सियासत : शिव के प्यारे, अब कमलनाथ के दुलारे

भोपाल

कांग्रेस के सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज के शासनकाल में रहे कई अफसरों के तबादले कर दिए।लेकिन कईयों को अपनी सरकार में ना सिर्फ जगह दी बल्कि अच्छे पदों पर भी नियुक्त किया।कमलनाथ ने जहां बीपी सिंह को चुनाव आयुक्त और कई अधिकारियों को अन्य कमान सौंपी गई वही शिवराज के साथ ओएसडी बनकर काम करने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी एसएन रूपला को भू संपदा अपीलीय प्राधिकरण (रेरा) का रजिस्ट्रार नियुक्त किया है। जिसको लेकर अब सवाल उठने लगे है। इसको लेकर कांग्रेस के साथ साथ प्रशासनिक क्षेत्र में भी घमासान मचा हुआ है। 

दरअसल, रुपला शिवराज शासनकाल में पूरे समय फील्ड पर पदस्थ रहे। रिटायरमेंट के बाद उनके साथ ही काम कर रहे थे। बीते साल उनके चुनाव लड़ने की भी अटकले तेज थी।लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते उन्होंने चुनाव नही लड़ा।रुपला भाजपा शासन काल के दौरान कई जिलों के कलेक्टर रहने के साथ सागर और सेवानिवृत्ति तक ग्वालियर जैसे महत्वपूर्ण संभाग में कमिश्नर भी रहे।अब उन्हें कमलनाथ सरकार ने भू संपदा अपीलीय प्राधिकरण (रेरा) का रजिस्ट्रार नियुक्त किया है।  हालांकि यह पहला मौका नहीं जब शिवराज सरकार में प्राइम पोस्टों पर रह चुके अधिकारियों को कमलनाथ सरकार ने जगह दी  हो। प्रशासनिक इतिहास में शायद पहली बार मुख्यमंत्री का सचिव वही है जो पूर्व मुख्यमंत्री का था। सतीश मिश्रा को भी तीसरी बार संविदा नियुक्ति दी गई है। शिवराज सरकार में वर्षों मलाईदार पदों पर रहे आईएएस अधिकारी भी कमोबेश उन्हीं पदों पर कायम है।

प्रशासकीय क्षेत्र और सियासी गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा है कि यह जो व्यक्ति शिवराज के व्यक्तिगत स्टॉफ में था और जिसने चुनाव के समय शिवराज के ओएसडी की संविदा नियुक्ति से इस्तीफा देकर, पूरे चुनाव के दौरे में उनके साथ साए की तरह लगा रहा, वहीं रूपला अब कांग्रेस शासन में एंटोनी डिसा की मेहरबानी से रेरा जैसी महत्वपूर्ण संस्था में महत्वपूर्ण पद पर काबिज हो गया। ऐसे मे सवाल उठना शुरु हो गए है कि क्या रुपला की नियुक्ति सीएम कमलनाथ की सहमति से रेरा के चेयरमैन  एंटोनी डिसा ने की है? डिसा की कृपा से रेरा में रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पद पर कैसे नियुक्त किया गया ? इसके पीछे क्या वजह रही? क्यो किसी अन्य को मौका नही दिया गया? अब देखना दिलचस्प होगा कि यह नियुक्ति बरकरार रहती है या इसमें कुछ बदलाव किया जाता है।

आदेश पर भी बवाल

इसके साथ ही पूर्व आईएएस अधिकारी एसएन रूपला के भू संपदा अपीलीय प्राधिकरण (रेरा) का रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने के आदेश पर भी बवाल मचा हुआ है। आदेश में यह लिखा हुआ है कि वे तब  तक इस पद पर बने रहेंगे जब तक सरकार अलग से कोई आदेश जारी कर उन्हें सेवा से पृथक नहीं करती । उनकी संविदा नियुक्ति में यह भी लिखा है कि उनके कार्य से संतुष्ट होने के बाद उनकी सेवा आगे भी बढ़ाई जाती रहेगी। इसके लिए प्रथक से आदेश जारी करने की कोई जरूरत नहीं होगी ।आदेश में यह भी उल्लेख है कि रेरा के रजिस्ट्रार के रूप में उन्हें ₹85 हजार का मासिक वेतन मिलेगा ।उन्हें शासकीय सेवा काल के समय खासकर सेवानिवृत्ति के समय जिस तरह की सुविधाएं उनके पास थी, वह सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी। आवास और वाहन की पात्रता भी रहेगी । उन्हें शासकीय सेवक व अन्य सेवा नियमों की तरह पात्रता भी होगी। 


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