अफसर करा रहे विधायकों की किरकिरी

भोपाल।

मध्यप्रदेश में विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है।एक तरफ सवालों से सत्तापक्ष और विपक्ष एक दूसरे का घेराव करने में लगे हुए है वही दूसरी तरफ अफसरशाही सरकार की जमकर किरकिरी करवा रही है।अफसरों द्वारा विधानसभा में विधायकों के सवालों का गलत जवाब दिया जा रहा है।हैरानी की बात तो ये है कि इसका खुलासा खुद भाजपा-कांग्रेस के विधायकों ने किया है।विधायकों का कहना बहै कि इसको लेकर वे कई बार मुद्दा भी उठा चुके है, लेकिन इससे कोई सुधार नहीं हुआ।मंत्री जांच कराने का आश्वासन देते हैं, लेकिन गलत जवाब पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

दरअसल, विधानसभा में भाजपा विधायक संजय पाठक ने कटनी में जलाशयों के जीर्णोद्धार का मामला उठाया था । जिस पर जल संसाधन मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा ने खर्च के डाटा पेश कर दिए। इस पर पाठक ने कहा कि आपको अफसर भ्रमित कर रहे हैं। ये खर्च की राशि वहां के अमले की वेतन-भत्तों की है। अफसर आपको गुमराह कर रहे हैं।

वही कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने बैतूल में हुए पौधरोपण घोटाले पर ध्यानाकर्षण लगाया था इसका जवाब वित्त मंत्री तरुण भनोत ने दिया तो कुणाल ने कहा कि अधिकारी लगातार सवालों के गलत जवाब दे रहे हैं। पहले भी कला मंडली के प्रश्न-बी को खत्म कर दिया गया। सीसीटीवी पर पूछे सवाल पर भी अफसरों ने यही किया। प्रबोधन कार्यक्रम में भी अध्यक्ष को यह समस्या बताई थी। इस पर स्पीकर एनपी प्रजापति ने कहा कि इसकी शिकायत प्रश्न एवं संदर्भ समिति से करें।

इसके अलावा कांग्रेस के सुनील सराफ ने प्रश्न लगाकर अलीराजपुर और जोवट की जानकारी मांगी थी। तो स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने अफसरों से जवाब लेकर मौखिक तौर पर भुगतान की जानकारी दी। सराफ ने 50 रुपए के स्टाम्प पर अनुबंध होना बताया, लेकिन इसका कोई लिखित या मौखिक जवाब नहीं दिया गया।इतना ही नही विधायक नागेंद्र सिंह ने रीवा व सतना में अवैध क्रेशर व भंडारण मामले में नागेंद्र ने प्रश्नकाल में कहा कि खनिज मंत्री ने वहां लाइसेंस देना बताया है, लेकिन यह असत्य है। प्रदूषण विभाग से पर्यावरण का कोई लाइसेंस या मंजूरी क्रेशर को नहीं दी गई है। अफसर मिले हुए हैं। अवैध तरीके से खनन हो रहा है।

बता दे कि यह पहला मौका नही है। इससे पहले भी अफसर सरकार की जमकर किरकिरा करवा चुके है।कैबिनेट में भी मंत्रियों द्वारा अफसरों की ना सुनने और अपने हिसाब से प्रस्ताव भेजने के आरोप लग चुके है। जिनकी जानकारी तक उन्हें नही होती है। हालांकि इसके लिए सरकार द्वारा कई अफसरों के तबादले भी किए जा चुके है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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