बीजेपी के 70 विधायकों की टिकट पर संकट, डेंजर जोन में कई मंत्री

भोपाल। मध्य प्रदेश में चौथी बार सत्ता में आने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही भारतीय जनता पार्टी की राह आसान नजर नहीं आ रही| चुनावी मैदान में बीजेपी के मजबूत वोटबैंक को काटने के कांग्रेस सहित कई पार्टियां मैदान में हैं| वहीं मौजूदा विधायकों का विरोध भी पार्टी के लिए मुसीबत बना हुआ है| यही वजह है कि पार्टी अब तक प्रत्याशियों के ऐलान को लेकर कोई फैसला नहीं ले सकी| जबकि चुनाव में सिर्फ डेढ़ माह का भी वक्त नहीं है| आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने कई स्तर पर टिकट के लिए चुनावी सर्वे कराया है|  मुख्यमंत्री स्तर से हुए सर्वे की रिपोर्ट तैयार है, वहीं प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने जमीनी नेताओं से फीडबैक लेकर सभी विधानसभा सीटों से टिकट के दावेदारों की लिस्ट तैयार की है। इसी के आधार पर टिकटों का चयन होगा। उनके पास हर विधानसभा क्षेत्र से 2 से 3 दावेदारों की कुंडली है। सूत्रों के मुताबिक दोनों ही रिपोर्टों में 60 से 70 विधायकों पर संकट मंडरा रहा है, वहीं आठ मंत्रियों का विरोध है, जिसको लेकर पार्टी इनके टिकट काट सकती है या किसी और सीट से चुनाव लड़ा सकती है| सूत्रों के मुताबिक पार्टी के संकेत के बाद इनमे से कुछ विधायक और मंत्री अन्य सीटों पर सक्रीय भी हो गए हैं| 

टिकट को लेकर बीजेपी में संगठन स्तर पर मंथन जारी है, सभी सर्वे रिपोर्टों और राकेश सिंह के फीडबैक के बाद टिकट पर फैसला होगा|  अमित शाह के 14-15 अक्टूबर को प्रस्तावित भोपाल-जबलपुर संभाग के दौरे के बाद पार्टी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान करेगी| संभावना है इस माह के अंत में ही प्रत्याशियों की घोषणा होगी| ऐसी स्तिथि में टिकट की घोषणा के बाद चुनाव के लिए प्रत्याशियों के पास सिर्फ दो या तीन हफ्ते ही होंगे| पार्टी की ओर से सक्षम उम्मीदवार को ही टिकट दी जाएगी, जो अपने स्तर पर ही सीट निकलने की ताकत रखता हो, ताकि पार्टी कमजोर स्तिथि वाली सीटों पर फोकस कर सके| रिपोर्टों में 60 से 70 विधायकों के लिए जमीनी हालत ठीक नहीं है, वहीं कुसुम मेहदेले, माया सिंह, हर्ष सिंह और डॉ. गौरीशंकर शेजवार समेत आठ मंत्रियों की रिपोर्ट भी निगेटिव है| 

दावेदारों की दौड़ से परेशान बीजेपी, दो चरणों में जारी होगी लिस्ट 

प्रत्याशी चयन का मामला बीजेपी के लिए मुश्किल भरा है, क्यूंकि एक सीट पर कई दावेदार सामने आ रहे हैं| जिनमे कई पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और कई बड़े नेता भी शामिल है| साथ ही अगर मौजूदा विधायक और मंत्री सीट बदलते हैं तो जिस सीट से चुनाव लड़ेंगे वहां के स्थानीय नेता और दावेदार विरोध कर सकते हैं|  यह भी बताया जा रहा है कि इस बार भाजपा दो चरणों में ही टिकट की सूची जारी करेगी। परिवारवाद के तहत बेटे-बेटी, पति-पत्नी, रिश्तेदार या अन्य किसी को टिकट देने से भी पार्टी बच रही है| भाजपा अंतिम फीडबैक के लिए 20 अक्टूबर से पहले हर जिले में दो-दो वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश पदाधिकारी व सांसदों को भेजेगी। इसमें अपना नाम छोड़कर दूसरों के नाम सादी पर्ची पर मांगे जाएंगे।


एजेंसी से ज्यादा सिंह की रिपोर्ट को मिलेगी तवज्जो

भाजपा ने कई स्तर पर चुनावी सर्वे कराया है। जिसमें मौजूदा विधायकों की जनता में पकड़, जीतने की संभावना से लेकर नए नेताओं की रिपोर्ट तक शामिल हैं। बताया गया कि मुख्यमंत्री ने भी अपने पर सर्वे कराया है। जिसका उन्होंने विधायक दल की पिछली बैठक में जिक्र भी किया था। बताया गया कि राकेश सिंह ने जो रिपोर्ट तैयार की है, वे उसे चुनाव समिति की बैठक में साथ लेकर बैठेंगे। इस बार टिकट चयन में एजेेंसी की सर्वे रिपोर्ट से ज्यादा राकेश सिंह की रिपोर्ट को तवज्जो दी जाएगी।


राकेश सिंह की 'डायरी' में हर नेता की कुंडली 

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने पिछले एक पखवाड़े के भीतर प्रदेश के सभी जिलों के जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, जिले के प्रदेश एवं राष्ट्रीय पदाधिकारी समेत अन्य नेताओं को अलग-अलग दिन चर्चा के लिए समय बुलाया। एक दिन में राकेश सिंह ने 5 से 6 जिलों के नेताओं से सामूहिक एवं वन-टू-वन चर्चा कर जमीनी फीडबैक लिया है। खास बात यह है कि राकेश सिंह ने हर नेता के सुझाव / खामी को नोट किया है। उन्होंने जिलों के नेताओं से मौजूद विधायकों का रिपोर्ट कार्ड एवं अगले चुनाव के लिए जीत के प्रवल दावेदारों के नाम भी मांगे। जिलों पदाधिकारियों से चर्चा का दौर खत्म हो गया है। जिलों से मिले फीडबैक के आधार पर राकेश सिंह ने हर विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिसमें पार्टी के मौजूदा विधायकों की परफार्मेंस रिपोर्ट भी है। 


70 विधायक और आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों पर खतरा 

अब तक हुए सर्वे और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की रिपोर्ट में लगभग 70 विधायकों की परफॉर्मेंस ठीक नहीं है| जिसके टिकट कट सकते हैं|  वहीं एक दर्जन मंत्रियों की स्तिथि भी ख़राब बताई जा रही है, हालांकि पार्टी के सख्त निर्देश के बाद कुछ मंत्रिओं ने चुनाव क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी थी, जिससे उनका ग्राफ बढ़ा है| जिनकी परफॉर्मेंस अभी भी ठीक नहीं है उनमे पशुपालन मंत्री अंतर सिंह आर्य, वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार, बालकृष्ण पाटीदार, कुसुम मेहदेले, राज्यमंत्री हर्ष सिंह, राज्यमंत्री सुरेंद्र पटवा, नगरीय विकास मंत्री माया सिंह, राज्यमंत्री सूर्य प्रकाश मीणा के नाम बताये जा रहे हैं| इनमे उम्र और स्वास्थ्य को लेकर कुछ मंत्री को इस बार पार्टी टिकट देने से बचना चाहती है| वहीं कुछ का अपने ही क्षेत्र में जबरदस्त विरोध है| 

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