एमपी: बिजली कटौती को लेकर अधिकारी-कर्मचारियों पर फिर गिरी गाज, 7 सस्पेंड और 8 बर्खास्त

खंडवा।

लोकसभा चुनाव से पहले एमपी में बिजली कटौती बड़ा मुद्दा बन गई है। बीजेपी लगातार इसको लेकर कांग्रेस को घेरने में लगी हुई है, हालांकि कांग्रेस भी बचाव करते हुए धड़ाधड़ अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई कर जनता के बीच पैठ बनाने में लगी हुई है। हालांकि अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्रवाई से फोरम में नाराजगी है, बावजूद इसके कार्रवाई का दौर लगातार जारी है, बिना जांच के लापरवाह अधिकारियों -कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा रहा है। इंदौर-शाजापुर के बाद अब खंडवा में सात को सस्पेंड किया गया है वही 8  को नौकरी से निकाल दिया गया है।इस सख्त कार्रवाई के बाद कर्मचारी-अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

दरअसल, जिले में बिना कारण बिजली कटाैती करने के चलते विद्युत वितरण कंपनी के एक सहायक यंत्री, सर्किल इंचार्ज, परिक्षण सहायक व चार लाइन मेन को सस्पेंड कर दिया गया है वही आउटसाेर्स कंपनी के 8 कर्मचारियों काे नाैकरी से निकाल दिया गया। यह कार्रवाई ग्रामीणाें की शिकायत के बाद कृषि मंत्री के आदेश पर की गई है। इसके लिए कलेक्टर ने विद्युत वितरण कंपनी काे जांच के आदेश भी दिए थे और इन अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई करने को कहा था।

इसके साथ ही इन अधिकारी-कर्मचारियों पर बीजेपी के फेवर में काम करने का आरोप भी लगा है। कंपनी जांच में पाया गया कि जिले के विभिन्न फीडरों में पदस्थ कर्मचारी एक पार्टी विशेष को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से अनुचित रूप से लाइन बन्द कर बिजली संकट पैदा कर रहे हैं। जिसके बाद बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री ने जांच स्वयं जांच की और अफसर कर्मचारियाें काे दाेषी पाया। बताया जा रहा है कि हटाए और सस्पेंड किए गए यह कर्मचारी सोशल मीडिया पर भी भाजपा का प्रचार कर रहे थे। इधर कार्रवाई होते ही राजनीति फिर गर्मा गई है। कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर जमकर वार-पलटवार कर रहे है।

इन पर गिरी गाज 

नियमित कर्मचारियों रवि बर्डे, सहायक यंत्री जावर, सर्किल इंचार्ज श्याम पाल 33/11 केवी सेहजला, परीक्षण सहायक श्याम पाल को निलंबित किया गया। लाइन स्टाफ के कालीचरण दांगोरे लाइन अटेंडर जावर, मनोहर तुलसीराम लाइन हेल्पर जावर डीसी, गौरीशंकर गुर्जर लाइन अटेंडेंट पुनासा डीसी रीछफल एफडीसी, अरविंद लाड़ लाइन अटेंडेंट छैगांव माखन डीसी को कार्य में लापरवाही बरतने पर निलंबित किया गया। 8 आउटसोर्स पर्सन ललित मांडलेकर 33/11 केवी रनगांव, सोनू मालवीय 33/11 केवी सहेजला, राम गोड़वाल 33/11 केवी जावर, राकेश पांडे पुनासा डीसी केलवा एफओसी, बालकृष्ण प्रजापति पुनासा डीसी बांगरदा एफओसी, चंदन शुक्ला सनावद ईस्ट डीसी, यशवंत मूंदी डीसी छालपी एफओसी तथा दीपक महेंद्र सिंह 33/11 केवी निहालवाड़ी को सेवा से पृथक किया गया। 

अब तक 85 सस्पेंड और 89 अधिकारी-कर्मचारी हो चुके है बर्खास्त 

इससे पहले शुक्रवार को कंपनी ने शुक्रवार को लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कार्यपालन यंत्री (ईई), सहायक यंत्री (एई), कनिष्ठ यंत्री (जेई) और लाइनमैन समेत 85 अधिकारियों-कर्मचारियों को सस्पेंड और आउट सोर्स के 89 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था।इसकी अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) आईसीपी केशरी के उज्जौन, इंदौर एवं बड़वानी दौरे के साथ ही प्रबंध निदेशक विकास नरवाल के शाजापुर, उज्जौन, देवास, खरगोन, धार, बड़वानी दौरे में गंभीर लापरवाही उजागर हुई थी। इसके बाद शुक्रवार को निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश जारी किए गए। 

इधर फोरम ने दी बहिष्कार की चेतावनी

एक के बाद एक कर्मचारियों-अधिकारियों पर कार्रवाई करने पर म.प्र. यूनाइटेड फोरम फार पावर एमलाइज एन्ड इंजीनियर्स ने भी नाराजगी जताई है। फोरम का मानना है कि कोई भी अधिकारी-कर्मचारी अपने मन से बिजली कटौती नही करता , लेकिन जब आवश्यक हो जाता है, या कोई व्यवधान उत्पन्न हो जाता है , कोई अनहोनी होने वाली होती है तो बिजली बंद की जाती है। उन्होंने हाल ही में इंदौर और भोपाल के कर्मचारियों अधिकारियों पर की गई कार्रवाई का विरोध किया है।उन्होंने इस कार्रवाई को तत्काल रद्द करने की मांग की है, साथ ही कर्मचारी-अधिकारियों को फिर से काम पर आने के निर्देश जारी करने की बात कही है।साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर आने वालेसमय में दोबारा ऐसी कार्रवाई की गई तो फोरम इसका बहिष्कार करेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


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