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SC/ST एक्ट : सवर्णों को मिला संगठनों का साथ, 17 सितंबर से निकालेंगे पदयात्रा, 20 को घेरेंगें सीएम हाउस

भोपाल

एससी/एक्ट को मूल रूप में बहाल करने पर सवर्ण संगठनों में नाराजगी बढ़ने लगी है।मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी सवर्ण लामबंद होने लगे हैं। सबसे मुखर विरोध मध्यप्रदेश में नजर आ रहा है।अब एक्ट का विरोध करने काला कानून विरोधी मोर्चा का गठन किया गया है।  इस काला कानून विरोधी मोर्चे को 6 संगठनों का समर्थन भी मिल गया है। संगठनों औऱ सवर्णों ने प्रदेश को शिवराज सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। इसके विरोध में सवर्ण और संगठन 17 सितंबर से सिवनी मालवा से पैदल यात्रा शुरु करने जा रहा है जो 20 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। यहां पहुंचकर मोर्चा सीएम हाउस का घेराव करेगा। वही एट्रोसिटी एक्ट का विरोध करने सवर्णो से संगठन  ने अपील की है। ऐसे में चुनावी साल में ये आंदोलन सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर सु्प्रीम कोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले को पलट दिया था। जिसके बाद धीरे-धीरे सवर्णों में नाराजगी बढ़ने लगी। इसको लेकर बीते दिनों कई संगठनों ने भारत बंद का भी आह्नान किया था । जगह जगह प्रदर्शन, घेराव, धरना भी दिया था। कई जगहों पर पथराव आगजनी और तोड़फोड़ की भी घटनाएं सामने आई थी।वही कई संगठनों ने सरकार पर दलितों के तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया था। बताया जा रहा है कि सवर्णों की नाराजगी अब बाकी राज्यों की ओर भी रुख करने लगी है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एससी/एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया था। इसके अलावा एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी थी।शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिन के भीतर जांच करनी चाहिए और फिर आगे ऐक्शन लेना चाहिए।

केन्द्र सरकार का संशोधन

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटते हुए एससी/एसटी एक्ट को वापस मूल स्वरूप में बहाल कर दिया।हाल ही में ये संशोधित एससी/एसटी (एट्रोसिटी एक्ट) फिर से लागू किया है। अब फिर से इस एक्ट के तहत बिना जांच गिरफ्तारी संभव हो गई। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ मानसून सत्र में एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को पारित किया था।


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