सरकार...'कैसे-कैसे कलेक्टर'

छतरपुर।  जिले में न्याय के लिए खुलीं तमाम संस्थाएं कितनी असंवेदनशील हो चुकी हैं इसका नजारा मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान देखने को मिला। एक किसान पिछले 15 वर्षों से अपनी ही जमीन पर काबिज नहीं हो पा रहा है। तहसील न्यायालय के आदेश के बाद भी दबंगों के कब्जे में फंसी उसकी जमीन को जब पुलिस खाली नहीं करा पायी तो यह किसान कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा। दिव्यांग किसान शंकर पटेल निवासी देवगांव थाना बमीठा ने जब कलेक्टर को जनसुनवाई में शिकायती पत्र देकर यह लिख दिया कि यदि उसकी जमीन नहीं मिली तो उसका पूरा परिवार आत्महत्या कर लेगा। सी पर कलेक्टर मोहित बुंदस भड़क गए और उन्होंने किसान को ही मानसिक रोगी समझकर उसे जिला अस्पताल भेज दिया।

विकलांग गरीब किसान शंकर पटेल कलेक्टर छतरपुर को रोते हुए फरियाद सुनाने गया था। उसकी कृषि भूमि पर कुछ लोग बेजा कब्जा करने की फिराक में थे । उसके पक्ष में तहसीलदार के आदेश का परिपालन कराने में बमीठा पुलिस कई माह से हीलाहवाली कर रही थी और तहसीलदार भी कई बार की फरियाद के बावजूद अपने आदेश का पालन कराने में अक्षम साबित हो रहे थे । ऐसे में न्याय की आशा के साथ वह विकलांग किसान कलेक्टर मोहित बुंदस के दरबार में पहुंचा । लेकिन न्याय और संरक्षण देने की जगह कलेक्टर ने उसे अपने सितम की रुतबेगिरी का शिकार बना डाला और पुलिस बल की अभिरक्षा में उसको मानसिक रोगी (पागल ) साबित कराने जिला अस्पताल भिजवा दिया । 

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डाॅ. आर पी पाण्डे का कहना है कि किसान स्वस्थ है।मेेडीकल के उपरांत अपाहिज किसान को कोतवाली ले गई । जहां से उसे ग्वालियर मनोरोग चिकित्सालय भेजा जाना बताया गया। इस घटना से किसान का पूरा परिवार परेशान है। उसकी पत्नि लल्लाबाई पटेल ने बताया कि उसके पति पूरी तरह स्वस्थ हैं और न्याय के लिए भटक रहे हैं। प्रशासन उसे न्याय दिलाने की बजाय पागल घोषित करने पर तुला है और जबर्दस्ती उन्हें ग्वालियर इलाज के लिए भेजा जा रहा है। हमारे परिवार को इस तरह परेशान किया जा रहा है कि हम अब आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

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