पूरी ताकत झोंकने पर भी हारे थे यह नेता, इस बार चेहरे बदलेगी भाजपा

भोपाल।

चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से ही कांग्रेस-बीजेपी में चुनावी रणनीति और टिकटों को लेकर मंथन किया जा रहा है। दोनों ही राजनैतिक दलों में अभी तक टिकटों को लेकर नाम फाइनल नही हो पाए है।हालांकि सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों की फर्जी लिस्ट वायरल हो रही है, लेकिन दोनों ही दलों ने इसे नकार दिया है।फिलहाल दोनों ही दलों में टिकटों को लेकर लगातार मंथन किया जा रहा है। वही मिशन 2018 पूरा करने में लगी बीजेपी को इस बार प्रत्याशी चयन में खासा पसीना बहाना पड़ रहा है।  आज भी राजधानी भोपाल में बीजेपी ने केन्द्रीय चुनाव प्रचार समिति की बैठक बुलाई है, इसमें टिकटों और चुनावी रणनीतियों को लेकर चर्चा की जाएगी।इसी बीच खबर है कि भाजपा द्वारा उनका भी टिकट बदला जा सकता है जिन पर हाल ही में हुए उपचुनाव और नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा को हार मिली थी।पार्टी यहां नए चेहरों को मौका देगी। चुंकी ये भाजपा के लिए बड़ा झटका था।

दरअसल, बीते एक-डेढ़ साल में हुए उपचुनाव और नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा को करारी हार मिली थी।देश की 19 नगरीय निकाय चुनाव में से भाजपा 9 में पीछे रही थी।इसके साथ ही अटेर, चित्रकूट, कोलारस और मुंगावली विधानसभा उपचुनावों में भी भाजपा को तगड़ा झटका लगा था ।उपचुनाव और नगरीय निकाय चुनावों में लाखों के प्रचार प्रसार और पूरी जान झोंकने के बावजूद भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी इस बार कोई रिस्क नही लेना चाहती इसलिए फूंक फूंक कर कदम रख रही है, वही मैदान में इस बार बाकि चुनावों के बजाय मुकाबला कड़ा है।  जिसके चलते ये फैसला लिया गया है। अगर ऐसा नही किया गया तो एंटीइनकमबेंसी  पार्टी पर हावी हो सकती है। बीते भाजपा जिन विधानसभा क्षेत्रों में पीछे रही है उन सीटों पर भी चेहरे बदलने पर पार्टी जोर दे रही है। वही  चुनाव से पहले सरकार और विधायकों के परफार्मेंस रिपोर्ट से पार्टी की नींद उड़ी हुई है, इसलिए पार्टी ने इस बार प्रत्याशी चयन को लेकर कई तरह के पैरामीटर तय कर दिए हैं और यहीं कारण है कि केंद्र के सर्वे से लेकर निजी एजेंसियों के सर्वे और रायशुमारी को भी पार्टी ने जरुरी कर दिया है।बहरहाल बीजेपी में इस बार बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के भी टिकट कटना तय है।  तमाम सर्वे में भाजपा के लगभग 70 विधायकों की जमीनी स्तिथि ठीक नहीं है, इनमे कई दिग्गज नेता और मंत्री भी शामिल हैं। यहीं कारण है कि पार्टी में इस बार टिकटों को लेकर घमासान मचा हुआ है और टिकट पाने के लिए नेता भोपाल से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं।

विधायक बीजेपी के फिर भी यहां मिली थी हार

सरदारपुर- विधायक बेलसिंह भूरिया अपनी विधानसभा में आने वाली नगर परिषद को नहीं बचा पाए।

राजगढ़ परिषद में भी भाजपा हारी ।

धरमपुरी- अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस विधानसभा सीट की धरमपुरी और धामनोद दोनों परिषद में पार्टी को हार मिली। यहां से कालुसिंह ठाकुर भाजपा के विधायक हैं।

मनावर- आदिवासी विधानसभा क्षेत्र मनावर में भी विधायक रंजना बघेल परिषद में भाजपा को जिताने में असफल रहीं। यहां लंबे समय से कांग्रेस का कब्जा है।

धार- केंद्रीय मंत्री और मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे दिग्गज नेता विक्रम वर्मा की पत्नी नीना वर्मा धार से विधायक हैं। फिर भी परिषद में कांग्रेस का कब्जा हो गया।

यहां भाजपा के बागी उम्मीदवार अशोक जैन ने भारी मात्रा में वोट कबाड़े जिस वजह से पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था।

हाटपीपल्या- राज्यमंत्री दीपक जोशी की विधानसभा क्षेत्र की करनावद नगर परिषद भाजपा के पास थी।

खिलचीपुर- विधायक हजारी लाल दांगी के नेतृत्व वाली खिलचीपुर भी अपनी नगर परिषद को नहीं बचा पाए थे।

पिपरिया- विधायक ठाकुरदास नागवंशी भाजपा के हैं फिर भी पचमड़ी केंट के चुनाव में पार्टी समर्थित पार्षद और अध्यक्ष को नहीं जिता पाए।

अनूपपुर- आदिवासी विधायक रामलाल रौतेल के क्षेत्र की जैतहरी परिषद पर भाजपा हारी।

शहडोल उपचुनाव में भी पार्टी की अपेक्षा के अनुरूप यहां वोट नहीं मिले।