अशोक सिंह की नियुक्ति के बाद सिंधिया समर्थकों में हलचल, कुर्सी के लिए कर रहे जुगाड़

ग्वालियर। कमलनाथ सरकार ने पहली राजनैतिक नियुक्ति के रूप में ग्वालियर चम्बल संभाग से दिग्विजय सिंह कोटे के नेता अशोक सिंह को अपेक्स बैंक का प्रशासक बनाकर संकेत दे दिए हैं कि अब जल्दी ही निगम, मंडल और प्राधिकरणों के पद भर दिए जायेंगे। इस संकेत के बाद अब सिंधिया समर्थक नेता कुर्सी पाने के लिए जोड़ तोड़ में लग गए हैं। कुछ नेताओं ने तो सिंधिया की भोपाल में मौजूदगी के दौरान उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद देने की गुहार लगाई। 

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सिंधिया खेमे के उन नेताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं जो विधानसभा में दावेदारी दिखा रहे थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। अब वो फिर इस उम्मीद के साथ दिल्ली और भोपाल के चक्कर लगा रहे हैं कि उन्हें निगम , मंडल या प्राधिकरण की कुर्सी मिल जाएगी। इसमें कुछ वरिष्ठ कांग्रेसियों के नाम की राजधानी तक में चर्चा है। ये नाम है सुनील शर्मा, अशोक शर्मा, आनंद शर्मा, इन्द्रजीत सिंह चौहान,महाराज सिंह पटेल,अनिल पुनियानी,राम सुन्दर सिंह रामू,अशोक प्रेमी, रविन्द्र सिंह भदौरिया । 

सूत्रों की माने तो मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के लिये अपना टिकट छोड़ने वाले प्रदेश कांग्रेस महामंत्री सुनील शर्मा को भोपाल में किसी निगम का अध्यक्ष बनाया जा सकता है  इसके अलावा ग्वालियर विकास प्राधिकरण, ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण व साडा सहित अन्य निगम मंडल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर ताजपोशी की तैयारी है। अशोक शर्मा को संभवत मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पहले वे उपाध्यक्ष पद पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। ग्वालियर विकास प्राधिकरण के लिए आनंद शर्मा,महाराज सिंह पटेल और इन्द्रजीत सिंह चौहान के नाम की चर्चा है। सूत्रों की माने तो आनंद शर्मा को अध्यक्ष की कुर्सी  दी जाये और बाकी दो उपाध्यक्ष।  ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष के लिए पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कुमार  गंगवाल और भूपेन्द्र जैन के नाम भी चर्चा में चल रहे हैं । वहीं उपाध्यक्ष पद के लिये अनिल पुनियानी का  नाम तेजी से आगे बढ़ा है,वहीं रामसुन्दर सिंह रामू,अशोक प्रेमी,रविन्द्र सिंह भदौरिया के नाम भी चर्चा में आगे आये हैं। 

उधर पता चला है कि ग्वालियर विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष पद के लिये पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल व पूर्व अध्यक्ष रहे चन्द्रमोहन नागौरी के नामों की भी चर्चा है। हालांकि कुर्सी उसी को मिलेगी जिस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की सहमति के अलावा कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की सहमति जरुरी है। खास बात ये है कि इन पदों पर सिंधिया के अलावा दुसरे गुट के नेताओं की भी निगाहें लगी है और वे अपने अपने आकाओं से जुगाड़ लगा रहे हैं। अब देखना होगा कि किसके भाग्य में कौन सी कुर्सी लिखी है।

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