बागी विधायकों को लेकर भाजपा मौन, वापसी की उम्मीद

भोपाल। विधानसभा में संशोधन विधेयक पर मत विभाजन के दौरान कमलनाथ सरकार को समर्थन देने वाले भाजपा के बागी विधायकों को लेकर पार्टी ने चुप्पी साध रखी है| इन विधायकों ने ऐसे समय कांग्रेस सरकार का समर्थन किया, जब भाजपा द्वारा सरकार गिराने की धमकी दी जा रही थी| लेकिन दांव उल्टा पड़ गया, मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस दांव से भाजपा की उम्मीदों पर पानी फिर गया| जिसके बाद अब बीजेपी फूंक फूंक कर कदम रख रही है, पार्टी की संभागीय स्तर पर समीक्षा बैठकों में भी विधायकों और अन्य नेताओं को साफतौर पर सरकार के भविष्य को लेकर बयानबाजी नहीं करने का निर्देश दिया जा रहा है।

 भाजपा के मैहर से विधायक नारायण त्रिपाठी और ब्योहारी से शरद कोल ने पार्टी लाइन से अलग जाकर कांग्रेस का समर्थन किया था। तब इस बात की चर्चा थी कि ये दोनों विधायक कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। दोनों ही विधायक विधानसभा में ही खुलकर मीडिया के सामने आकर कांग्रेस में जाने के संकेत दे रहे थे| लेकिन भविष्य की स्तिथि को देखते हुए दोनों ही पार्टियों ने जल्दबाजी नहीं की| भाजपा ने अनुशानहीनता तो माना, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करते हुए बार बार यह कहा कि दोनों विधायक उनके ही है और उनके ही रहेंगे| आर्टिकल 370 पर भी बागी विधायक के समर्थन देने के बाद पार्टी को उम्मीद जगी है, इसलिए फिलहाल पार्टी दोनों विधायकों पर कोई कार्रवाई करने के मूड में नहीं है|  साथ ही सारे नेताओं को भी चेता दिया है कि वे अब कमलनाथ सरकार को गिराने या अन्य किसी भी तरह का कोई बयान नहीं देंगे।

 लोकसभा चुनाव के बाद ही नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सबसे पहले फ्लोर टेस्ट की बात कही थी। इसके बाद ही कमलनाथ सरकार अलर्ट हो गई और उसने अपने सारे विधायकों की घेराबंदी कर ली। असर ये हुआ कि भाजपा लगातार बयानबाजी करती रही और कांग्रेस ने भाजपा के घर में ही सेंध लगा दी। हालाँकि इस घटनाक्रम के बाद भाजपा ने रणनीति बनाई, लेकिन भाजपा का रिएक्शन नहीं दिखा| अब पार्टी ने सभी नेताओं को इस मामले में संभलकर बोलने को कहा, मतलब साफ़ है भाजपा पूरी कोशिश में है बागी विधायकों की वापसी कराई जाए| वहीं सदस्यता अभियान के माध्यम से सभी विधायकों पर नजर रखी जा रही है|  दोनों ही विधायक न तो बीजेपी के कार्यक्रमों में नजर आ रहे और न ही कांग्रेस के साथ दिखाई दे रहे हैं| 

कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाले बीजेपी के दो बागी विधायकों का कांग्रेस में अंदरखाने विरोध शुरू हो गया है, जिन इलाकों से ये विधायक चुनाव जीतकर आए हैं, वहीं के नेता और कार्यकर्ता इनके खिलाफ लामबंद हो गए हैं।   इन विधायकों को 'आदतन दलबदलू" करार दिया जा रहा है।लोगों को याद दिलाया जा रहा है कि ये आठवीं बार है कि नारायण त्रिपाठी ने पाला बदला है। 2014 के लोकसभा चुनाव से मात्र दो दिन पहले वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। यही कारण है कि भाजपा ने दोनों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का मन बनाया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो हालात देखकर धीरे-धीरे वे ही कांग्रेस से दूर होने लगे हैं। 

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