छिंदवाड़ा में नकुलनाथ सक्रिय, माँ अलका नाथ ने कहा-'अपने पिता से दोगुना काम करेंगे नकुल'

भोपाल/छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा से कमलनाथ के विधानसभा चुनाव लड़ने के फैसले के बाद नकुलनाथ का नाम लोकसभा से लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि अभी इसकी औपरचारिक घोषणा नही हुई है।लेकिन बेटे के समर्थन के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ समेत उनकी पत्नी अलका नाथ ने दौरे करना शुरु कर दिए है। मैदान में उतरकर अब वे बेटे के लिए समर्थन जुटा रही है । यह पहला मौका नही है जब पत्नी अलकानाथ ने जनता के बीच पहुंची हो और बेटे के समर्थन में जनता से अपील की हो| इसके पहले 1996  में कमलनाथ के हवाला कांड के आरोप में घिरने के बाद कांग्रेस ने छिंदवाड़ा से अलका नाथ को मैदान में उतारा था और वो जीत भी गई थी और आज सालों बाद फिर वो बेटे के लिए समर्थन जुटाने पहुंची ।  नकुलनाथ भी लगातार सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रिय है और लगातार छिंदवाड़ा के दौरे कर रहे है। ऐसे में एक बार फिर छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस के लिए पक्की मानी जा रही है, हालांकि बीजेपी इसमें सेंध लगाने की तैयारियों में जुटी है।

दरअसल,  मुख्यमंत्री कमलनाथ की पत्नी अलका नाथ उमरानाला में आयोजित महिला सम्मेलन में शामिल होने छिंदवाड़ा पहुंची थी। यहां उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कहा कि मैं वर्तमान में देवकी की भूमिका में हूं और छिंदवाड़ा मां यशोदा का कर्तव्य निभा रहा है। मैं किसी राजनीतिक सभा में नहीं बल्कि अपने परिवार के बीच आई हूं और पारिवारिक संबंध जीत-हार के संबंध नहीं होते। सालों से हमारा परिवार छिंदवाड़ा की सेवा करता आया है और करता रहेगा। मैं जानती हूं कि जिले का बच्चा चुनाव लड़ रहा है। नकुल जब साढ़े चार साल के थे, तब से छिंदवाड़ा आ रहे हैं।   मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी कि आपको क्या करना है। परंतु इतना जरूर कहूंगी कि नकुल अपने पिता से आगे बढ़कर दोगुना काम करेंगे। हमने नकुल को छिंदवाड़ा के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं बहू और बहन बनकर छिंदवाड़ा आई थी। इन 40 सालों के संबंधों में अब मैं मां और दादी बन गई हूं और पूरे क्षेत्र की बहन और भाभी भी हूं। अलका नाथ ना सिर्फ एक राजनैत्री है बल्कि एक अच्छी समाज सेविका भी है। बीते दिनों वह कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में नजर आई थी। वही दूसरी तरफ नकुल ने भी मैदानी स्तर पर काम करना शुरु कर दिया है। विधानसभा चुनाव के बाद से ही वे लगातार छिंदवाड़ा लोकसभा के दौरे कर रहे है। बीते दिनों उन्होंने किसानों से मिलकर कई मुद्दों पर चर्चा की थी। सोशल मीडिया पर भी  नकुल लगातार एक्टिव है।


अलकानाथ 1996  में आई थी चर्चा में 

अलकानाथ सबसे पहले इंदिरा गांधी के दौर में चर्चा में आई थी। जब 1996 में कमलनाथ हवाला कांड के आरोप में घिरे थे तब उनकी पार्टी कांग्रेस ने छिंदवाड़ा से ही उनकी पत्नी अलकानाथ को चुनाव में उतार दिया था। अलकानाथ ने चुनाव लड़ा और वह जीत गई थीं। लेकिन उपचुनाव में कमलनाथ को सुंदर लाल पटवा ने हराया था। इस तरह कमलनाथ एक बार छिंदवाड़ा से हार गए थे। वे 9 बार छिंदवाड़ा से सांसद रह चुके है और अब मध्यप्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री की कमान संभाल रहे है। छिंदवाड़ा से इस बार कमलनाथ चुनाव नही लड़ेंगें, उनकी जगह पार्टी उनके बेटे नकुलनाथ को मैदान में उतारने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कमलनाथ यहां से विधानसभा चुनाव लड़ेंगें। इतिहास में यह पहला मौका होगा जब कोई बाप-बेटे एक ही जगह से विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ेगा। बीते कई दिनों से कमलनाथ यहां फिल्डिंग कर रहे है और आज उनकी पत्नी यहां बेटे के फेवर में वोट की अपील करने पहुंची।


छिंदवाड़ा से 9  बार सांसद चुने जा चुके है कमलनाथ

कमलनाथ छिंदवाड़ा से 9 बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं। 1985, 1989, 1991 में उन्होंने लगातार चुनाव जीते हैं। 1991 से 1995 तक नरसिम्हा राव सरकार में उन्होंने पर्यावरण मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। 1995 से 1996 तक वह कपड़ा मंत्री भी रहे। 1998 और 1999 में भी उन्हें दोबारा जीत मिली। लगातार मिलने वाली जीत के कारण कमलनाथ का कांग्रेस में कद बढ़ता गया। 2001 में उन्हें कांग्रेस महासचिव बनाया गया। 2004 तक वह कांग्रेस महासचिव के रूप में रहे। छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर तो जैसे जीत का दूसरा नाम कमलनाथ हो गए थे। 2004 में उन्होंने फिर से जीत का सेहरा पहना। 2204 में वह 7वीं बार लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। गांधी परिवार के करीबी और एक कद्दावर नेता होने के नाते वह मनमोहन सिंह की सरकार में एक बार फिर मंत्री बने। 2009 में UPA2 के चुनाव में छिंदवाड़ा से एक बार फिर 'कमल' ही जीते। इस बार कमलनाथ को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय दिया गया। 2012 में कमलनाथ संसदीय कार्यमंत्री बने। इसके बाद 2014  में यह सिलसिला जारी रहा। इसके बाद पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी और कांग्रेस का सालों का वनवास खत्म हुआ और कमलनाथ देखते ही देखते मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए। अब लोकसभा चुनाव में वे अपनी सीट से बेटे को उतारने के मूड में हैं क्योंकि वह यही से विधानसभा चुनाव लड़ेंगें। 

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