सरकार बनाने में खास है इनका रोल, भाजपा-कांग्रेस में घबराहट

भोपाल| मध्य प्रदेश में 15 साल से सत्ता में काबिज भाजपा और लम्बे समय से सत्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस के बीच कडा मुकाबला है| जनता की ख़ामोशी ने दोनों ही दलों की धड़कनें बढ़ा राखी हैं, वहीं सबसे ज्यादा घबराहट का विषयक नए मतदाता है, जिन्होंने पहली बार वोट किया| क्यूंकि दोनों ही दलों के पास इन मतदाताओं का अनुमान नहीं है| पहली बार वोट डालने वाले 12.66 लाख हजार 18-19 साल के युवा वोटर चेंजमेकर साबित हो सकते हैं। नए वोटर की सोच से भी बीजेपी और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्यूंकि नई पार्टी और चेहरा का भी प्रभाव युवा मतदाताओं पर पड़ता है, जो बदलाव का आधार बनता है|  

प्रदेश में लम्बे समय से एक ही सरकार और एक ही मुख्यमंत्री है, जिसे पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदाताओं ने देखा है| जबकि बीजेपी ने पूरे चुनाव में कांग्रेस और दिग्विजय काल की याद दिलाते हुए खुद को बेहतर बताया| लेकिन पहली बार वोट डालने वाले इन मतदाताओं ने वो समय ही नहीं देखा, इसलिए बीजेपी की यह रणनीति उन पर काम नहीं करेगी| वहीं कांग्रेस के वाडे भी इन मतदाताओं को किस तरह लुभाएगी, क्यूंकि युवाओं के लिए वर्तमान में कई योजनाएं हैं, जिनका लाभ यह युवा मतदाता ले रहे हैं| यही कन्फूसिओं दोनों ही दलों को है कि आखिर यह मतदाता किस ओर जाएंगे| हालाँकि बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है जिसके आधार पर यह मतदाता अपनी पसंद चुन सकते हैं| दोनों ही पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में युवाओं के लिए ख़ास वादे किये हैं|   


दोनों ही पार्टियों ने की साधने की कोशिश 

प्रदेश में 16 लाख तीन हजार नव मतदाता हैं। इन्हें साधने के लिए भाजपा ने खास रणनीति बनाई थी। चुनाव के ऐन समय पर नव मतदाता सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया था। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिरकत की थी। जबकि, कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआइ ने इन वोटरों के बीच खासी सक्रियता दिखाई थी। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी रोजगार के बहाने युवाओं को रिछाने की कोशिश की थी। उत्साह से भरे नव मतदाता ने प्रदेश की औसत वोटिंग 75.05 से आगे बढ़कर मतदान में हिस्सा लिया था, जिला निर्वाचन अधिकारियों से मिले आंकड़ों के मुताबिक करीब 79 फीसदी नव मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। 


क्यों अलग हैं यह मतदाता 

पहली बार वोट देने वाला मतदाता सबसे अलग है, क्यूंकि वह पढ़ा लिखा और अपने भविष्य पर फोकस करने वाला है| नए मतदाता अगले पांच साल तक इंतजार के मूड में भी कतई नहीं है। क्योंकि इसी वक्त या तो उसे उच्च शिक्षा में अपने लिए अवसर ढूंढऩा है या नौकरी करनी है। इसी उम्र में उसे अपना कॅरियर बनाना है। इसलिए उनके लिए सही सरकार को चुनना ख़ास है| प्रदेश में शिक्षा का स्तर और बेरोजगारी बड़ा और अहम् मुद्दा है क्यूंकि प्रदेश में 20 लाख से अधिक बेरोजगार हैं। रोजगार के लिए कॉल नहीं आने के कारण युवाओं ने पंजीयन कराना ही बंद कर दिया है। अगर अंपजीकृत युवाओं को जोड़ लें तो एक करोड़ से अधिक के पास कोई काम नहीं है। इन बेरोजगार युवाओं की भीड़ एक करोड़ 38 लाख 20 से 29 साल और एक करोड़ 29 लाख 30 से 39 साल के आयु समूह के मतदाताओं के बीच बंटी हुई है।

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