी भी दीर्घा में थे, कुछ देर बाद वह अध्यक्ष के कक्ष की तरफ चले गए। उसी समय सदन में यह मुद्दा गरमा गया।

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