लोकसभा चुनाव से पहले इस बागी नेता की कांग्रेस में वापसी, BJP में हलचल

भोपाल।

लोकसभा चुनाव से पहले कांंग्रेस को बड़ी राहत मिली है।विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट ना मिलने से कांग्रेस के बागी और पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा लोकसभा चुनाव से पहले घर वापसी हो गई है। जेवियर मेड़ा ने खुद इस बात का ऐलान किया है कि वे अब कांग्रेस के साथ हैं और लोकसभा चुनाव में पार्टी को जिताने के लिए काम करेंगे। दिल्ली में आलाकमान के साथ हुई बैठक के बाद जेवियर मेड़ा ने यह ऐलान किया है। जेवियर ने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की मुश्किलें बढा दी थी।वह झाबुआ से निर्दलीय होकर पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़े थे जिसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा जीत गई।हालांकि जेवियर की लोस चुनाव में भी रतलाम-झाबुआ सीट पर मुश्किलें बढ़ाने की तैयारी थी, लेकिन इसके पहले ही पार्टी नेताओं ने उन्हें मना लिया और वापसी हो गई।वही जेवियर की वापसी से बीजेपी मे ंहलचल बढ़ गई है।

           दरअसल, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर जेवियर मेड़ा बागी हो गए थे और उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना शुरु कर दिया था। यहां तक की वे सोनिया-राहुल गांधी से भी मिलने दिल्ली पहुंचे थे।इसके बाद पार्टी ने उन्हें पेटलावाद विधानसभा से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने निर्दलिय खडे होकर कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया के खिलाफ चुनाव लड़ा   जेवियर ने कांग्रेस के करीब 35 हजार वोट काटे थे और झाबूआ सीट से विक्रांत भूरिया को 10 हजार से ज्यादा वोट से हार झेलनी पड़ी थी। नतीज झाबुआ सीट भाजपा के खाते में चली गई। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांतिलाल भूरिया के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया था और परिवारवाद, भू-माफिया जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें निष्काषित कर दिया था।

   इसके बाद जेवियर ने लोकसभा चुनाव में भी ताल ठोक दी थी।जेवियर फिर से बागी चुनाव लडऩे की घोषणा कर चुके थे और ऐसी स्थिति में भूरिया से नाराज सारे कांग्रेसी फिर एकजुट होने लगे थे।  पार्टी को भी पता था कि जेवियर के रहते इस सीट पर इस बार भूरिया की  जीत मुश्किल है।पार्टी ने उन्हें मनाना शुरु कर दिया और वे मान गए और लोकसभा चुनाव से पहले ही उनकी घर वापसी करवा ली।इससे सबसे बड़ी राहत वर्तमान रतलाम-झाबुआ सांसद कांतिलाल भूरिया को मिली है।चुंकी कांग्रेस फिर से उन्हें यह से सीट देने का मन बना चुकी है, वही बीजेपी भूरिया के खिलाफ दमदाम नेता उतारने की तलाश में जुटी हुई है।जेवियर मेड़ा के कांग्रेस के साथ जाने के ऐलान के बाद कांग्रेस में जहां खुशी की लहर है तो वहीं भाजपा के लिए एक बार फिर चुनौती बढ़ गई है।क्योंकि बीजेपी को लग रहा था कि जेवियर की बगावत एक बार फिर भाजपा को फायदा पहुंचा सकती है, लेकिन ऐसा नही हो सका।


कमलनाथ ने कहा था-हर हाल में बागियों को मनाए

एक दिन पहले ही लोकसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में कमलनाथ ने सभी पदाधिकारियों को जी जान से जुटने और हर हाल में विधानसभा चुनाव के दौरान मुश्किलें बढ़ाने वाले बागियों को मनाने को कहा था। कमलनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा था कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 150 सीटें मिलने की पूरी उम्मीद थी। किंतु पार्टी से टिकट न मिलने से बागी होकर चुनाव लड़े प्रत्याशियों ने कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया जिससे चुनाव नतीजों में कांग्रेस 114 सीटों पर सिमट कर रह गई। पार्टी के सर्वे में यह बात सामने आई कि उसे बागियों की वजह से करीब 40 सीटों पर नुकसान हुआ और जिससे पार्टी के प्रत्याशी जीत नहीं पाए। लोकसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए विधानसभा चुनाव बागी होकर लड़े लोगों को मनाएं। बसपा, सपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी या अन्य कांग्रेस की विचारधारा से मेलजोल रखने वाले लोगों को पार्टी में शामिल कराएं। इस बार कोई लापरवाही नही होनी चाहिए। 


मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं और राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए ही कांग्रेस के साथ काम करने के लिए तैयार हूं। अब लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के समर्थन में प्रचार करुंगा।

जेवियर मेड़ा, पूर्व विधायक, कांग्रेस


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