डेढ़ महीने बाद कलेक्टर-एसपी को हटाया, अब हिंसा की जांच कराएगी सरकार

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में 2 अप्रैल को दलित संगठनों के भारत बंद के दौरान भड़की हिंसा की सरकार जांच कराने जा रही है। जांच के ऐलान से पहले सरकार ने हिंसा प्रभावित तीन जिले भिंड, मुरैना एवं ग्वालियर के पुलिस अधीक्षकों तबादला आदेश जारी कर दिए हैं, साथ ही मुरैना एवं भिंड के कलेक्टरों को भी हटा दिया है। जबकि दलित संगठनों की मांग पर सरकार डेढ़ महीने बाद हिंसा की जांच कराएगी और पुलिस द्वारा हिंसा में उपद्रव करने को लेकर बनाए गए आरोपियों को माफ भी करेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो अलग-अलग प्रतिनिधि मंडल के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद हिंसा की जांच का ऐलान किया है। 

भारत बंद के दौरान हुई हिंसा को लेकर ग्वालियर, भिंड एवं मुरैना समेत प्रदेश के अन्य जिलों में प्रशासन ने करीब 3 हजार से ज्यादा लोगों को आरोपी बनाया है। जिनमें से ज्यादातर आरोपी एससी-एसटी वर्ग के हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी हैं। ग्वालियर-चंबल के तीनों जिलों के पुलिस सूत्रों के अनुसार जिन्हें आरोपी बनाया गया है, वे नेता एवं अफसरों से जुड़े हैं। जिस वजह से हिंसा भड़काने के लिए जो जिम्मेदार हैं, वे फिलहाल कानून की पकड़ से दूर हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हिंसा में जिन अधिकारी एवं कर्मचारियों केा आरोपी बनाया है, उन्हें बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू हेा गई है। इस बीच ग्वालियर-चंबल के जनप्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर बतायाकि हिंसा में प्रशासन ने बेगुनाहों को आरोपी बनाया है। इसकी निष्पक्ष जांच होना चाहिए। चूंकि मांग करने वाले भाजपा एवं अन्य दलों के राजनीति लोग हंै, ऐसे में मुख्यमंत्री ने डेढ़ महीने बाद आई मांग पर निष्पक्ष जांच कराने का ऐलान कर दिया है। साथ ही पीडि़तों को राहत दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट को लेकर जो नई व्यवस्था दी थी उसके विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया। बंद के दौरान ग्वालियर, मुरैना एवं भिंड में जबर्दस्त हिंसा हुई। करीब 8 लोग मारे गए और करोड़ो ंकी निजी एवं सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ।  


भाजपा के दलित नेता सीएम से मिले

2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान ग्वालियर-चंबल संभाग में हुई घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ग्वालियर-चंबल में भाजपा से जुड़े नेता मुख्यमंत्री से मिले। जिस पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि निर्दोष व्यक्तियों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। साथ ही इसमें हुई जन-धनहानि के लिए प्रभावितों को उचित सहायता राशि दी जायेगी। जब प्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिले तब जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जनजातीय कार्य,  अनुसूचित जाति कल्याण राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य, विधायक मेहगांव मुकेश चौधरी, प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा पदाधिकारी मौजूद थे। 

इधर भाजपा नेताओं से पहले बहुजन संघर्ष दल के अध्यक्ष फूल सिंह बरैया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से एक प्रतिनिधि-मंडल मिला। प्रतिनिधि-मंडल ने ग्वालियर-चंबल संभाग में विगत 2 अप्रैल को हुई घटना की निष्पक्ष जांच कराने और उसमें हुई जन-धनहानि के लिए प्रभावितों को राहत राशि देने संबंधी ज्ञापन दिया।