किसानों पर GST का बोझ : अगर बटाई पर दिया खेत तो भरना होगा टैक्स

भोपाल/इंदौर।

चुनावी साल में किसानों पर भी जीएसटी की मार पड़ने वाली है। 1 जुलाई से लागू हो रही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नई कर व्यवस्था में खेत बंटाई या ठेके पर देने वालों को भी टैक्स चुकाना पड़ेगा।उन्हें खेती फसल से होने वाली आय पर 18 फीसदी जीएसटी देना होगा।उसे जीएसटी नियम के तहत रजिस्टर करना होगा। साथ ही सभी तरह के जरूरी रिटर्न फाइल करने होंगे। बटाईदारो पर देने वाले को इनपुट क्रेडिट की भी सुविधा नही होगी। ऐसे में इस बोझ का अधिकांश हिस्सा खेती करने वालो पर ही पड़ेगा। इसका अधिकतर असर उत्तर-पूर्व के राज्यो पर विशेष रूप से पड़ेगी।सरकार के इस फैसले के बाद से ही किसानों में आक्रोश है।

हालांकि केंद्र सरकार ने केवल उन किसानों को राहत दी है जो खुद ही खेती करते हैं और उससे होने वाली उपज को बाजार में बेचते हैं। बता दे कि अभी तक किसानों को होने वाली किसी भी तरह की आय पर टैक्स नहीं लगता है, लेकिन जीएसटी में इसके लिए प्रावधान किए गए हैं।

लेकिन इसमें चिंता की ये बात है कि बंटाई पर देने वाले किसानों को कोई इनपुट क्रेडिट की सुविधा नहीं मिलेगी  ऐसे में इस बोझ का अधिकांश हिस्सा खेती करने वाले पर ही पड़ेगा जो  पहले से ही बेहद दबाव में हैं। सिर्फ उनको छूट होगी जिनकी सालाना आमदनी 20 लाख से कम हो। 1,60,000 मासिक से ज्यादा की आय पर जीएसटी देनी होगी। ​सरकार ने यह भी तय किया है कि जो किसान अपनी सब्जियों या फिर अन्य उपज को खुले मार्केट में बेचते हैं, उनसे किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर इस उपज को किसी ब्रांड के तहत बेचा तो उस पर 5 फीसदी टैक्स देना होगा। वही डेयरी बिजनेस, मुर्गी पालन, भेड़-बकरी का पालन करने वालों को जीएसटी के दायरे में रखा गया है। 


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