तन्खा के समर्थन में उतरे कमलनाथ के मंत्री, बोले-अवैध उत्खनन रोकने में सरकार हुई असफल

भिंड। गणेश भारद्वाज।

अवैध उत्खनन को लेकर बीजेपी को घेरने वाली कमलनाथ सरकार अब अपनों से ही घिरती जा रही है। अब कमलनाथ सरकार में  सामान्य प्रशासन एवं सहकारिता मंत्री डॉ गोविंद सिंह राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा के बयान का समर्थन किया है। मंत्री ने माना है कि उनकी सरकार प्रदेश में अवैध उत्खनन को रोकने में असफल हुई है।इससे पहले तन्खा ने खदानों को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस में खलबली मच गई है।अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले दिनों नेताओं की ये बयानबाजी सरकार पर भारी पड़ सकती है।

आज मीडिया से चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि विवेक तन्खा का ट्वीट सही है। प्रदेश में व्यापक पैमाने पर रेत और गिट्टी का अवैध उत्खनन हो रहा है । अकेले भिंड-दतिया में 05 से 10 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है।साथ ही उन्होंने माना कि उनकी सरकार अवैध उत्खनन को रोकने में असफल हुई। मंत्री ने कहा कि हम अवैध उत्खनन को रोकने में असफल हुए है। अब मुख्यमंत्री कमलनाथ से करूंगा बात जिससे कि अवैध उत्खनन पर लगाम लगे। बड़ी खदानों की नीलामी हो और छोटी खदानों को लीज पर दिया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को  लाभ मिले।उन्होंने कहा कि दूध और मावा पर की गई कार्रवाईयों की तरह अब अवैध उत्खनन पर भी कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों की मानें तो प्रदेश में हो रहे व्यापक पैमाने पर अवैध उत्खनन को रोकने के लिए डॉक्टर गोविंद सिंह ने एक गोपनीय पत्र भी मुख्यमंत्री के नाम लिखा है।

आपको बता दे कि आज सुबह विवेक तन्खा ने ट्वीट के माध्यम से कमलनाथ सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। तन्खा ने कहा था कि आवेदन के माध्यम से गिट्टी क्रेशर की खदानें सरकार देना चाहती है जबकी हाईकोर्ट ने नीलामी करके खदाने देने के आदेश दिए है । तन्खा ने सरकार को खदान संचालन में पारदर्शिता से काम करने की बात कही ।साथ ही आरोप लगाते हुए कहा कि 80% गिट्टी खदाने तो राजनेताओं के कब्जे में है।खास बात ये है कि उन्होंने ये ट्वीट सीएम कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय को भी टैंग किया है। विवेक तन्खा ने ट्वीट कर लिखा है कि खदानो के संचालन में पारदर्शिता की आवश्यकता है। 80 प्रतिशत गिट्टी खदानो का धंधा राजनेताओं के गिरफ्त में है।। रॉयल्टी की चोरी एक आम बात है। जिस प्रकार गत 15 वर्षों में नर्मदा एवम् अन्य  नदियों का दोहन हुआ यह सार्वजनिक शर्मिंदगी का प्रतीक है।


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