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चुनावी साल में साधु-संतों ने फिर खोला शिवराज के खिलाफ मोर्चा, बढ़ सकती है मुश्किलें

भोपाल/छिंदवाड़ा।

राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने के बावजूद बाबाओं ने शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल है। अपनी एक सुत्रीय मांग को लेकर सभी साधु-संत एक जुट हो गए है। इसके लिए वे कांग्रेस के गढ़ छिंदवाड़ा में बैठकर रणनीति बनाने लगे है।सरकार के प्रति बाबाओं का रुख अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले विधानसभा चुनावों में बडी मुश्किलें खड़ी हो सकती है।

 बता दे कि बीते दिनों साधु-संतों द्वारा इस संबंध में सरकार को चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई जवाब नही दिया गया था।

दरअसल, लंबे समय से सरकार से नाराज चल रहे साधु-संतों ने अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा है। साधु संतों ने भोपाल समेत प्रदेश के कुल 42 स्थानों पर कलेक्टर के नाम अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि मंदिरों और मठों से कलेक्टर प्रबंधन को हटाया जाए।हालांकि इसकों लेकर साधु-संत करीब 15 सालों से मांग कर रहे है लेकिन हर बार सरकार उनकी मांग को पूरा करने के बजाय सिर्फ आश्वासन दे देती है। जिसके चलते बाबाओं में सरकार के प्रति आक्रोश है।अब साधु-संत खुलकर सरकार का विरोध कर रहे है।

बताया जा रहा है कि अगर सरकार ने उनकी मांग इस बार पूरी नही की तो वो पूरे प्रदेश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना विरोध जताएंगें।सुत्रों की माने तो आने वाले दिनों में छिंदवाड़ा में साधु-संत संगठन एक बड़ी बैठक करने वाले है,जिसमे सरकार के खिलाफ रणनीति तैयार की जाएगी । इस बैठक में महंत आंनदी गिरी, महंत गंगा प्रसाद, महंत बाबूदास, शिवगिरी महाराज समेत कई साधु संत शामिल होंगें। 

अब देखना ये है कि बाबाओं के इस विरोध का सरकार कैसे मुकाबला करती है और इस बार मनाने के लिए कौन सा दांव खेलती है।


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