शिवराज की ललकार के बाद मानी सरकार, आदिवासियों की मांगे होंगी पूरी

भोपाल।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज अपनी मांगों को लेकर आदिवासियों ने धरना प्रदर्शन किया था , जिसमें  पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे थे। प्रदर्शन में शिवराज ने सरकार पर बड़ा हमला बोला था और मांगे पूरी ना होने पर धरना जारी रखने और आंदोलन की चेतावनी दी थी।मुख्यमंत्री कमलनाथ को जब इस धरना प्रदर्शन की जानकारी लगी तो उन्होंने आदिवासियों को बुलाया था । इस वार्ता में आदिवासियों के प्रमुख नेताओं के साथ शिवराज भी कमलनाथ से मिलने मंत्रालय पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपनी मांगे रखी और सीएम ने सभी मांगो को पूरा करने का आश्वासन दिया।वही आदिवासियों ने अपनी मांगें पूरी होने के बाद विजय जुलूस भी निकाला।

शिवराज ने खुद इसकी जानकारी मीडिया को दी है। उन्होंने कहा कि सीएम ने आदिवासियों की सभी मांगे पूरी होने का विश्वास दिलाया है। उन्होंने कहा कि सरकार के होश ठिकाने आ गए, अक्ल ठिकाने लग गई। आदिवासी अभी संतुष्ट हैं लेकिन प्रशासन गड़बड़ी न करे, हम कदम कदम पर लड़ेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। शिवराज ने बताया कि भोपाल कलेक्टर ने आकर कहा कि सीएम बात करने को तैयार हैं चलो, तब जाकर हमने अफसरों के साथ सीएम से बात की। मामा मुख्यमंत्री नहीं है लेकिन किसी से कम भी नहीं है।

शिवराज ने कहा कि आदिवासियों का पसीना गिरेगा तो मामा खून बहाएगा। वन विभाग और आबकारी विभाग ने जो फर्जी मामले बनाए हैं, सरकार वो जांच के बाद वापस लेगी। वन जमीन पर गेहूं चना की तुलाई जो बची है, सरकार वो खरीदेगी। आदिवासी वन भूमि पट्टे से बेदखल नहीं किये जाएंगे। जमीन से कब्जा नहीं हटेगा, उसी जमीन पर रहेंगे। सरकार मक्का की फसल और कुए में ब्लास्टिंग की परमिशन भी देगी।पूर्व सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पंचायतों का सीमांकन और तेंदूपत्ते को लेकर भी भरोसा दिलाया है। 

इससे पहले शिवराज धरना-प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे और सरकार पर जमकर निशाना साधा था । शिवराज ने कहा कि  कमलनाथ गरीबों की हाय तुम्हें तबाह और बर्बाद करके रख देगी। पकड़ना है तो बड़े माफियाओं को पकड़ों।वल्लभ भवन के दलालों पर कार्रवाई करो। अगर आदिवासियों के हक को किसी सरकार ने छिनने की कोशिश की तो हम उस सरकार को भी नही छोड़ेंगे। सुन ले सरकार अगर आदिवासी की जमीन पर हाथ लगाया तो हम छोड़ेंगे नही।अगर आदिवासियों की मांगे सरकार नहीं मानेगी तो हम आंदोलन करेंगे। आदिवासियों के साथ मैं लड़ूंगा चाहे प्राण भी क्यों न चले जाए।  अगर हम आदिवासियों के हित में तीर कमान हाथ में उठाएंगे तो ज़िम्मेदारी तुम्हारी होगी।जीना है अपने हक़ में लड़ना सीखो और इनकी लड़ाई में लड़ूंगा।


आदिवासियों की प्रमुख मांगे-

-मक्के का बोनस 500 रुपए क्विंटल चाहिए।

-आदिवासियों को पट्टा दिया जाए।

-तेंदू पत्ते का पूरा बोनस दिया जाए।

-आदिवासियों को पट्टा दिया जाए।

-तेंदू पत्ते का पूरा बोनस दिया जाए।

- उन पर लगे मुकदमे हटाए जाए।.



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