सरकारी बैठक में सिंधिया की उपस्थिति पर बवाल, भाजपा ने उठाये सवाल

भोपाल। ग्वालियर कलेक्ट्रेट में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समीक्षा बैठक लेने पर सियासत गर्मा गई है। भाजपा ने जिले के प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिंधिया न तो विधायक हैं और न ही सांसद हैं, तो फिर किस हैसियत से उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली। भाजपा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश-प्रदेश में लोकतंत्र हैं, लेकिन ग्वालियर में आज भी राजतंत्र है। बैठक में मंत्री प्रद्युम्न तोमर, विधायक, कलेक्टर, निगम कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक से लेकर सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे। 

भाजपा ने कांग्रेस के मंत्री, विधायक और जिले के अधिकारियों के सामने सवाल खड़ा कर दिया और सिंधिया को निशाने पर ले लिया। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने टवीट के जरिए कहा कि 'भारत में प्रजातंत्र है, शायद मप्र में भी प्रजातंत्र है, लेकिन ग्वालियर में आज भी राजतंत्र है इसलिए महाराजा(ज्योतिरादित्य सिंधिया) जिले के कलेक्टर, एसपी सहित अधिकारियों और सूबे के वजीरों को हुक्म फरमा रहे हैं। मान गए जी कुर्सी को बचाने के लिए कमलनाथ जी कैसे कैसे गुल खिला रहे हैं।' 

कांग्रेस ने इस तरह किया बचाव

सिंधिया के बैठक में शामिल होने पर जब मंत्री पीसी शर्मा से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे जायज ठहराया| मंत्री ने कहा सिंधिया वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं| इसलिए उनको अधिकार है| वहीं कांग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया राष्ट्रीय नेता हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे और मप्र में भी वरिष्ठ नेता हैं। विकास के मुददे पर सभी एकजुट होना चाहिए। भाजपा सांसद को बैठक में बुलाया गया था ये आते हैं नहीं और बस भाजपा आरोप लगाना जानती है। 

बैठक में मौजूद थे हर विभाग के अधिकारी

ग्वालियर कलेक्ट्रेट में सिंधिया ने सुबह 11 बजे से शहर विकास के कार्यों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रघुम्न सिंह तोमर, महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी,विधायक मुन्नलाल गोयल, विधायक प्रवीण पाठक,कलेक्टर अनुराग चौधरी,एसपी नवनीत भसीन,निगमायुक्त संदीप माकिन,कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवेंद्र शर्मा,निगम नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित सहित सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

सिंधिया को लेकर अफसरों ने साधी चुप्पी

समीक्षा बैठक के फोटो भी सामने आए हैं। जिसमें सिंधिया बैठक के केंद्र में है। वे अफसर, मंत्री एवं विधायकों को संबोधित करते दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है जिले के अफसरों ने सिंधिया के बैठक में होने पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली। किसी भी अधिकारी ने यह नहीं बताया कि बैठक में सिंधिया मौजूद थे। कलेक्टर अनुराग चौधरी ने सिर्फ इतना कहा कि मंत्री और विधायकों के समक्ष शहर विकास के मुददों पर बातचीत की गई थी। इसमें प्रस्तावित और संचालित योजनाएं भी शामिल रहीं। पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन ने कहा कि बुधवार को मंत्री और स्थानीय विधायकों के साथ शहर विकास के मुददों पर चर्चा की गई। इसमें ट्रैफिक सहित विभिन्न् बिंदुओं पर सुझाव सामने आए। जबकि निगमायुक्त संदीप माकिन ने कुछ भी नहीं कहा। 

ग्वालियर कलेक्टर को इसका जवाब देना पड़ेगा कि उन्होंने एक आम व्यक्ति से सरकारी बैठक को चेयर कैसे कराया। मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल से श्किायत की जाएगी। मुख्यमंत्री सरकार बचाने के लिए यह स्थिति पैदा कर रहे हैं। यही वजह है कि वे अभी तक 11 महीने में एक बार भी ग्वालियर नहीं आए हैं। बैठक में स्थानीय सांसद विवेक शेजवलकर को होना चाहिए, लेकिन जिला प्रशासन ने आम व्यक्ति से बैठक को चेयर कराया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। 

लोकेन्द्र पारासर, प्रदेश संवाद प्रमुख, मप्र भाजपा 


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