Breaking News
अब मंत्री-परिषद के सदस्य उतरेंगें सड़कों पर, जनता को समझाएंगे 'सड़क सुरक्षा' के नियम | 28 सितंबर को फिर भारत बंद का ऐलान, इसके पीछे ये है वजह | 12वीं पास के लिए सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा मौका, जल्द करें अप्लाई | शर्मनाक : युवक की हत्या के शक में महिला को निर्वस्त्र कर घुमाया, पथराव-आगजनी, 8 पुलिसकर्मी सस्पेंड | शिवराज कैबिनेट की बैठक खत्म, इन अहम प्रस्तावों को मिली मंजूरी | मॉर्निंग वॉक के दौरान EOW इंस्पेक्टर की मौत, हार्ट अटैक की आशंका | अखिलेश की नजर अब मप्र पर, 3 सितंबर को आएंगें इंदौर | अटल जी के निधन पर पूरे देश में शोक और भाजपा नेता निकाल रहे डीजे यात्रा : कांग्रेस | VIDEO : मोबाईल टॉवर पर चढ़ा शराबी, मचा रहा हंगामा, नीचे उतारने में जुटी पुलिस | चुनावी साल में शिवराज सरकार का मास्टर स्ट्रोक, कुपोषण मिटाने खर्च करेगी 57 हजार करोड़ |

सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर आरटीआई एक्टिविस्ट ने उठाये सवाल

भोपाल।

आऱटीआई के तहत सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर आरटीआई एक्टिविस्ट ने सवाल खड़े किए है। सूचना का अधिकार आंदोलन के संयोजक अजय दुबे ने मुख्यमंत्री शिवराज, नेता प्रतिपक्ष अजय और मुख्य सचिव के नाम एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि मप्र सरकार ने विपरीत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बने RTI एक्ट के तहत सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कुल 187 उमीदवारों के नाम चयन समिति के सामने रखे है जिसमें भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर आरोपो को झेल रहे कई दागियों के नाम भी सम्मिलित हैं। उदाहारण के लिए मप्र के पूर्व आईएएस मुक्तेश वार्ष्णेय के विरुद्ध भिंड में कोर्ट ने कंप्यूटर घोटाले में संलिप्त रहने पर केस दर्ज करने का आदेश दिया लेकिन सरकार ने चयन समिति के समक्ष इसकी जानकारी नही रखी है जो कानूनन गलत है।


उन्होंने लिखा है कि मैं पिछले 2001 से मध्यप्रदेश में सरकार को पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए सामाजिक आंदोलन के जरिये सक्रिय रहा हूं औऱ आगे भी रहूंगा। 2012 में मैंने मप्र में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता और स्वच्छता निर्धारित करने के लिए मप्र हाई कोर्ट से याचिका के जरिये गुहार लगाई थी जो जिसके फलस्वरूप मप्र हाई कोर्ट ने विज्ञापन जारी कर निश्चित समय सीमा में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करने का आदेश दिया था और कुल 6 लोगो की नियुक्ति फरवरी 2014 में हुई ।इसी तरह मैं आपको एक बार फिर अवगत करवाना चाहता हूं कि 20 अगस्त 2018 को मप्र सरकार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए आपकी (मुख्यमंत्री) अध्यक्षता में उच्च स्तरीय चयन समिति बैठक होने वाली है, जिसमे नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और कैबिनेट मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा भी शामिल होंगें।इस समिति में कुल 187 आवेदनकर्ताओं के नाम आए है। लेकिन इसमें कई चेहरे विवादित हैं और RTI एक्ट 2005 के तहत सूचना आयुक्तों के लिए पात्र नही है।

उन्होंने लिखा है कि उक्त 6 सूचना आयुक्तों में से अधिकतर ने पद पर बैठते ही निजी सुविधा और अतृप्त लालसा के लिए जनहित को दरकिनार कर दिया। मप्र सूचना आयोग वर्तमान में भ्रष्टाचार और साजिशों का अड्डा बन गया है।प्रदेश की जनता व्यथित और पीड़ित है जिसके कारण सूचना का अधिकार कानून  भ्रष्टाचार की समस्या से लड़ने में कमजोर हो गया है।अक्षम सूचना आयुक्तों के कारण लापरवाह और भ्रस्ट सरकारी अधिकारियों में इस कानून के प्रति कण मात्र भी भय नहीं है जिससे RTI आवेदनों की दुर्दशा हो रही है। उन्होंने मांग की है कि इस बार होने वाली मप्र के नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए योग्य, प्रख्यात,ईमानदार,अनुभवी ,निष्पक्ष और स्वच्छ व्यक्तियों का चयन किया जाए। ताकी जनता के विश्वास की रक्षा हो सके और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बढ़े।

कृपया निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करते हुए विधि सम्मत कार्यवाही करें

1)मप्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हेतु जारी संशोधित विज्ञापन दिनांक 23/22 मई 2018 त्रुटिपूर्ण है(विज्ञापन संलग्न है ) क्योकि इस विज्ञापन में सूचना आयुक्तों की सेवा शर्ते मुख्य सचिव स्तर की लिखी गई जो अनुचित है ।भारत सरकार के द्वारा इस अधिनियम में सूचना आयुक्तों की सेवा शर्तों में संशोधन हेतु वर्तमान में संसद में प्रस्तावित किया गया है जिसके प्रकाश में भारत सरकार ने दिनांक 26 जुलाई 2018 को केंद्रीय सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हेतु जारी विज्ञापन में सेवा शर्तों को नियुक्ति उपरांत तय करने को कहा है।भारत सरकार का विज्ञापन इस मेल के साथ संलग्न है ।कृपया अधिनियम के संशोधन होने तक नियुक्ति प्रक्रिया स्थगित करें।


2)सुप्रीम कोर्ट द्वारा नामित शर्मा विरुद्ध भारत सरकार सिविल अपील 210 /2012 में दिनांक  सितंबर 2013 को पारित आदेश में निर्देश बिंदु 10 और बिंदु 11 में स्पष्ट किया है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पारदर्शी और स्वच्छ प्रक्रिया से रहेगी।इस प्रक्रिया हेतु राज्य में जिम्मेदार विभाग उपयुक्त लोगो का पैनल बनाकर चयन समिति को देगा जिसे सक्षम प्राधिकारी को नियुक्ति हेतु अनुशंसा करेगी।अतः मेरिट पर शॉर्टलिस्ट कर आवेदनकर्ताओं के नाम बैठक के पूर्व उपलब्ध करवाये। उमीदवारों द्वारा प्रस्तुत जानकारी का वेरिफिकेशन भी करवाया जाए।

3)मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी संवैधानिक प्रावधानों के तहत पारदर्शी तरीके से सूयोग्य आवेदनकर्ताओं को चयनित करने के लिए कई मर्तबा मप्र सरकार को लिखा है लेकिन सरकार ने असंवेदनशीलता का परिचय देते हुए अभी तक विधि सम्मत निर्णय नही लिया।आपको स्मरण करना उचित होगा कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा 2011 में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त श्री जोसफ की नियुक्ति निरस्त करते समय नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति का उचित निराकरण करने की व्यवस्था दी थी।अतः मप्र सरकार मप्र के नेता प्रतिपक्ष की असहमति/सहमति को सम्मान देते हुए रिकॉर्ड में दर्ज करें।

4)सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्रीय सतर्कता आयुक्त पद पर जोसफ की नियुक्ति निरस्त करते हुए आदेश में institutional integrity पर भी जोर दिया था।मप्र सरकार ने इस आदेश के विपरीत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बने RTI एक्ट के तहत सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हेतु कुल 187 उमीदवारों के नाम चयन समिति के सामने रखे है जिसमें भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर आरोपो को झेल रहे कई दागियों के नाम भी सम्मिलित हैं। उदहारण के लिए मप्र के पूर्व आईएएस मुक्तेश वार्ष्णेय के विरुद्ध भिंड में कोर्ट ने कंप्यूटर घोटाले में संलिप्त रहने पर केस दर्ज करने का आदेश दिया लेकिन सरकार ने चयन समिति के समक्ष इसकी जानकारी नही रखी है जो कानूनन गलत है।


  Write a Comment

Required fields are marked *

Loading...