अपनों से ज्यादा गैरों पर भरोसा, इन चेहरों पर जीत का दारोमदार

भोपाल| विधानसभा चुनाव में बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही दलों ने इस बार अपनों से अन्य दलों से आये मजबूत नेताओं को तरजीह दी है| चुनावी समय में आये नेताओं का पहले विरोध हुआ करता था, लेकिन सीट जीतने की चिंता में अब यह पार्टी के प्रिय और भरोसेमंद हो गए हैं और इन पर पार्टी ने ज्यादा भरोसा जताया है| इसके लिए अपने कमजोर नेता को किनारे कर दूसरे दल से आये मजबूत चेहरे को पार्टियां आजमा रही है| 

कांग्रेस ने इन पर जताया भरोसा 

गाडरवाड़ा : 2013 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दूसरे नंबर पर रहने वाली सुनीता पटेल को कांग्रेस ने टिकट दिया है। सुनीता 2013 में तीसरे नंबर पर आई थी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी साधना स्थापक से 12 हजार वोट ज्यादा पाए थे। सुनीता ही 35889 वोट ले गई थी, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी बुरी तरह पराजित हुई। विजयी भाजपा विधायक गोविंद सिंह पटेल हुए थे, जो इस बार भी भाजपा प्रत्याशी हैं।

देवतालाब : यहां बसपा से आईं विद्यावती पटेल पर कांग्रेस ने भरोसा जताया है। पिछली बार हारे अपने नेता उदयप्रक्राश मिश्र का टिकट काटा है। विद्यावती 2013 के चुनाव में दूसरे नंबर पर थीं। कांग्रेस के मिश्र तीसरे नंबर पर थे। विद्यावती महज 3885 वोट से हारी थीं। जबकि, कांग्रेस प्रत्याशी 6473 वोट से हारे थे। यह सीट अभी भाजपा विधायक गिरीश गौतम के पास हैं। वे ही भाजपा प्रत्याशी भी हैं। हाल ही में दिल्ली में विद्यावती दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस में शामिल हुई थी, उसके बाद उन्हें टिकट मिल गया| 

देवसर : यहां कांग्रेस ने सपा में जा चुके वंशमणि वर्मा को वापस लाकर भरोसा जताया है। वंशमणि 1998 में कांग्रेस में थे, फिर 2003 में सपा में चले गए। 2013 में निर्दलीय चुनाव लड़े और दूसरे नंबर पर रहे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया था। यहां भाजपा विधायक राजेंद्र कुमार थे, लेकिन भाजपा ने टिकट बदलकर सुभाष वर्मा को उतारा है।

मानपुर : यहां कांग्रेस ने पिछली बार की निर्दलीय प्रत्याशी ज्ञानवती सिंह पर भरोसा जताया है। ज्ञानवती कांग्रेस से नाराज होकर निर्दलीय मैदान में थीं। वे दूसरे नंबर पर आई थीं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी शंकुतला प्रधान तीसरे नंबर पर आई थीं। यहां कांग्रेस ने पहले बसपा से आए तिलकराज को टिकट दिया, लेकिन बाद में उस टिकट को रद्द करके ज्ञानवती को दे दिया। दोनों सूरत में अपनी पिछली प्रत्याशी शंकुतला को कमजोर माना है। यहां भाजपा विधायक मीना सिंह हैं, जिन्हें दोबारा मैदान में उतारा गया है।

बड़वाह : यहां पिछली बार कांग्रेस से बागी होकर सचिन बिरला 61970 वोट ले गए थे। इतने वोट फिसलने के कारण कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह सोलंकी 53277 वोट से पराजित हुए। यहां तक कि उनकी जमानत तक जब्त हो गई। विजेता हितेंद्र सिंह रहे, जो इस बार भी भाजपा प्रत्याशी हैं, इसलिए अपने राजेंद्र सिंह की बजाए कांग्रेस ने सचिन को मैदान में उतारा है।  

जावद : 2013 में निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार अहीर दूसरे नंबर और कांग्रेस प्रत्याशी अनीस टांक तीसरे नंबर पर थे। निर्दलीय राजकुमार 42503 वोट ले गए थे, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी अनीस की जमानत तक जब्त हो गई थी। अनीस को केवल 2294 वोट मिले थे। राजकुमार कांग्रेस से नाराज होकर निर्दलीय लड़े थे। 56154 वोट पाकर भाजपा के ओमप्रकाश सकलेचा जीते थे। अब फिर भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश हैं, इसलिए कांग्रेस ने अनीस को छोड़ अहीर पर दांव खेला है।

विजयराघोगढ़ : इस सीट पर रोचक मुकाबला है, यहां मुकाबला वही है, लेकिन प्रत्याशियों की पार्टी बदल चुकी है| भाजपा की पिछली प्रत्याशी पद्मा शुक्ला को कांग्रेस ने उतारा है। यहां कई चेहरे कांग्रेस के पास थे, लेकिन उनके कमजोर होने के कारण भाजपा प्रत्याशी व राज्यमंत्री संजय पाठक के सामने पद्मा को उतारा है। पिछले चुनाव में संजय कांग्रेस में थे, तब पद्मा भाजपा प्रत्याशी होकर केवल 929 की हारी थी। इस बार दोनों प्रत्याशी पार्टी बदलकर आमने-सामने हैं।

होशंगाबाद : प्रदेश की राजनीती में उबाल लाने वाले पूर्व मंत्री सरताज सिंह को कांग्रेस ने होशंगाबाद से उतारा है|  यहां विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा भाजपा से विधायक हैं। इस सीट पर पिछली बार रवि जायसवाल कांग्रेस से हारे थे। सरताज को मजबूत चेहरा मानकर यहां के बाकी स्थानीय कांग्रेस चेहरे दरकिनार कर दिए गए। अंतिम समय में यह फैसला हुआ और सरताज जो कभी भाजपा के थे अब कांग्रेस से मैदान में हैं और विधानसभा अध्यक्ष को चुनौती दे रहे हैं, यहां दो नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग हो गई है| 


भाजपा में भी बाहरी पर भरोसा 

भाजपा ने कांग्रेस की बजाए अपने चेहरों पर ज्यादा भरोसा किया है। लेकिन कई सीटों पर बाहरी नेताओं पर भरोसा जताया है| मुख्यत: तीन निर्दलीय विधायकों को सीधे तौर पर अपनी पार्टी से मैदान में उतारा है। इसमें सीहोर से सुदेश राय पिछली बार कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय तौर पर विधायक बने थे। यहां से भाजपा से ऊषा सक्सेना पिछली बार हारी थीं। वहीं, सिवनी से निर्दलीय विधायक दिनेश राय मुनमुन पहले से भाजपा के प्रति झुकाव रखते थे। सिवनी में भाजपा से पिछली बार नरेश दिवाकर लड़े थे। इसके अलावा थांदला से निर्दलीय विधायक कल सिंह भाबर को उतारा है, जहां पिछली बार भाजपा प्रत्याशी गौरेसिंह वसुनिया तीसरे नंबर पर आए थे। कल सिंह भाजपा से नाराज होकर निर्दलीय होकर लड़े थे। इसके अलावा आलोट सीट पर कांग्रेस से आए अजीत बौरासी को टिकट दिया गया है, वह कांग्रेस के बड़े नेता रहे प्रेमचंद गुड्डू के बेटे हैं, चुनावी समय में गुड्डू ने भाजपा का दामन थाम लिया और गुड्डू के बेटे को टिकट मिल गया। इसके लिए अपने घोषित प्रत्याशी का टिकट भी रद्द किया गया। इसके अलावा चंदेरी सीट पर कांग्रेस से भाजपा में आए भूपेंद्र द्विवेदी को उतारा है। यहां पिछली बार राव राजुकार यादव भाजपा प्रत्याशी थे, जिन पर इस बार पार्टी ने भरोसा नहीं किया। सिंधिया के प्रभाव वाले क्षेत्र अशोकनगर में बीजेपी ने कांग्रेस से आये नेताओं को टिकट देकर सिंधिया के वोटबैंक को तोड़ने की कोशिश की है| पिछले दिनों अशोक नगर जिले में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए 15 ईसागढ़ सदस्यीय नगर परिषद के अध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी समेत कुल 11 कांग्रेस पार्षद बीजेपी में शामिल हुए थे, इसी के साथ पूरे नगर परिषद से कांग्रेस का सफाया हो गया| इसके बाद बीजेपी ने भूपेंद्र द्विवेदी को प्रत्याशी घोषित कर दिया| हालांकि अन्य दलों के नेताओं को टिकट मिलने से पार्टियों में अंदरखाने विरोध भी जमकर हो रहा है| लेकिन बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही दलों ने अन्य दलों से आये मजबूत चेहरों पर भरोसा जताया है और उन्हें मैदान में उतारा है| 

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