MP : चुनाव से पहले दागी प्रत्याशियों को सार्वजनिक करना होगा अपना आपराधिक रिकॉर्ड

भोपाल। 

भले ही बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने की मांग वाली याचिका तो खारिज कर दी थी, लेकिन उसके साथ एक गाइडलाइन जारी की थी। जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग, पार्टी और प्रत्याशी तीनों को यह बार बार बताना होगा कि प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। चुंकी मध्यप्रदेश में चुनावी तारीखों का ऐलान हो चुका है और अगले महिने चुनाव होना है, इसलिए निर्वाचन आयोग ने भी इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं और सभी से जानकारी मांगी है।वही इस गाइडलाइन ने राजनैतिक पार्टियों की धड़कने बढ़ा कर रख दी है।गाइडलाइन को मद्देनजर रखते हुए पार्टियां टिकट तय करने से पहले  उम्मीदवारों से आपराधिक रिकॉर्ड भरवा रही है।कही ऐसा ना हो कि पार्टी टिकट फाइनल कर दे और प्रत्याशी गाइडलाइन से बाहर हो और ऐन मौके पर उसका टिकट कैंसिल करना पड़े या कुछ और।ऐसा उन्हें मतदान के पहले 3 बार करना होगा। प्रत्याशियों को यह प्रक्रिया नामांकन वापसी की तारीख 14 नवंबर के बाद और मतदान के 48 घंटे पहले करनी होगी। आपराधिक मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने का जोभी खर्च आएगी उसे प्रत्याशी खाते में जोड़ा जाएगा। अपराध का क्रम रिवर्स ऑर्डर यानी हाल ही में दर्ज हुए अपराध या प्रकरण पहले नंबर पर रहेंगे, उसके बाद पुराने वाले।

 SC  की गाइडलाइन के अनुसार

प्रत्याशियों को उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी।

-समाचार पत्र और न्यूज चैनलों के माध्यम से बताना होगा कि उनके खिलाफ कितने आपराधिक प्रकरण दर्ज है।

-कौन कौन सी धारा लगाई गई थी।

-अब भी वो केस चल रहे है या बंद हो गए।

-आपराधिक ब्योरा तीन-तीन बार देना होगा।

- क्षेत्र के दो प्रमुख अखबारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में ब्यौरा देना पड़ेगा।

-पार्टियों को अपनी वेबसाइट पर आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी अपलोड करना होगी।

-किन अखबार और इलेक्ट्रानिक चैनल में जानकारी का प्रकाशन करवाया है, उसका ब्यौरा चुनाव आयोग को भेजना पड़ेगा

-उम्मीदवार को नामांकन पत्र में अपने खिलाफ लगे आरोपों को बोल्ड लेटर्स में लिखना होगा। 

   

इन तीन फार्मेट्स में देना होगा अपना ब्यौरा

पहला फॉर्मेट सी-1 है, जिसके तहत यह रिकॉर्ड समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में प्रसारित कराना होगा। 

दूसरा फॉर्मेट सी- 2 राजनीतिक दलों के लिए है। इसमें दलों को अपने प्रत्याशियों की जानकारी अपनी वेबसाइट, समाचार पत्र और टीवी में सार्वजनिक करना होगा।

तीसरा फॉर्मेट सी- 3 रिटर्निंग अधिकारी आपराधिक मामलों के बारे में घोषणा प्रकाशित कर दिए जाने वाले इन दिशा-निर्देशों के बारे में लिखित जानकारी भी देंगे।