मंत्री बोले- अधिकारी अगर सांप है तो 15 साल तक दूध क्यों पिला रही थी बीजेपी

भोपाल।

लोकसभा चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर तेजी से चल रहा है। खास करके बयानों में भाषा का भी स्तर नही देखा जा रहा है। नेता बयान देने से पहले शब्दों और भाषा पर भी नियंत्रण नही रख रहे है। गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष  भार्गव ने गुना दौरे के दौरान मंत्रालय में बैठे कर्मचारियों और अधिकारियों की तुलना सांप से कर दी थी।  इसको लेकर खूब बवाल मचा था। कांग्रेस नेता चुनाव आयोग तक शिकायत करने पहुंचे थे। वही कांग्रेस द्वारा भार्गव के बयान पर जमकर पलटवार किया जा रहा है।अब कमलनाथ सरकार में परिवहन मंत्री ने भार्गव पर हमला बोला है और उनके बयान को गलत बताया है।

आज मीडिया से चर्चा के दौरान परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ने नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बयान को गलत बताया। सिंह ने भार्गव पर पलटवार करते हुए कहा मैं मंत्रियों को मंत्री और अधिकारियों को जिम्मेदार अधिकारी मानता हूं। नेता प्रतिपक्ष का मंत्रियों और अधिकारियों को सांप कहना गलत है।आगे उन्होंने कहा कि अगर फिर भी भार्गव  मंत्री-अधिकारी को सांप मानते हैं तो मैं पूछना चाहता हूं कि 15 सालों से आपकी ही सरकार थी, तो जवाब दे कि सालों से आप सांपों को  क्यों दूध पिला रहे थे । हालांकि यह पहला मौका नही है जब भार्गव ने इस तरह का बयान दिया हो। इसके पहले भी वे कांग्रेस नेताओं और पार्टी के लिए अभद्र और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर चुके है। जिसको लेकर भी खूब बवाल मचा था।

गौरतलब है कि बीते कई दिनों से प्रदेश में तेजी से बदजुबानी का दौर चल रहा है। बीते दिनों गोपाल भार्गव गुना विजय संकल्प यात्रा में पहुंचे थे, जहां उन्होंने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला था और कहा था कि  सरकार युवाओं को सांप पकड़ने का रोजगार देने की बात कह रही है। अगर सभी सांप पकड़ लिए गए तो वल्लभ भवन में कौन बैठेगा। मंत्रियों का क्या होगा? असली सांप तो यही हैं। इसको लेकर शुक्रवार को कांग्रेस चुनाव आयोग शिकायत करने पहुंची थी।शिकायत में कांग्रेस ने कहा था कि भाजपा नेता आचार संहिता में भी निरंतर विवादास्पद , आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा भी इस अवसर पर वल्लभ भवन में बैठने वाले अधिकारी कर्मचारियों की तुलना सांप से की गयी है। उनका यह बयान वल्लभ भवन में बैठने वाले हजारों अधिकारी एवं कर्मचारियों का घोर अपमान है। सलूजा ने कहा था कि इस प्रकार के बयान प्रदेश में राजनैतिक और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाले बयान हैं जो आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं। इस तरह के आपत्तिजनक एवं विवादास्पद बयान आचार संहिता के दौरान प्रतिबंधित रहते हैं। उन्होंने आदर्श आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए उक्त नेताओं के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का प्रकरण दर्ज कर कड़ी कार्यवाही करने का आग्रह किया है।



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