संविदाकर्मियों की हड़ताल 22वें दिन भी जारी, मानव श्रृंखला बनाकर दिया एकता का परिचय

भोपाल। 

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन आज सोमवार को 22वें दिन भी जारी है। कर्मचारी रोज नए नए तरीकों से प्रदर्शन करने में लगे हुए है। इसी कड़ी में आज सोमवार को कर्मचारियों ने जे.पी अस्पताल में मानव श्रृंखला बनाकर एकता का परिचय दिया और जमकर नारेबाजी की।इसके साथ ही शिवराज सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने आदेश दिए है कि संविदाकर्मियों को 10 वर्ष की सेवा के बाद समान काम, समान वेतन और नियमितकरण किया जाए, लेकिन न्यायालय के आदेश क बावजूद शिवराज सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं कर रही है। अगर सरकार ने हमारी मांगे नही मानी तो 15 मार्च से उग्र आंदोलन करेंगे।

वही शनिवार को पल्स पोलियो अभियान के द्वितीय चरण की शुरुआत हुई है। हड़ताल के चलते पहले दिन इस अभियान पर काफी बड़ा असर पड़ा। दवा पिलाने के लिए कर्मचारियों को खड़ा किया गया है। वही कर्मचारियों के खड़े होने पर संविदाकर्मियों ने आपत्ति जताई है । साथ ही  व्हीलचेयर पर बैठकर खुद को अपाहिज बताया और शिवराज सरकार पर जमकर निशाना साधा।

ये है मांगे

नियमितिकरण के साथ ही अप्रेजल प्रक्रिया बंद करने और पूर्व में निष्कासित संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर  अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खाली पदों पर संविलियन करने की मांग की है। 

आश्वासन पर भी नही माने

हड़ताल के चलते 10 मार्च को कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। इसमें संविदा कर्मचारी,अतिथि शिक्षक संघ, निगम मंडल संघ की मांग को लेकर बातचीत की गई।बैठक में सीएम ने वाजिब मांगो को समय में पूरा करने आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद आज 11  मार्च को संविदाकर्मियों की हड़ताल जारी है।

अल्टीमेटम का कोई असर नही

हड़ताल के चलते पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है।जिसके चलते नेशनल हेल्थ मिशन ने कर्मचारियों को शुक्रवार को अल्टीमेटम दिया था। एनएचएम द्वारा कहा गया था कि अगर 12 मार्च तक काम पर नहीं लौटे तो कर्मचारियों के अनुबंध खत्म कर सेवाएं समाप्त कर दिया जाएगा। ।इसके पहले भी एनएचएम ने कर्मचारियों को चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों ने हड़ताल को जारी रखी। जिसका असर पूरे प्रदेश पर पड़ रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा रहा है असर

हड़ताल के कारण पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है। शासकीय अस्पतालों में इन दिनों टीबी विभाग के दवा वितरण, मलेरिया विभाग, कुपोषण केंद्र, गंभीर चिकित्सा एसएनसीयू इकाई, आरसीएच शाखा, आरबीएसके , निशुल्क दवा वितरण ,टीकाकरण जैसी योजनाएं पूरी तरह ठप हो गई है। इसके साथ ही हड़ताल के चलते गुरुवार को महिला दिवस के अवसर पर शुरू होने वाले महिला स्वास्थ्य शिविर की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। जिसके कारण प्रदेश भर में लाखों महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हो सका। इसीकारण शुक्रवार को लेकर स्वास्थ विभाग और और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने कर्मचारियों को नोटिस जारी कर आंदोलनरत कर्मचारियो को 12 मार्च तक काम पर लौटने को कहा है।विभाग ने कहा है कि इमरजेंसी सेवाओं पर वापस न आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जाएंगी।लेकिन इस चेतावनी के बावजूद आज शनिवार को भी कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल जारी रखी है।

कर्मचारियों का आरोप

कर्मचारियों का आरोप है कि संविदा कर्मचारी अधिकारी विभिन्न विभागों में करीब 15-20 साल से कार्यरत हैं और अपने नियमितीकरण एवं समान कार्य, समान वेतन की मांग को लेकर कई बार आंदोलन कर चुके हैं। शासन द्वारा आश्वासन दिया जाकर कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई है। संविदा कर्मचारी अपने आप को शोषित और ठगा सा महसूस कर रहे हैं, जबकि शासन ने बगैर कोई परीक्षा दिए भर्ती किए गए संविदा गुरुजियों एवं शिक्षाकर्मियों को नियमित कर दिया है।हमारी मांग है कि सभी सविंदा कर्मचारियों को एनएचएम, अन्य परियोजनाओं, स्वास्थ्य में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, संविलियन किया जाए एवं सेवा से निष्कासित कर्मचारियों की बहाली की जाए। जब तक मांग पूरी नहीं होगी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल से वापस नहीं आएंगे। 


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