17 सीटों पर सिंगल नाम तय, सिंधिया की सीट पर संशय, राहुल करेंगे अंतिम फैसला

भोपाल।

सर्वे के बाद शुक्रवार को दिल्ली में बुलाई गई स्क्रीनिंग कमेटी की की बैठक में 29  में से 17  सीटों पर सिंगल नाम तय कर लिए गए है। शेष रह गई 8 सीटों के बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इनके बारे में निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से चर्चा के बाद होगा।वहीं, केंद्रीय चुनाव समिति में अभी मध्यप्रदेश की सीटों पर चर्चा की शुरुआत नहीं हो सकी है। उधर, दिल्ली में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं मनमोहन सिंह बट्टी व गुलजार सिंह मरकाम की मुख्यमंत्री कमलनाथ से शुक्रवार को मुलाकात हुई जिसमें उन्होंने शहडोल और मंडला सीटों की मांग रखी। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में चर्चा के बाद प्रत्याशियों की पहली सूची कभी भी जारी की जा सकती है।

 दरअसल, सर्वे रिपोर्ट ने कांग्रेस को चिंता में डाल दिया है। रिपोर्ट में गुना, सतना और ग्वालियर सीटों पर समीकरण बदले है, इसी के चलते शुक्रवार को फिर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई और फिर से सीटों पर मंथन किया गया। बैठक में सिंधिया, कमलनाथ, दीपक बावरिया और दिग्विजय भी मौजूद रहे। सर्वे के बाद के  सिंधिया के गुना से और दिग्विजय के राजगढ़ से लड़ने पर नाम पर सहमति नही बन पाई। चुंकी सर्वे रिपोर्ट में गुना की परिस्थितियां अनुकूल नहीं बताई गईं। अभी तक सिंधिया और उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने गुना संसदीय क्षेत्र में फोकस कर रखा था। संभावना जताई जा रही है कि राहुल गांधी से चर्चा के बाद सिंधिया को ग्वालियर और प्रियदर्शनी को गुना से उतरा जा सकता है। वही दिग्विजय सिंह को राजगढ़ की जगह भोपाल से चुनाव लडऩे को कहा गया है।चुंकी अभी तक पार्टी को भोपाल से कोई जिताऊ उम्मीदवार नही मिल पाया है। हालांकि केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा प्रत्याशी तय किए जाने तक फेरबदल की गुंजाइश रखी गई है। 

बड़े नेताओं के बीच जारी रही खींचतान

समीकरण बदलने के कारण रीवा से दिवंगत नेता सुंदरलाल तिवारी के पुत्र सिद्धार्थराज को टिकट देने पर सहमति बन रही है। बैठक में करीब एक दर्जन सीटों पर कमलनाथ और दिग्विजय के बीच खींचतान की भी खबरे रही। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह स्वयं के लिए राजगढ़ की सुरक्षित सीट चाहते हैं, जबकि मुख्यमंत्री उन्हें भोपाल से चुनाव लड़ाना चाहते हैं। दिग्विजय भोपाल के बजाए इंदौर को पसंदीदा सीट मानते हैं। होशंगाबाद सीट के लिए मुख्यमंत्री की पसंद शैलेंद्र दीवान हैं, जबकि सिंह की ओर से रामेश्वर नीखरा का नाम है। इस सीट से सुरेश पचौरी भी जोर आजमाइश में लगे हैं। विदिशा से दिग्विजय, राजकुमार पटेल को चाहते हैं, वहीं, कमलनाथ की इच्छा शैलेंद्र पटेल को लड़ाने की है। ऐसी ही कुछ स्थिति जबलपुर में है, जहां नाथ की ओर से विश्वमोहन दास का नाम है, जबकि दूसरे गुट की ओर से अन्नू जगत सिंह और प्रेम दुबे के नाम सामने आ रहे हैं। वही सर्वे के बाद माना जा रहा है कि अजय सिंह को पार्टी अब सीधी से चुनाव लड़वा सकती है। मुरैना सीट से बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक बलवीर सिंह दंडोतिया ने भी दावेदारी जताई है। मंदसौर सीट से मीनाक्षी नटराजन को पार्टी चुनाव लड़ाने के मूड में है, लेकिन वे इच्छुक नहीं है। 


जातिय समीकरण भी हावी

बताया जाता है कि बुंदेलखंड की खजुराहो सीट पर जातीय समीकरण को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। बुंदेलखंड में सागर और दमोह से ओबीसी प्रत्याशी बनाए जाने की स्थिति में खजुराहो से ब्राह्मण नेता को टिकट दिए जाने की चर्चा है।क्षेत्र में ठाकुर दो मंत्री गोविंद सिंह राजपूत व ब्रजेंद्र सिंह राठौर होने से पार्टी नेतृत्व के सामने दुविधा की स्थिति बनी हुई है। ब्राह्मण नेताओं में हारे प्रत्याशी मुकेश नायक नाराज दिखाई दे रहे हैं तो पीसीसी के पूर्व संगठन प्रभारी महामंत्री चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी हाईकमान को अपना पक्ष रख चुके हैं।बैतूल में लोकसभा चुनाव 2014 के हारे प्रत्याशी अजय शाह व रामू टेकाम के बीच कशमकश की स्थिति है। वहीं, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, विदिशा, मंदसौर में पार्टी को जीतने वाले प्रत्याशियों की तलाश है।

इनके नाम तय

छिदंवाड़ा से नकुलनाथ

रतलाम-झाबुआ से कांतिलाल भूरिया

मुरैना से रामनिवास रावत

भिंड से महेंद्र बौद्ध

सागर से प्रभूसिंह ठाकुर

टीकमगढ़ से संजय कसगर

दमोह से रामकृष्ण कुसमरिया

सतना से राजेंद्र सिंह

रीवा से सिद्धार्थ राज तिवारी

सीधी से अजय सिंह

मंडला से गुलाब सिंह

बालाघाट से विश्वेश्वर भगत

देवास से प्रहलाद टिपानिया

उज्जैन से नीतिश सिलावट

धार से गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी

खरगोन से प्रवीणा बच्चन

खंडवा से अरुण यादव 


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