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व्यापारियों ने खोज लिया ई-वे बिल का जुगाड़...

लुधियाना| एक अप्रैल 2018 से देशभर में लागू किया किया जा चुका ईवे बिल अब देश के अलग अलग राज्यों में एक एक करके लागू किया जा रहा है। टैक्स वसूलने के लिए लाया गया नया सिस्टम व्यापारियों के लिए टेडी खीर बना हुआ है, जिससे बचने के लिए अब नई नई जुगाड़ की भी खोज की जा रही है|  पंजाब के व्यापारियों ने ईवे बिल के जवाब में नया तरीका इजात किया है| अचानक यहां के शहरों में घोड़ा गाड़ी, खच्चर और रेहड़ा खरीदी बढ़ गई है, व्यापारी बढ़ चढ़कर इन्हे खरीद रहे हैं, कोई इन्हे घोड़े पाल रहा है, तो किसी ने घोड़ा गाड़ियों का ठेका कर लिया है| 

दरअसल, आधुनिक जमाने में जल्द से जल्द माल पहुँचाने के लिए लोडिंग वाहन का उपयोग चलन में है, लेकिन अब तक जिन रेहड़ों को कोई पूछ नहीं रहा था, अचानक उनकी मांग बढ़ने लगी है। इसके पीछे का कारन है गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानि जीएसटी के तहत ई-वे बिल को लेकर जारी हुआ नया फरमान। नए नियम के लागू हो जाने के बाद 50,000 रुपए से ज्यादा के सामान को एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचाने के लिए अब व्यवसायों और ट्रांसपोर्ट्स के लिए ई-वे बिल जेनरेट करवाना जरूरी होगा। वहीं नियम में यह भी राहत दी गई है कि अगर माल की ढुलाई घोड़ा गाड़ी या रेहड़े से होती है तो इस पर ईवे बिल का फार्मूला लागू नहीं होगा। अब व्यापारी इससे बचने के लिए अपना करोड़ों का माल भी घोड़ा गाड़ी, खच्चर और रेहड़ों पर भेजने को तरजीह देने लगे हैं। ईवे बिल संबंधी एक नियम में साफ तौर पर लिखा गया है कि अगर कोई वस्तु गैर मोटर वाहन से ले जाई जा रही है तो ईवे बिल की जरूरत नहीं है। यही नियम अब व्यापारियों के लिए जुगाड़ बना रहा है, ईवे बिल से बचने के लिए व्यापारियों ने गैर मोटर वाहनों पर माल भेजना शुरू कर दिया है। ये गैर मोटर वाहन तांगा और रेहड़ा आदि हैं। 

ई-वे बिल से बचने के लिए उद्यमी नॉन मोटर व्हीकल वाहनों का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में कई तरह की समस्याएं भी खड़ी होंगी|  इस प्रक्रिया से बचने के लिए कई तरह की जुगाड़ लगाई जा रही है, इंटर सिटी भी इस जुगाड़ में शामिल है। अगर किसी कंपनी ने दूसरी कंपनी में मटीरियल भेजना है, तो इसके लिए भी ईवे बिल निकालना होगा। ऐसी पसोपेश में अब नॉन मोटर व्हीकल कांसेप्ट को उद्यमी अपनाने लगे हैं। लेकिन अब इससे शहर के कई भीतरी बाजारों में ट्रैफिक समस्या खड़ी हो सकती है, क्योंकि अब शहर के संकरी गलियों में तांगा और रेहड़ा की संख्या बढ़ जाएगी और इससे ट्रफिक जाम लगेगा। वहीं  घोड़ा और खच्चर पर भार ढोने के भी कई पैमाने हैं। जीका पालन करना होता है, अधिक माल ढोने में इसकी भी दिक्कत होगी| 

फिलहाल राज्य के कई शहरों में एकाएक घोड़ों की डिमांड बढ़ गई है। उधर, तांगों पर माल जाने से टेंपो चालकों की कमाई पर भी असर पडऩे लगा है। एक बार फिर तांगे वालों का कारोबार चल पड़ा है, वहीं सरकार ने टैक्स चोरी पर नकेल के लिए जीएसटी और ईवे बिल सिस्टम शुरू किया, लेकिन व्यापारियों की जुगाड़ से यह सिस्टम कितना काम करेगा यह तो समय ही बताएगा| व्यापारी भी कागजी औपचारिकता से घबरा रहा है इसलिए इस प्रक्रिया से बचने नए तरीके खोजे जा रहे हैं| 

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