प्रमुख सचिव, DGP और होशंगाबाद SP की बढ़ी मुश्किलें, हाईकोर्ट ने जारी किया वारंट

भोपाल।

मध्यप्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव, डीजीपी और होशंगाबाद पुलिस अधीक्षक के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। बताया जा रहा है यह वारंट  एक अवमानना प्रकरण में मोहलत देने के बावजूद जवाब पेश नहीं करने के चलते दिया गया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने दोनों अधिकारियों को 12 फरवरी को खुद हाजिर होकर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर अधिकारी अगली सुनवाई के पहले अपना जवाब पेश कर देते हैं, तो उनका वारंट निरस्त माना जाएगा। 

दरअसल,  भोपाल के रहने वाले सेवानिवृत्त टीआई रूप सिंह विश्वकर्मा ने एक याचिका दायर की थी। दायर याचिका में कहा गया था कि टीआई रूपसिंह विश्वकर्मा को साल 2006 में पदोन्नति मिली थी। जिसके बाद उन्हें बढ़ी हुई तनख्वाह भी मिलने लगी, लेकिन एक साल बाद ही पुलिस विभाग ने उन्हें एक नोटिस दिया। जिसमें उनका डिमोसन और एक साल तक बढ़ी सैलेरी के पैसे वापिस करने की बात कही गई। पुलिस विभाग ने पुराना आदेश निरस्त कर उसे एक सितंबर 2007 से द्वितीय समयमान वेतनमान का आदेश जारी कर दिया।

टीआई विश्वकर्मा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिस पर सुनवाई करते हुये कोर्ट ने 2018 में रूप सिंह के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उन्हें गृह विभाग से राशि नहीं दी गई। जिस पर हाईकोर्ट ने पूर्व में पुलिस विभाग का आदेश निरस्त कर एक अप्रैल 2006 से ही उक्त वेतनमान देने के निर्देश दिए थे। तय सीमा के बावजूद आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई। कोर्ट अधिकारियों को जवाब पेश करने के निर्देश दिए, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।  लिहाजा विश्वकर्मा ने कोर्ट अवमानना याचिका हाईकोर्ट में दायर कर दी। हाईकोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव, डीजी और होशंगाबाद पुलिस अधीक्षक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट द्वारा गृह विभाग के प्रमुख सचिव केके सिंह, पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला व होशंगाबाद एसपी के खिलाफ 10-10 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। सभी अधिकारियों को कहा गया है कि 12 फरवरी को खुद कोर्ट में हाजिर होकर अपने-अपने जवाब दें।


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