MP : ऐन मौके पर इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने बदला प्रत्याशी, बढ़ सकती है भाजपा की मुश्किलें

भोपाल/विदिशा।

विधानसभा चुनाव में अब कम ही वक्त बचा है। दोनों दलों भाजपा-कांग्रेस ने 230  सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है और बड़े ही दमखम से मैदान में उतरने को तैयार है। आज नामांकन के आखिरी दिन दोनों दलों के बड़े नेता अपना-अपना नामांकन फॉर्म भरेंगें। ऐसे में ऐन मौके पर कांग्रेस ने एक सीट से अपना प्रत्याशी बदल दिया है। कांग्रेस ने विदिशा की सिरोंज विधानसभा सीट से  मसर्रत शाहिद को चुनाव लड़ाने की घोषणा की है, इसके पहले कांग्रेस ने अशोक त्यागी को मैदान में उतारा था। मसर्रत आज अपना नामांकन भरेंंगी।

      दरअसल, कांग्रेस ने तीन दिन पहले जारी सूची में पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष अशोक त्यागी को प्रत्याशी बनाया था। उनके नाम की घोषणा होते ही नगर कांग्रेस और ब्लाक कांग्रेस के नेताओ ने खुलकर विरोध जताया था। क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल पहुंचकर वरिष्ठ नेताओं से टिकट बदलने की मांग की थी।इसी के चलते कांग्रेस ने प्रत्याशी बदलते हुए मसर्रत शाहिद को उम्मीदवार बनाया। मसर्रत इसके पूर्व भी 2003 में इस क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं। जिसमें उन्हें पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से शिकस्त मिली थी। 

   मसर्रत शाहिद ने 1982 में कांग्रेस संगठन से जुड़ कर राजनीति सफर की शुरूआत की थी। वे महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष, दिग्विजयसिंह सिंह सरकार में महिला वित्त एवं विकास निगम की अध्यक्ष, बैंक आफ बड़ौदा की डायरेक्टर एवं मनमोहनसिंह सरकार में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।  मसर्रत शाहिद पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की समर्थक मानी जाती है। वही दूसरी तरफ भाजपा ने सिरोंज विधानसभा की सीट पर पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है।  लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापमं घोटाले के आरोप में लंबे समय तक जेल में रहे हैं।  पार्टी ने इस कारण उन्हें टिकट नहीं दिया। सिरोंज, विदिशा जिले में आता है, यह जिला मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत प्रभाव वाला क्षेत्र है।ऐसे में लक्ष्मीकांत शर्मा के परिवार से बाहर किसी को टिकट देकर पार्टी रिस्क नहीं लेना चाहती थी, इसलिए भाई उमाकांत शर्मा को मैदान मे उतारा है, इस बार मुकाबला रोचक होने वाला है, क्योंकि इस बार मसर्रत के सामने लक्ष्मीकांत के भाई उमाकांत है। अब देखना होगा कि क्या उमाकांत अपने भाई की तरह मसर्रत को मात दे पाते है या नही।

हमेशा चर्चा में रही है यह सीट

पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के कारण एमपी की सिरोंज विधानसभा सीट बहुत ही खास मानी जाती है।यहां एससी-एसटी वर्ग के वोटरों की तादाद करीब 43 फीसदी है, वहीं 38 फीसदी ओबीसी औऱ 17 फीसदी मुस्लिम वोटर्स है। इस सीट पर 1990 से 2013 तक बीजेपी का कब्जा रहा। 1980 में पहली बार बीजेपी ने इस सीट पर जीत हासिल की थी,  1993 से सिरोंज विधानसभा क्षेत्र से लक्ष्मीकांत शर्मा लगातार चुनाव जीत रहे थे।  इससे पहले 1990 में बीजेपी के ही भवानीसिंह ने जीत हासिल की थी।2013 के चुनाव में गोवर्धन ने बीजेपी के लक्ष्मीकांत को 1584 वोटों से हराया था, वहीं 2008 के चुनाव में बीजेपी के लक्ष्मीकांत शर्मा ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के बुंडेल सिंह यादव को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।