कमलनाथ के बाद अब सिंधिया 'गुट' के मंत्रियों की 'डिनर डिप्लोमेसी', गर्माई सियासत

भोपाल।

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में बैठकों और डिनर पार्टी का दौरा तेजी से चल रहा है। हाल ही में सीएम कमलनाथ ने दिल्ली में कांग्रेस के बड़े नेताओं को डिनर पर बुलाया था। इससे पहले सिंधिया ने अपने गुट के  मंत्रियों के साथ दिल्ली में चर्चा की थी। दोनों बड़े नेताओं की इस बैठक के बाद सियासी सरगर्मियां तेज भी हो गई थी। माना जा रहा था मध्यप्रदेश में बड़ा फेरबदल होने वाला है, मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नही। अब बीती रात सिंधिया कैंप के मंत्री महेंद्रसिंह सिसोदिया के बंगले पर हुई डिनर पार्टी ने एक बार फिर सियासत को गर्मा दिया है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में मंत्रियों की अधिकारियों से नाराजगी खुलकर सामने आई। वही वे किसी भी हालत में इस्तीफा देने को तैयार नही है।

खबर है कि मंत्रिमंडल विस्तार और कुछ मौजूदा मंत्रियों के इस्तीफे लेने की खबरों के बीच बीती रात कमलनाथ कैबिनेट में सिंधिया गुट के मंत्री के बैठक हुई है। कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया के घर पर हुए डिनर पर स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट, राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और स्कूल शिक्षा मंत्री डाॅ. प्रभुराम चौधरी  शामिल हुए।इस बैठक में मंत्रियों ने अधिकारियों पर जमकर भड़ास निकाली और कहा कि उनके विभाग में जानबूझकर ऐसे अफसरों को पदस्थ किया गया है जो काम में अड़ंगा लगाते हैं।मंत्रियों का आरोप है कि नाथ और दिग्विजय सिंह समर्थक मंत्रियों को अगर दिक्कत होती है तो तत्काल उनके विभागों से प्रमुख सचिव बदल दिए जाते हैं, लेकिन जब उनकी बारी आती है तो हाथ पीछे खींच लिए जाते है।कहा जा रहा है कि कमलनाथ के पत्र के बाद सिंधिया समर्थकों में हड़कंप मचा हुआ है और वे इस्तीफा देने को तैयार नही है।हालांकि खुलकर कोई नही बोल रहा ।लेकिन सियासी गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है।

सु्त्रों की माने तो कमलनाथ के सोनिया गांधी को पत्र लिखने के बाद अंदरखानों में सियासी घमासान मचा हुआ है। सिंधिया गुट का कोई भी मंत्री अपना इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने अपने मंत्रियों को इस्तीफा देने की तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं है, वहीं दिग्विजय कोटे से कैबिनेट में शामिल मंत्रियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

मंत्रियों की विभाग के अधिकारियों से नाराजगी

श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया का कहना था कि उनके विभाग में अब तक तीन प्रमुख सचिव रहे जो काम को पेंडिंग रखते हैं। पहले संजय दुबे को पदस्थ किया गया, इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग से हटाकर प्रमोद अग्रवाल को श्रम विभाग में पदस्थ किया गया, उनसे मंत्री की पटरी नहीं बैठी। कुछ दिन पहले अशोक शाह को विभाग में पदस्थ किया गया है। शाह पहले भी जिन विभागों में रहे वहां मंत्रियों से उनका तालमेल नहीं रहा।वही इसी तरह का मामला नगरीय प्रशासन विभाग में सामने आया, जहां जयवर्द्धन सिंह को विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल से दिक्कत थी, उन्हें तत्काल हटा दिया गया और संजय दुबे को पदस्थ कर दिया गया। इसी तरह से सुरेंद्र सिंह ‘हनी’ बघेल को दिक्कत हुई तो प्रमुख सचिव को हटा दिया गया।

तुलसी सिलावट का कहना था कि विभाग की प्रमुख सचिव पल्लवी जैन गोविल अधिकांश समय छुट्टी पर ही रहती हैं, इससे काम पेंडिंग हो जाते हैं।खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी प्रमुख सचिव नीलम शमी राव के कामकाज के तरीके से नाराज हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी अपने विभाग में  ऑनलाइन ट्रांसफर की प्रक्रिया से नाराज है। वे चाहते हैं कि यह व्यवस्था ऑफलाइन हो।इसके लिए वे प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी को भी कई बार कह चुके है, लेकिन अब तक वही व्यवस्था चल रही है।।


क्या लिखा ने सीएम कमलनाथ ने सोनिया को पत्र में

बीते दिनों मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था । जिसमें कहा गया था कि प्रदेश के बड़े नेता (कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया) अपने कोटे से दो-दो मंत्रियों की संख्या कम कर दें तो 6 पद खाली हो जाएंगे। इनके एवज में निर्दलियों को मंत्री बना दिया जाए। इससे भाजपा द्वारा सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिशों पर रोक लगाई जा सकती है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यद्यपि प्रदेश में स्थिति नियंत्रण में है।जिसके बाद से ही कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है।


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