सोशल मीडिया बन रहा किसान आन्दोलन का माध्यम

भोपाल

 एक जून को राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन प्रस्तावित है। इस आंदोलन को एक सौ दस किसान संगठनों ने समर्थन दिया है। इसके अलावा छह जून को मंदसौर गोलीकांड की बरसी है। सरकार द्वारा मांगों की अनदेखी के चलते एक से 10 जून तक देशभर के किसान संगठनों ने गांव बंद अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

वही  मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भले ही योजनाओं के जरिये ये बताने की कोशिश करे की प्रदेश में सब ठीक चल रहा है, ऐसा बिल्कुल भी नही है। प्रदेश के किसान अभी भी सरकार से नाराज हैं और आंदोलन की रूपरेखा बना रहे हैं। 6 जून को मंदसौर गोली कांड की बरसी है, लिहाजा सरकार के लिए चिन्ता और बढ़ गयी है।

मध्यप्रदेश मे भी किसान संगठनों ने आंदोलन को लेकर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक मुहिम छेड़ रखी है। जैसे जैसे तारीख नजदीक आती जा रही है , वैसे वैसे अभियान में तेजी आती जा रही है। किसान इस अभियान को लेकर सक्रिय होते जा रहे है। किसान इस अभियान की कैम्पैनिंग  गांव गांव, घर-घर जाकर कर रहे है कि अगर इस लड़ाई में हर किसान ने सहयोग नहीं किया, तो कभी किसानों के शोषण के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाएगा।  किसानों द्वारा एक सप्ताह में धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच, बड़वानी, खंडवा क्षेत्र में किसानों से संपर्क किया गया और उन्हें समझाया गया है कि अगर किसान को लागत पर 50 फीसदी मुनाफा मिल जाए, तो देश का एक भी किसान कर्जदार नहीं रहेगा। वही सोशल मीडिया के जरिए अधिक से अधिक युवा किसानों को इस अभियान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 

किसानों के दावे ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें

किसानों का दावा है कि प्रदेश के पांच बड़े किसान संगठन महासंघ, भारतीय किसान यूनियन, आम किसान यूनियन, किसान जातिति मंच, रोको-टोक्यो किसान संगठन समेत अन्य किसान संगठन सक्रिय और लगभग हर अंचल के छोटे किसान समूह के साथ हैं, इस तरह के प्रदेश के 70 प्रतिशत तक किसान इस अभियान को समर्थन दे रहे है। किसानों के इस दावे के बाद से ही शासन-प्रशासन और अलर्ट हो गए है।सरकार ने सभी से कहां कैसी स्थिति बन सकती है, इस पर एक रिपोर्ट मांगी गई है।चुंकी बीते साल जो आंदोलन हुआ था पुलिस का इंटेलिजेंस आंदोलन को भांपने में फैल रहा था,जिसके चलते सरकार इस बार कोई रिस्क नही लेना चाहती।वही साल के आखिरी में चुनाव भी होना है,ऐसे में इस बार समय से पहले ही शासन और प्रशासन अलर्ट हो गया है। पुलिस मुख्यालय ने किसान आंदोलन को लेकर प्रदेश भर में एक दर्जन जिलों को संवेदनशील मानते हुए सुरक्षा अभी से तेज कर दी है । इनके पुलिस अधीक्षकों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।  

लॉ एंड आर्डर के आईजी मकंरद देउस्कर  अनुसार, सरकार द्वारा सभी जिलों के एसपी से किसानों की समस्या सुनने को कहा गया है। साथ कहा गया है कि वे किसानों के संपर्क में रहकर पता लगाए कि कहां कैसी स्थिति बन रही है। किस जगह पर ज्यादा स्थिति मजबूत है और किस पर कमजोर इन सब का आकलन कर इसकी रिपोर्ट वे सरकार को सौंपें।

बंद से बढ़ सकती है महंगाई

बताया जा रहा है कि बंद के दौरान सब्जियां, फल और दूध की सप्लाई भी रोकने का ऐलान किया गया है।जिसका सीधा असर शहरों पर पड़ेगा। इससे मंहगाई भी बढ़ने की संभावना है।

अगर किसान गांव बंद करते हैं तो इसका सीधा असर शहर के लोगों पर पड़ेगा और जिससे महंगाई बढ़ना तय है। पहले से ही गर्मी बढ़ने से फलों और सब्जियों की आवक कम है। किसानों के आंदोलन के चलते ये और महंगे हो सकते हैं। 

6 जून को देश भर में श्रद्धांजलि

6 जून 2017 में मंदसौर में हुए गोलीकांड में मारे गए किसानों को 6 जून को देशभर में श्रद्धांजलि दी जाएगी। मंदसौर के हाटपीपल्या में बड़ा आयोजन होगा। 5 जून को धिक्कार दिवस मनाया जाएगा। 10 जून को भारत बंद किया जाएगा। 

एक दर्जन जिले अलर्ट पर

पिछले साल मंदसौर, देवास, शाजापुर, रतलाम, इंदौर जिलों में हुए किसान आंदोलन से सबक लेते हुए कोई अनहोनी न हो इसे लेकर अपना इंटेलीजेंस तेज कर दिया है। पहली रिपोर्ट आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने एक दर्जन जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के अभी से निर्देश दे दिए हैं। वहीं बाकी जिलों को अलर्ट रहने का कहा गया है।

6  जून को कांग्रेस भी करेगी किसान महासम्मेन

चुनावी साल होने की वजह से मंदसौर गोलीकांड की बरसी पर कांग्रेस भी किसान सम्मेलन करने जा रही है, जिसका किसानों ने कोई विरोध नही किया है। उन्होंने कांग्रेस के समर्थन की बात कही है। किसान संगठनों का कहना है कि अगर कांग्रेस किसानों के हित के लिए यहां अलग से सम्मेलन करना चाहती है तो उन्हें कोई आपत्ति नही। खुशी है कि कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है।वही दूसरी तरफ अंदाजा लगाया जा रहा है, कि कांग्रेस राहुल गांधी समेत बड़े नेताओं को मध्यप्रदेश बुला सकती है। हाल ही में कमलनाथ ने इसके संकेत दिए थे। मंदसौर से ही कांग्रेस चुनावी शंखनाद कर सकती है। कांग्रेस चुनावी साल में किसानों की नाराजगी को भुनाने की कोशिश करेगी। किसान संगठन आंदोलन का एलान कर चुके हैं| सूत्रों ने बताया कि किसान आंदोलन और मंदसौर गोलीकांड की बरसी के मद्देनजर इंटेलिजेंस ने जो रिपोर्ट तैयार की है, उसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है|  इंटेलिजेंस आईजी मकरंद देउस्कर का कहना है कि किसान आंदोलन करने वाले सभी संगठन शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की बात कहते हैं, लेकिन आंदोलन के समय जमीनी हकीकत दूसरी रहती है। इसलिए पुलिस मुख्यालय ने अपने स्तर पर तैयारियां करने के साथ जिलों के एसपी को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं। 


गौरतलब है कि यह आंदोलन पिछले साल की तरह 1 से 10 जून तक होगा। इस बार आंदोलन का स्वरूप बदला हुआ देखने को मिलेगा। आंदोलन के दौरान किसान दूध, फल, सब्जियां और फसलें बेचने के लिए गांव से बाहर नहीं जाएंगे और न ही व्यापारियों को गांव में खरीदने घुसने देंगे। यह आंदोलन देशव्यापी होगा, जिसमें 90 किसान संगठन शामिल हैं। यदि किसान नेता अपनी रणनीति में सफल होते हैं तो देश के इतिहास में यह अपने तरह का पहला आंदोलन होगा, जब किसान सड़क पर उतरे बिना, अपनी उपज न बेचकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराएगा। खास बात यह है कि इस दौरान किसान दूध, फल, सब्जियां एवं अन्य सामग्री आपस में विनिमय करेंगे और गरीबों को दान करेंगे। किसान संगठनों ने इस बार भारतीय किसान संघ को आंदोलन से दूर रखा है। जबकि अन्य सभी छोटे संगठनों को शामिल होने का न्यौता दिया है। 


  Write a Comment

Required fields are marked *

Loading...