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तहसीलदार-नायब तहसीलदार को बड़ा झटका, HC ने तत्काल काम पर लौटने के दिए निर्देश

जबलपुर|  प्रदेश भर में तहसीलदार और नायब तहसीलदार के 4 दिन के सामूहिक अवकाश पर चले जाने से जहां राजस्व कामकाज ठप पड़े हैं| वहीं हाईकोर्ट ने इसको गंभीरता से लिया है| हाई कोर्ट ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार के सामूहिक अवकाश को अवैध मानते हुए तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए है, साथ ही मुख्य सचिव को करवाई करने को कहा है| 

तहसीलदार और नायब तहसीलदार के चार दिनी सामूहिक अवकाश के खिलाफ नरसिंहपुर के राजेश कुमार ने याचिका दायर की थी| जिसमे बताया गया कि इस तरह सामूहिक अवकाश पर जाने का कोई प्रावधान नहीं है| याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इस तरह सामूहिक अवकाश को अवैध माना है| अदालत ने यह भी माना कि राजस्व अदालतों और आम जनता के अन्य संबंधित कार्यों का काम प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहा है। साथ ईद के त्यौहार के चलते इस तरह अवकास से कानून व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ सकता है| कोर्ट ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार की हड़ताल पर रोक लगाते हुए तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा राज्य के मुख्य सचिव को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिए हैं| 

दरअसल, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने अपनी आठ सूत्रीय मांगें पूरी न होने से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रशासन को सौंपा था। इसमें मांगों के पूरा न होने पर पहले चरण में 12 से 15 जून तक सामूहिक अवकाश लेकर काम से दूरी बनाने और फिर 25 जून से 9 जुलाई तक सामूहिक अवकाश लेने की चेतावनी दी गई थी। लेकिन राजस्व अधिकारियों की मांगों का निराकरण न होने से अब तहसीलदार व नायब तहसीलदार 12 जून से चार दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए। इससे निर्वाचन कार्य के अलावा आय-जाति, मूलनिवासी, नकल, न्यायालयीन प्रकरण आदि कामकाज प्रभावित हो रहे हैं, वहीं लोग भी परेशान हैं| छोटे से लेकर बड़े व जरूरी कामों के लिए तहसीली आने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। जन्म प्रमाण पत्र, सीमांकन, नामांतरण और बंटवारा सहित अन्य कई कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं। 


यह हैं प्रमुख मांगें

- ग्रेड-पे की विसंगति दूर की जाए।

- संरक्षण अधिनियम की धारा का परिपालन करने अधिसूचना जारी की जाए।

- नायब तहसीलदार पद को राजपत्रित का दर्जा दिया जाए।

- न्यायालय दिवस में राजस्व अधिकारी को अन्य कार्यों से मुक्त रखा जाए।

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