पूर्व मंत्री बोले- जनहित की लड़ाई में जेल भी जाना पड़ा तो पीछे नहीं हटूंगा

सागर।

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा कांग्रेस का जमकर घेराव कर रही है ।इसी कड़ी में सोमवार को पूर्व गृहमंत्री और विधायक भूपेन्द्र सिंह ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब तक यह अन्याय नहीं रुकता, जनता के साथ मेरी भी यह लड़ाई जारी रहेगी। चाहे हमें लाठी खाना पड़े या जेल जाना पड़े। इसके बाद उन्होंने पाले से खराब हुई फसल के नुकसान का सर्वे कराने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौपा।वही उन्होंने अफसरों के ट्रांसफर और किसानों की कर्जमाफी को लेकर भी सवाल उठाए।

             दरअसल, सोमवार को सागर के सुरई में पाले से खराब हुई फसलों के नुकसान का सर्वे न करने सहित किसान की अन्य मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ रैली निकाली गई और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। इस रैली में पूर्व गृह मंत्री व क्षेत्र के भाजपा विधायक भूपेन्द्र सिंह और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। इस रैली में किसानों को संबोधित करते हुए सिंह ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए। सिंह ने कहा कि किसानों की फसलें मौसम की मार से बर्बाद हो गईं हैं और सरकार ट्रांसफर पर फैसले ले रही है। आज तक सर्वे के आदेश तक नहीं हुए। कोई अधिकारी, पटवारी, नेता खेतों की मेड़ पर नहीं पहुंचा। सर्वे के आदेश हो जाते तो कम से कम किसानों को बीमा मिल जाता । सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार खजाना भरने के लिए विभिन्ना विभागों के माध्यम से सड़कों के किनारे सब्जी, फल बेचने वाले ऑटो चालकों से 5-5 सौ रुपए वसूली की जा रही है। इसी अन्याय के खिलाफ यह प्रदर्शन करना पड़ा है और जब तक यह अन्याय नहीं रुकता यह लड़ाई जारी रहेगी कि चाहे हमें लाठी खाना पड़े या जेल जाना पड़े।

कर्जमाफी और बिजली बिल हॉफ करने को लेकर भी उठाए सवाल

सिंह इतने पर ही नही रुके उन्होंने आगे कहा कि कमलनाथ सरकार हर किसान का कर्ज माफ, बिजली बिल हाफ का वादा कर सत्ता में तो आ गई पर आज तक वादा नहीं निभाया। सरकार लाल, पीली कागजों में किसानों को उलझा कर लोकसभा चुनावों तक समय पास कर रही है, अपनी असफलताओं को काला कर रही है ।ऊपर से फसलों के समर्थन मूल्य कम कर दिए जो किसानों के सम्मान से खिलवाड़ है।जबकि पिछले साल हमारी सरकार ने प्याज के अधिक उपज के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने पर सरकार ने 8 रुपए किलो प्याज किसानों से खरीद कर किसानों के नुकसान को कम किया।


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